जनवाणी संवाददाता |
मीरापुर: मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी जोन मेरठ निर्देशन मध्य गंगा बैराज के उजियाली के पास गंगा में घड़ियाल प्रजाति को संरक्षित करने के लिए वातावरण अनुकूल मिलने पर वन विभाग व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम के साथ तीन नर व 17 मादा घड़ियाल को गंगा में छोड़ा है। वन विभाग व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम एक माह तक गंगा में घड़ियाल की देखभाल करेगी।

मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी जोन मेरठ एन. के. जानू गुरूवार को दोपहर में गंगा बैराज पहुंचे। यहां पर उन्होंने डीएफओ सूरज कुमार के साथ हैदरपुर वेटलैंड में कराए जा रहे विकास कार्यो का निरीक्षण किया। गुरूवार को मुख्य वन सरंक्षक पश्चिमी जोन मेरठ एमके जानू ने घड़ियाल प्रजनन केंद्र, कुकरैल-लखनऊ से लाए गए 20 घड़ियाल, जिसमें 3 नर व 17 मादा हैं, को लेकर गंगा नदी के पास उजियाली में छोड़ा।
घड़ियाल दुर्लभ वन्य जीव है तथा इसका जीवितता मानक काफी कम है तथा घड़ियाल को जीवित रहने हेतु काफी संघर्ष करना पड़ता है। घड़ियालों के संरक्षण व प्राकृतवास हेतु टीम ने शुद्ध पानी व रेतीला तट उपयुक्त पाया था। वन क्षेत्राधिकारी मोहन कुमार बहुखंडी ने बताया कि मगरमच्छ व घड़ियाल की प्रजाति भिन्न होती है। उन्होंने बताया कि मगरमच्छ की बनावट साधारण होती है तथा इसके लंबे नुकीले दांत होते हैं व इनका जबड़ा पूरा खुलता है।

मगरमच्छ मनुष्य को नुकसान पहुंचाता है, जबकि घड़ियाल की बनावट विशेष होती है। नर घड़ियाल के मुंह पर ऊपर की ओर घड़े की आकृति बनी हुई होती है तथा इसका मुंह एक लंबी चोंच की तरह से होता है व इनके दांत छोटे होते हैं, जिनसे वह मछलियों को ही शिकार बनाता है तथा मनुष्य को नुकसान नहीं पहुंचाता है।
लखनऊ के कुकरैल घड़ियाल प्रजनन केंद्र से आये 20 घड़ियालो की उम्र अभी करीब 2 वर्ष की है तथा इनका वजन करीब 5 किलो से 7 किलो तक है तथा इनकी लंबाई भी 120 सेंटीमीटर से 156 सेंटीमीटर है। घड़ियाल पानी व जमीन दोनों पर रहते हैं तथा मादा घड़ियाल रेत में ही अंडे देती है।
इस दौरान डी.एफ.ओ सूरज कुमार, डब्लूडब्लूएफ के कार्यकर्ता संजीव यादव व शाहनवाज, वन दारोगा मोहनलाल, रवि कुमार, दीपक कुमार, पुनीत, अलीरजा, शबाब आलम आदि मौजूद रहे।

