Friday, February 20, 2026
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चुनाव के बाद से बढ़ रहा भाकियू व सरकार का तनाव

  • भाजपा विधायक व भाकियू के बीच भी चले थे शब्दों के बाण

जनवाणी संवाददाता  |

मुजफ्फरनगर: यूपी में विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा के खिलाफ खुलेआम मोर्चा लेने वाली भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ चुनाव निपटने के बाद से ही लगातार पुलिस प्रशासन के स्तर पर तनाव बना नजर आ रहा है। यहां तक कि यूनियन के आम कार्यकर्ताओं की बात छोड़ दें तो शीर्ष नेतृत्व को भी फोन पर धमकियां, गाली गलौच, अभद्रता और हत्या करने जैसे मामले काफी बढ़े हैं।

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अगर देखा जाये तो चुनाव परिणाम 10 मार्च को आने के बाद से ही भाकियू नेताओं की सोशल मीडिया पर हूटिंग शुरू हो गई थी। इसके बाद 20 मार्च को बुढ़ाना में आयोजित धन्यवाद सभा में पूर्व विधायक उमेश मलिक ने जिस प्रकार से सीधे तौर पर भाकियू कार्यकर्ताओं को भगा भगा कर मारने का ऐलान करते हुए तहसीलों और थानों में प्रदर्शन करने की चुनौती पेश की,उसने इस तनाव को और बढ़ाने का काम किया है।

उमेश मलिक की इस चुनौती के अगले ही दिन विश्वासघात दिवस मनाते हुए भाकियू के लोगों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और यहां पर भाकियू नेताओं के द्वारा केसरिया टोपी वालों से आरपार की जंग का ऐलान करते हुए गांवों में नहीं घुसने देने की चुनौती दे डाली। इसके बाद काली नदी के पास सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा हटवाने गये एसडीएम सदर की यूनियन के कार्यकर्ताओं के साथ तीखी झड़प हुई और पुलिस प्रशासन ने भाकियू के ऐतराज को दरकिनार करते हुए बुल्डोजर चलवा दिया।

इसके बाद अचानक ही भाकियू नेता राकेश टिकैत को फोन पर हत्या की धमकी और अभद्रता का मामला उठा और हंगामा मच गया। इतना ही नहीं बागोवाली में कुछ किसानों के कनेक्शन काटने को लेकर भाकियू नेताओं ने जब जेई प्रदीप चौहान से ऐतराज जताया तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया।

इसको लेकर टाउनहाल में 28 मार्च को यूनियन के कार्यकर्ताओं ने धरना प्रदर्शन किया और एक्सईएन नगरीय डीसी शर्मा को बंधक बना लिया। 28 की रात में ही जब भाकियू नेता अमरजीत जिला अस्पताल में परिचितों का उपचार कराने पहुंचे तो वहां पर चिकित्साकर्मियों ने उनके साथ अभद्रता कर डाली और पुलिस ने पदाधिकारी को हिरासत में ले लिया।

गाड़ी भी जब्त कर ली गयी। इसी को लेकर आज कोतवाली में बड़ा हंगामा खड़ा हो गया। यह सारे प्रकरण चुनाव के बाद तेजी से सामने आये हैं। इसमें लगातार इजाफा हो रहा है। इससे भाकियू का पुलिस प्रशासन के साथ टकराव और बढ़ने लगा है।

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