
एक वक्त के बाद करियर में ठहराव आ जाता है। बेहतर रहेगा कि उससे पहले अपने करियर में जितने भी एक्सपेरिमेंट करने हों, आप कर लें। इन दिनों प्राइवेट सेक्टर में जॉब की कोई गारंटी नहीं होती है। कंपनी के फंड्स में उतार-चढ़ाव आते ही कंपनियां कॉस्ट कटिंग करने में जुट जाती हैं। इसमें उन एंप्लॉइज की छंटनी सबसे पहले की जाती है, जो अपना काम सही ढंग से नहीं कर रहे होते हैं। अगर आप अपनी ड्रीम जॉब का हिस्सा नहीं हैं तो हो सकता है कि आप भी इस छंटनी के शिकार हो जाएं।
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सैलरी से ज्यादा जरूरी है अच्छा ब्रांड
अगर आपके पास कोई जॉब आॅफर आया है और उसमें सैलरी के अलावा सब कुछ आपके मन का है तो परेशान न हों। ऐसे में यह देखें कि आॅफर मार्केट के हिसाब से सही है या नहीं? कई कंपनियां नामी होने के बावजूद पैसे देने में कंजूसी करती हैं। करियर के शुरूआती दौर में सैलरी से ज्यादा कंपनी के नाम पर फोकस करें। सीवी पर बड़े ब्रांड का ठप्पा लगने से सैलरी बढ़ने की संभावना बनी रहेगी। इसलिए सैलरी से ज्यादा ब्रांड पर ध्यान दें।
चेक करें आॅफिस से घर की दूरी
अगर आपका घर आॅफिस से ज्यादा दूर है तो भी परेशान न हों। नई कंपनी से कैब सुविधा के बारे में पूछ लें। अगर कैब फैसिलिटी न हो लेकिन किसी के साथ पूल करके आॅफिस जाने का आॅप्शन हो तो भी उसके बारे में सोचा जा सकता है।
कंपनी नई है तो देखें बैकग्राउंड
आपके पास किसी नई कंपनी से जॉब आॅफर आया है और आप रिस्क उठा सकते हैं तो उसे एक्सेप्ट कर लें। हालांकि उससे पहले एंप्लॉयर का बैकग्राउंड चेक कर लें। कई बार कंपनी की शुरुआत खूब जोर-शोर के साथ की जाती है, लेकिन रिजल्ट न मिलने पर मैनेजमेंट का जोश फीका पड़ जाता है।
जब एक साथ मिलें कई आॅफर
कभी-कभी बार एक साथ कई कंपनियों में अप्लाई करने पर आॅफर भी एक से ज्यादा जगहों से मिल जाता है। ऐसी स्थिति में किसी कंपनी को जॉइन करने से पहले सभी कंपनियों के आॅफर और सुविधाएं चेक कर लें। फैसला लेते समय कंपनी की ब्रांड वैल्यू और उसके वर्क कल्चर पर ज्यादा फोकस करें


