- रविवार को प्रत्याशी घोषित कर सकता है रालोद
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: विधान परिषद चुनाव के शनिवार को भाजपा ने अपने पत्ते खोल दिये। भाजपा ने मेरठ-गाजियाबाद से धर्मेंद्र भारद्वाज को प्रत्याशी घोषित किया हैं। हालांकि अभी रालोद असंमजस की स्थिति में हैं। रविवार की शाम तक रालोद प्रत्याशी का नाम भी घोषित हो सकता हैं। मेरठ-गाजियाबाद स्थानीय एमएलसी प्रत्याशी समेत भाजपा ने शनिवार को सभी 30 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किये हैं।
भाजपा के नाम से आठ लोगों ने नामांकन पत्र खरीदे थे। इनमें गाजियाबाद से आशू वर्मा, मेरठ से राजीव गुप्ता, धर्मेंद्र भारद्वाज, हरिकिशन गुप्ता, विकास कुमार, पवन सिंघल, विनोद कुमार और राकेश त्यागी शामिल थे। इनके अलावा मेरठ से भाजपा जिलाध्यक्ष विमल शर्मा, महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल, बागपत से नीरज शर्मा, गाजियाबाद से सूदन रावत और हापुड़ से कमल मलिक भी दावेदारों की सूची में शामिल थे।
धर्मेंद्र भारद्वाज को मेरठ-गाजियाबाद सीट से भाजपा ने प्रत्याशी बनाकर सबको चौका दिया। हालांकि पहले ही धर्मेंद्र भारद्वार नामांकन पत्र खरीद चुके थे। वह पूरी तरह से आश्वस्त थे कि उनको ही प्रत्याशी बनाया जाएगा। धर्मेंद्र भारद्वाज 2014 में मेरठ-सहानपुर स्नातक विधान परिषद से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं, जिसमें 22000 मत लेकर धर्मेंद्र हार गए थे। भाजपा का पूरा संगठन टिकट मांग रहा था, ऐसे में धर्मेंद्र का नाम घोषित होने के बाद संगठन के पदाधिकारियों में हड़कंप मच गया। आखिर संगठन के किसी भी व्यक्ति को जगह नहीं मिली। कई ऐसे संगठन के पदाधिकारी हैं, जो नामांकन भी खरीद चुके थे। पार्टी हाईकमान ने पूरे संगठन को धर्मेंद्र का चुनाव लड़ाने की हिदायत दी हैं।
संगठन भंग होने से विचलित हैं मसूद

सिवालखास के नवनिर्वाचित रालोद विधायक गुलाम मोहम्मद ने कहा कि संगठन भंग होने से मसूद विचलित हो गए हैं। ये मसूद के आरोप गलत हैं। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए टिकटों का वितरण हुआ हैं। तब मसूद को बोलना चाहिए था, जब संगठन को भंग कर दिया गया, तब आरोप लगाना गलत हैं। जयंत चौधरी को इस तरह के आरोप लगाकर मसूद घसीट रहे हैं, ये तमाम आरोप बेबुनियाद हैं। पूरा संगठन भंग हैं, जिसके बाद मसूद विचलित हो गए हैं।
टिकटों की हेरा-फेरी से हारा गठबंधन : डा. मसूद
रालोद के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डा. मसूद अहमद ने दल से किनारा कर लिया। पूर्व मंत्री ने पार्टी पर आरोप लगाया है कि टिकटों में हेरा-फेरी करने की वजह से गठबंधन की चुनाव में हार हुई है।
वफादारी को टिकट ने देकर ठेकेदारों पर दांव लगाना रालोद को भारी पड़ा है। शनिवार को पार्टी छोड़ने की घोषणा से पूर्व डा. मसूद ने रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी को चिट्ठी लिखी हैं, जिसमें उन्होंने चुनाव में पैसा लेकर टिकट देने से लेकर सच्चे कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं।
लंबे समय से वह रालोद से जुड़े हुए थे, मगर 2017 और अब 2022 के चुनाव में भी पार्टी ने उनको टिकट नहीं दिया था। इसी बात को लेकर वह टिकट वितरण के समय से ही पार्टी प्रमुख से नाराज चल रहे थे। चुनाव में गठबंधन की हार के बाद उन्होंने पार्टी का अलविदा कहा है।

