Sunday, March 22, 2026
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हैकिंग की शिकार संस्थाएं

 

Samvad 28


Shambhu Sumanहाल के दिनों में ट्विटर अकाउंट हैकिंग की हुई घटनाओं में सरकारी संस्थाओं के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय और पीएम नरेंद्र मोदी तक को टारगेट किया गया। इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में विगत पांच अप्रैल को ‘इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम’ के हवाले से एक लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2017 से लेकर मार्च 2022 तक इंटरनेट मीडिया के कुल 641 अकाउंट हैक किए जा चुके हैं। इनमें ईमेल अकाउंट से लेकर ट्विटर हैंडल तक शामिल हैं। बीते साल इसकी संख्या 175 थी, तो इस साल की पहली तिमाही में ही 28 अकाउंट हैक हो चुके हैं।

इस जानकारी के बाद महज एक सप्ताह के भीतर ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय, भारतीय मौसम विभाग और यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ट्विटर हैंडल हैक कर लिए गए। हैकर्स ने नौ अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के ट्विटर हैंडल को कई मिनट तक हैक करके रखा। इस दौरान उस हैंडल के प्रोफाइल पिक्चर में मुख्यमंत्री की तस्वीर के साथ भी छेड़छाड़ करने का प्रयास किया गया।

उसके साथ ही उसमें आफिशियल ट्विटर हैंडल आफ चीफ मिनिस्टर आफिस उत्तर प्रदेश लिख दिया। हैकर इतने तक ही नहीं रुके और लगभग 15 मिनट में ही 500 से अधिक ट्वीट भी कर डाले और करीब पांच हजार लोगों को टैग भी कर लिया। हालांकि इसे आधे घंटे के भीतर ही रिकवर कर लिया गया और मामले की जांच में साइबर एक्सपर्ट जुट गए।

उसी दिन भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) का ट्विटर अकाउंट भी हैक कर लिया गया। हैकर्स ने अपनी तरफ से उसमें एक संदेश भी लिख दिया, जिससे काफी देर तक भ्रम की स्थिति बनी रही। इस अकाउंट को करीब दो घंटे तक अपने कब्जे में रखने के दरम्यान हैकर्स ने न केवल प्रोफइल फोटो को बदला, बल्कि उस पर एनएफटी ट्रेडिंग भी शुरू कर दी। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि आइएमडी की हैकिंग एनएफटी से जुड़ी थी।

दरअसल इसी वर्ष जनवरी में मर्सिडीज-बेंज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी ग्रुप आर्ट टू पीपल के साथ मिलकर अपनी पहली एनएफटी स्कीम के साथ एनएफजी करार किया था। इसके तहत पांच शीर्ष अंतरराष्ट्रीय कलाकार बेहतर कलाकृति बनाकर जी-क्लास के सामने लाते हैं। एनएफटी एक एकल डाटा संपत्ति है, जैसे एक वीडियो की एक फुटेज जिसे ब्लाकचेन पर बनाया गया और संग्रहित किया जाता है।

कुल मिलाकर यह डिजिटल मार्केटिंग का एक सुनियोजित फंडा बन चुका है। हैकर्स के लिए नामी अकाउंट से जुड़े लोगों तक ‘एनएफटी एसेट’ को पहुंचाने का यह आसान जरिया है। इस नई सुविधा वाली तकनीक में किसी भी चीज, जैसे पेंटिंग, टेक्स्ट कंटेंट, तस्वीर, वीडियो, जीआइएफ, गाने, सेल्फी आदि को डिजिटल बनाने की सुविधा मिल गई है। वैसे यह ब्लाकचेन का ही हिस्सा है।
इस तरह के मामलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ दुनियाभर के कई लोकप्रिय नाम शामिल हैं।

अक्सर बहुत अधिक संख्या वाले फॉलोअर्स के ट्विटर हैंडल हैक किए जाते हैं। दरअसल ट्विटर आज सरकारी कामकाज को गतिशील और पारदर्शी बनाने के लिए फौरी सूचना पहुंचाने का एक सहज जरिया बन चुका है। केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों के अलावा बड़े मीडिया संस्थानों के ट्विटर हैंडल पर लाखों में फालोअर्स होते हैं। हैकर्स बड़ी ई-कामर्स कंपनियों से मोटी रकम लेकर उन्हें हैक करने की ताक में रहते हैं। हैक अकाउंट का इस्तेमाल उनके संदेश को तेजी से ट्वीट करने के लिए करते हैं।

