Tuesday, May 5, 2026
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फूलों की खेती से महक रही क्रांतिधरा के किसानों की क्यारी

  • किसानों को मिल रहा एकीकृत बागवानी मिशन का लाभ
  • जिले में 200 हेक्टेयर में किसान कर रहे फूल की खेती

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: रफ्ता-रफ्ता ही सही, क्रांतिधरा फूलों की महक से सराबोर हो रही है। फूलों की खेती से अब तक मुंह मोड़ने वाले किसानों ने पारंपरिक खेती को छोड़ अब महक से जुड़े कारोबार की ओर कदम बढ़ाए हैं। कम लागत में अधिक मुनाफा भी किसानों को फूलों की ओर खेती की ओर मोड़ रहा है। वहीं, उद्यान विभाग भी ऐसे किसानों के लिए संजीवनी बनकर उभरा है। सरकार की ओर से मिलने वाली मदद भी किसानों की राह आसान कर रही है। यही वजह है कि चंद सालों में ही मेरठ में फूलों की खेती का कारोबार एक सीजन में एक करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है और आने वाले वक्त में इसमें बढ़ोतरी भी तय मानी जा रही है।

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जिले में फूलों की खेती अच्छी वैकल्पिक किसानी का साधन बन रहा है। कुछ किसानों ने धान, गेहूं, सब्जी की जगह फूल की खेती शुरू भी कर दी है। किसानों को अच्छा फायदा हो रहा है। कृषि विभाग ऐसे किसानों का उत्साहवर्धन भी कर रहा है। कई किसानों को फूलों की खेती के लिए प्रशिक्षण भी दिलाया गया है। इनमें से कुछ किसानों ने खेती की शुरुआत की है तो कुछ किसान इसके लिए विभाग के संपर्क में हैं।

सैनी गांव में सुभाष गेंदा फूल की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 10 कट्ठे से फूल की खेती शुरू किया है। अब तक इसमें अच्छा फायदा हुआ है। माल बिकने की समस्या नहीं है। लोकल मार्केट या फूल मंडी में आसानी से बिक्री हो जाती है। इसमें खर्च भी कम है और आमदनी भी अच्छी है। फूल लगाने का काम करने वाले लोगों को भी जानकारी हो गई है, इसलिए ऐसे लोग सीधे उनकी खेत पर पहुंच जाते हैं। वहीं से फूल खरीद लेते हैं।

कुंडा गांव की रहने वाली सोनाली ने बताया कि उन्होंने एक बीघे में फूल की खेती शुरू की है। काफी अच्छी आमदनी है। अधिकतर फूल मंडी में ही बिक जाते हैं। उन्होंने बताया कि एक-दो कट्ठे से इसकी खेती शुरू की थी। धीरे-धीरे रकवा बढ़ाते गए। अभी खेती और बढ़ाने की सोच रहे हैं। खेती में उनके पति अरविंद भी साथ देते हैं। उन्होंने बताया कि पौधों की देखरेख करने में थोड़ा ध्यान रखना पड़ता है। इसके अलावा ज्यादा परेशानी नहीं है। कोई समस्या आने पर उद्यान विभाग इनकी मदद करता हैं।

इसके अलावा परतापुर क्षेत्र में भी कुछ लोगों ने फूलों की खेती शुरू की है। अभी तक ज्यादातर गेंदा के ही फूल लगाये जा रहे हैं। हालांकि गुलाब और रजनीगंधा के फूल भी लगाने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। उद्यान विभाग के अधिकारी गमपाल सिंह ने बताया कि लगभग 200 किसानों को फूलों की खेती के लिए प्रशिक्षण दिलाया गया है। स्थानीय स्तर पर इसके लिए लगातार कार्यशाला करायी जा रही है। ताकि किसान धान-गेहूं के विकल्प के रूप में किसानी की नई विधा से जुड़ सकें।

