- गर्मी में शिवालिक वन प्रभाग में वन्य जीवों के लिए खतरा
जनवाणी संवाददाता|
सहारनपुर: गर्मी लगातार बढ़ रही है और शिवालिक वन प्रभाग में घूमने वाले वन्य जीवों की जान पर बन आई है। आम आदमी के जंगलों में हस्तक्षेप से वन्य जीव वैसे ही हलकान थे, अब प्रचंड गर्मी में वन्य जीवों के सामने पानी का संकट छा गया है। अधिकांश वाटर होल खाली पड़े हैं और उनमें पानी नहीं है। ऐसे में वन्य जीव आबादी में भाग रहे हैं, जहां उनके शिकार किए जाने का खतरा बढ़ गया है।
शिवालिक वन प्रभाग 33229 हेक्टेयर में फैला है। यहां वर्तमान में तकरीबन 7303 वन्य जीव हैं। इनमें 186 काकड़, 39 फिशिंग कैट, 356 सांभर, 210 घुरल, 96 लोमड़ी, 121 सियार, 99 जंगली बिल्ली, 101 बिज्जू, 172 सेही, 176 गोह, 1869 बंदर, 1164 लंगूर, चार बारहसिंघा, 612 बन रोज, 527 मोर, 45 तेंदुए और लगभग 22 हाथी हैं। अब चूंकि गर्मी प्रचंड हो चली है|
लिहाजा शिवालिक वन प्रभाग में विचरने वाले वन्य जीव आबादी की ओर भाग रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इस वन क्षेत्र में गर्मी के मौसम में वन्य जीवों की प्यास बुझाने को बनाए जाने वाले वाटर होल में अब पानी नहीं है। वहीं, वन गुर्जरों और आसपास के के ग्रामीणों का वन प्रभाग में दखल बढ़ रहा है। बहरहाल, वन्य जीव अब आबादी की ओर भाग रहे हैं।
ऐसे में उनके शिकार किए जाने का खतरा बढ़ गया है। यह भी बता दें कुछ समय पहले शिवालिक वन प्रभाग की मोहंड रेंज में नीचे लटकी एचटी लाइन के तारों की जद में आ कर हाथी की मौत हो गई थी। कई बार गुलदारों तक की मौत हो चुकी है। गांव बुड्ढाखेड़ा पुंडीर के खेतों में मादा गुलदार अपने दो शावकों के साथ उतर गई थी।
इनमें से एक शावक को ग्रामीणों ने लाठी डंडों से पीट कर मार डाला था। कुछ समय पहले शाकंभरी रेंज में गांव अब्दुल्लापुर के खेतों में उतरे गुलदार ने डिप्टी रेंजर पूणार्नंद कुकरेती पर हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
बहरहाल, अब हालात जुदा हैं। रात में हाथी, हिरन, गुलदार, काकड़, सांभर आदि वन्य जीव आबादी की ओर भाग रहे हैं। प्यास के मारे इन वन्य जीवों का बुरा हाल है।
इन्होंने कहा..
वन्य जीवों के लिए पानी का पूरा इंतजाम किया गया है। वाटरहोल लगभग हर संभावित स्थानों पर बनाए गए हैं। शिवालिक में प्राकृतिक जलस्रोत भी हैं। लेकिन, हिरन व कांकड़ तथा सांभर का रात में ज्यादा मूमेंट होता है। वह आबादी की ओर भागते हैं। इनका शिकार न होने पाए, इसकी पूरी निगरानी रहती है।
श्वेता सेन, डीएफओ सहारनपुर।