बहरहाल, हैकर्स ट्विटर हैंडल को हैक करने के जितने भी तरीके अपनाते हैं, उनमें कहीं न कहीं से चूक हो ही जाती है। उसे पकड़ने और रोकने के हमारे इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पास भी पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। फिशिंग लिंक, डाटाबेस एक्सेस, कमजोर पासवर्ड, अकाउंट और ईमेल आइडी, कूकीज या कैशे, ओटीपी शेयर, इमेज, पब्लिक वाइफाइ, पर्सनल डिटेल और सिक्योरिटी सेटिंग सुरक्षा के तरीके में कमी का होना स्वाभाविक है।

इसकी मूल जड़ डिजिटल मार्केटिंग के लिए अपनाया जाने वाला गैरकानूनी तरीका और पकड़ में आने पर साइबर क्राइम की श्रेणी से बाहर होना है।
इसका नया कारण सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एनएफटी यानी नन-फंजिबल टोकन सामने आया है। डिजिटल ऐसेट के रूप में यह एक ऐसी संपत्ति होती है, जिसकी नकल नहीं की जा सकती। अपनेआप में यह यूनिक होता है।

पिछले दिनों इसकी चर्चा पहले ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डोर्सी के ट्वीट की नीलामी एनएफटी के रूप में होने के कारण हुई थी, जो 10 सेकेंड के वीडियो क्लिप में था। इसे 24 लाख डालर यानी करीब 48.44 करोड़ रुपये में बेचा गया था। उसके बाद ही लोगों को मालूम हुआ कि एनएफटी मोटी कमाई का एक जरिया बन चुका है। कोविड महामारी के दौर में एनएफटी डिजिटल एसेट के प्रति लोगों की तब रुचि जगी थी|

जब कला और मनोरंजन की गतिविधियां थम गर्इं थीं। अमिताभ बच्चन ने अपने पिता हरिवंशराय बच्चन की पुस्तक मधुशाला की प्रति, साइन वाले पोस्टर और कुछ अन्य चीजों को एनएफट के जरिए बेचकर मोटी रकम अर्जित की।

हालांकि इस तरह से तैयार उत्पाद से कमाई तब तक नहीं हो सकती, जब तक इस बारे में लोगों को पर्याप्त जानकारी नहीं हो जाती। यानी लोगों के हमेशा इस्तेमाल किए जाने वाले डिवाइस में इसका लिंक मिलने पर ही इसकी खरीद बिक्री में तेजी आ सकती है। इथेरियम तकनीक पर बने एनएफटी को ब्लाकचेन टेक्नोलाजी के जरिए रखा और कई जगहों पर बेचा जा सकता है। इसमें आर्टपीस, म्यूजिक, गेम, तस्वीरें, गेम, वीडियो आदि डिजिटल रूप में होते हैं।

इसे अधिक से अधिक लोगों तक विश्वसनीयता के साथ पहुंचाने के लिए वेरिफाइड अकाउंट की मदद ली जाती है। जैसाकि यूजीसी के ट्विटर अकाउंट के साथ किया गया। इसमें हैकर्स की मदद करते हैं और एनएफटी उत्पाद के प्रमोशन के के लिए कुछ समय के लिए किसी अकाउंट को हैक कर लेते हैं।

वे एनएफटी कंटेंट को बेचने का एक लाखों की संख्या के फलोअर्स वाले प्लेटफार्म उपलब्ध करवा देते हैं। इसके बेचने के लिए क्रिप्टोकरेंसी से चलने वाला तरीके को अपनाया जाता है। इसमें बेची जानेवाली चीजों को मार्केट प्लेस पर डालना होता है|

जिसका आकार अधिकतम 100 एमबी तक लेजर रेज की तरह हो सकता है। उसके लिए सबसे अच्छी जगह ट्विटर हैंडल को माना गया है। इसमें एनएफटी को आनलाइन बनाते हुए ट्रेड किया जा सकता है।


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