15 खर्च, 25 रुपये कमाई

मेरठ में फूल उत्पादक किसानों में नाम कमा चुके परतापुर गांव के युवा किसान विक्रम बताते हैं कि अभी यहां फूलों की खेती को किसान उतनी तव्वजो नहीं दे रहे, हालांकि एक किलो फूलों के उत्पादन पर 15 रुपये का खर्च होता है। बात अगर मुनाफे की हो तो बाजार में 25 से 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से फूलों की बिक्री आसानी से हो जाती है। स्थानीय मंडी में भाव कभी-कभी और भी ज्यादा मिल जाते हैं। खास तौर पर शादी समारोह के दौरान फूलों की मांग बढ़ जाती है।

जिले में 200 हेक्टेयर में हो रही खेती

विक्रम के अनुसार जिले में अभी किसान कोलकाती ब्रांड के गेंदा के फूलों की खेती को ही अपना रहे हैं। यहां खेती का दायरा दो सौ एकड़ तक पहुंच चुका है। एक एकड़ में 70 से 80 कुंतल तक फूल उत्पादित होते हैं। जहां तक सालाना टर्नओवर की बात है तो प्रति एकड़ 70 हजार से सवा लाख रुपये तक की बिक्री होती है यानी एक साल में फूलों की खेती का कारोबार जिले में सवा करोड़ रुपये के करीब तक पहुंच चुका है। फूल उत्पादक किसान विक्रम के अनुसार गेंदा की खेती तीन माह बाद ही उत्पादन देना शुरू कर देती है, जबकि छह माह तक एक बार लगाई गई फसल से उत्पादन होता है।

अन्य राज्यों की मंडियों तक पहुंच

जिले के फूल उत्पादक किसान बताते हैं कि उनके फूलों को स्थानीय मंडी के साथ-साथ दूसरे राज्यों की मंडियों के कारोबारी सीधे भी संपर्क साधकर फूल खरीद रहे हैं। कई बार वह खुद भी इन मंडियों में अपने फूलों को लेकर जाते हैं। इससे कीमतें भी अच्छी मिल जाती हैं।

धीरे-धीरे सामने आ रहे किसान

जिला उद्यान अधिकारी गमपाल सिंह के अनुसार फूलों की खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ रहा है। सरकार भी सब्सिडी किसानों को मुहैया करा रही है। विभाग भी किसानों को समय-समय पर फूलों की खेती लोग जागरूक कर रहा है। किसानों को एकीकृत योजना का लाभ भी मिल रहा है।

बाजार भी है सुलभ

गेंदा फूलों को बेचने के लिए किसानों को अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ती है। गेंदा फूलों में औषधीय गुण होने के कारण इसकी बिक्री अधिक होती है। किसान बताते हैं कि गेंदा का एक खास महत्व है। गेंदा के कई औषधीय गुण भी हैं। गेंदा फूलों की खेती के लिए दोमट, मटियार दोमट एवं बलुआर दोमट मिट्टी सर्वोत्तम होती है। इसमें उचित जल निकास की व्यवस्था हो। भूमि की तैयारी भूमि को समतल करने के बाद एक बार मिट्टी पलटने वाले हल से तथा दो-तीन बार जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बनाने के बाद सुविधानुसार उचित आकार की क्यारियां बना ली जाती हैं।

एकीकृत बागवानी मिशन का मिल रहा लाभ

एकीकृत बागवानी मिशन का मिल रहा लाभ भी किसानों को बड़े पैमाने पर मिल रहा है। इस मिशन का किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके। इसके लिए किस क्षेत्र में कौन-सी फसल से बेहतर पैदावर ली जा सकती है, इसके संबंध में किसानों को जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही प्रशिक्षण भी दिया जाता है। प्रशिक्षण में किसानों को प्रचलित फसलों से हटकर अन्य फसलों की खेती करना सिखाया जाता है। इस योजना के लागू होने के बाद से भारत में फल, सब्जियों और फूलों के उत्पादन के साथ ही निर्यात का दायरा भी काफी बढ़ा है।

ये भी जानें

  1. 200 एकड़ में हो रही कोलकाती गेंदा की खेती
  2. 70 से 80 कुंतल प्रति एकड़ तक हो रही फसल
  3. 25 से 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से होती है बिक्री
  4. छह माह की फसल में तीन माह में उत्पादन शुरू
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