Tuesday, May 28, 2024
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मेरठ मंडल में होगा 62 तालाबों का जीर्णोंद्धार

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  • एफडीआर टेंडर से पहले तुड़वाई, फिर खुले टेंडर
  • अब फिर से होंगे टेंडर, दो कंपनियों पर लगाया अर्थदंड

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लघु सिंचाई विभाग में शिवा इटरप्राजेज 16, टिया कंट्रेक्शन 12, श्याम त्यागी कान्टेक्टर 9 टेंडर डाले गए हैं। इनमें तीनों ऐसी कंपनी है, जो सभी बैंक एफडीआर टेंडर खुलने से पहले तुड़वा ली। फर्जी एफडीआर पर टेंडर डाल दिये। इन पर कार्रवाई डिबार की होनी चाहिए थी, सिर्फ अर्थदंड लगाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। विनिदाओं में एक-एक कंपनी प्रतिभाग में रह गई थी, जिसके चलते निविदा खुलने के लिए अगली तिथि लगा दी जाएगी।

फर्जी कागज के मामले में एक तरह से कार्रवाई बड़ी होनी चाहिए थी, लेकिन इनको बचाने का काम एसई आलोक सिन्हा ने किया। यूपी इलेक्ट्रानिक पर पंजीकरण नहीं होने पर दुर्गा कंटक्शन, राज बद्रस, भारद्वाज कंटक्शन आदि को डिबार कर दिया था, जबकि फर्जी एफडीआर जिन कंपनियों की जांच पड़ताल के दौरान पाई गयी, उनको अर्थ दंड लगाकर राहत दे दी। इससे स्पष्ट है कि एसई आलोक सिन्हा कुछ कंपनियों पर खास मेहरबानी दिखा रहे हैं। ई-टेंडर नियमों के अनुसार फाइनेंशल बिड नहीं खोली जा सकती, लेकिन एसई ने चहेते ठेकेदारों को टेंडर देने के लिए बिड खोल दी।

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ये सब नियम विरुद्ध था, लेकिन इसमें कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। कई मामलों कमिश्नर सेल्वा जे ने जांच के आदेश दिये थे, जिसके बाद भी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने की बताय पूरा घालमेल किया जा रहा हैं। एसई आलोक सिन्हा ने बताया कि तीन जनपदों में 62 तालाबों का जीर्णोद्वार करने के लिए 31.5 करोड़ रुपये अवमुक्त हुए हैं। बारिश के बाद इन पर तेजी से काम चलेगा। उम्मीद है कि जीर्णोद्वार के काम बेहतर होगा। तालाबों के संरक्षण के लिए बड़ी धनराशि यूपी और केन्द्र सरकार से मिल रही हैं।

अब देखना ये है कि तालाबों का जीर्णोद्वार कितनी ईमानदारी से ग्राम प्रधान अपने-अपने क्षेत्रों में कराते हैं। क्योंकि तालाबों के जीर्णोद्वार में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार हैं। भ्रष्टाचार रोकने के लिए कोई कदम विभाग के अफसर नहीं उठा पा रहे हैं। तालाबों में खुदाई के नाम पर जो भ्रष्टाचार हो रहा है, उसकी लखनऊ तक शिकायत पहुंच गई हैं। जांच भी चल रही हैं, जिसमें घालमेल होने की बात कही जा रही हैं। एक भी जांच में ठेकेदारों व अवर अभियंता पर कार्रवाई नहीं की गई।

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