- सरधना में मंदिर और मस्जिद की एक ही है दीवार
- सरधना में स्थापित है देश का दूसरा ब्रह्मा जी का मंदिर
- आपसी सौहार्द के साथ त्योहार मनाते हैं सभी धर्म के लोग
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: सरधना वैसे तो अपनी तमाम खासियतों की वजह से जाना जाता है। प्राचीन धरोहर से लेकर तीखी राजनीति सरधना को देश में अलग पहचान दिलाती है। मगर यह कस्बा मोहब्बत की नगरी के नाम से भी अपनी पहचान रखता है। मोहब्बत की नगरी इसलिए, क्योंकि यहां लोगों में प्रेम के बीच धर्म कोई मायने नहीं रखता है। कुछ नेता राजनीतिक रोटी सेकने के लिए कई बार माहौल गर्म करने की कोशिश करते हैं, लेकिन यहां की मिठास उस जहर को पनपने नहीं देती।

मोहब्बत की कई मिसालों में एक यह भी है कि सरधना में तमाम मंदिर-मस्जिद एक-दूसरे के सामने हैं। बावजूद इसके आज तक किसी को धर्म के आधार पर कोई परेशानी नहीं हुई। देश का दूसरा ब्रह्मा जी का मंदिर भी यहीं स्थित है। जिसके बराबर में मस्जिद बनी हुई है। मंदिर और मंस्जिद के बीच एक ही दीवार का अंतर है। सुबह शाम मंदिर और मंस्जिद में आरती व अजान गूंजती है तो मोहब्बत की चासनी और मिठी हो जाती है।
सरधना के बूढ़ा बाबू मोहल्ले में ब्रह्मा जी का मंदिर स्थापित है। इस मंदिर का इतिहास सैकड़ों साल पुराना बताया जाता है। इसी मंदिर बूढ़ा बाबा के नाम पर यहां हर साल विशाल मेला लगता है। खास बात यह है कि देशभर में ब्रह्मा जी के सिर्फ दो ही मंदिर हैं। पहला पुष्कर राजस्थान और दूसरा सरधना में। मंदिर और खास इसलिए हो जाता है, क्योंकि इसी के बराबर में बड़ी मस्जिद भी बनी हुई है।

मंदिर और मस्जिद के बीच एक दीवार का अंतर है। इससे भी आगे की बात यह कि चार कदम की दूरी पर जैन समाज का श्री दिगंबर जैन वीर मंदिर भी बना हुआ है। हिंदू समाज के लोग मंदिर जाते हैं और मुस्लिम समाज के लोग मस्जिद। सुबह शाम आरती और अजान की गूंज लोगों के कान में पड़ती है तो मोहब्बत की चासनी और मीठी हो जाती है। पुराने लोग बताते हैं कि आरती और अजान तो दूर मस्जिद व मंदिर की किसी भी बात को लेकर आज तक कोई विवाद नहीं हुआ है।

मस्जिद जाने वाले हिंदू भाइयों को नमस्ते करते हैं तो मंदिर जाने वाले मुस्लिम भाइयों को सलाम करने से नहीं चूकते। यहां तक की ईद, दीवाली, होली सभी त्योहार एक साथ मिलकर मनाते हैं और बधाई देते हैं। वैसे तो कई बार कुछ लोगों ने अपनी राजनीतिक रोटी सेकने के लिए नगर की फिजा को खराब करने की कोशिश की, लेकिन यहां की गंगा जुमनी तहजीब ने हमेशा कस्बे का मान रखा और ऐसे लोगों को कामयाब नहीं होने दिया। आज भी यह मंदिर मस्जिद तमाम ऐसे शहरों के लिए मिसाल है, जो धर्म के नाम पर लड़ने या लड़ाने की कोशिश करते हैं। इसी सौहार्द के चलते सरधना को मोहब्बत की नगरी का नाम दिया गया है।
कई जगह मंदिर-मस्जिद पास में
बूढ़ा बाबू के अलावा चौक बाजार में भी मस्जिद और मंदिर एक-दूसरे के सामने हैं। इसके अलावा तहसील रोड, तहसील मुख्यालय के निकट भी मंदिर मस्जिद की दूरी कुछ ही कदम की है। मगर आज तक किसी भी धर्म के लोगों को एक-दूसरे से कोई परेशानी नहीं बनी है।
पुराना है मंदिर का इतिहास
बूढ़ा बाबू में बने ब्रह्मा जी के मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। मंदिर की देख रेख करने वाले ब्रजमोहन गुप्ता बताते हैं कि मंदिर करीब 300 साल से भी पुराना है। पहले यह मंदिर छोटा हुआ करता था। बाद में उनके पिता धनीराम गुप्ता ने सभी के सहयोग से पक्का मंदिर बनवाया। देशभर में ब्रह्माज के सिर्फ दो मंदिर हैं। पहला पुष्कर राजस्थान और दूसरा सरधना में बना हुआ है। वहीं 80 वर्षीय अमीरुद्दीन बताते हैं कि धर्म के नाम पर यहां कोई विवाद नहीं हुआ है। सभी लोग पीढ़ी दर पीढ़ी प्रेम से रहते चले आ रहे हैं।
तीन धर्म के स्थल एक ही जगह
ब्रह्मा जी के मंदिर के ठीक बराबर में एक मस्जिद बनी हुई है। मंदिर और मस्जिद के बीच सिर्फ एक दीवार का अंतर है। उसी से चार कदम की दूरी पर दिगंबर जैन समाज का मंदिर बना हुआ है। देखा जाए तो महज 10-20 मीटर के दायरे में तीनों धर्म के धार्मिकस्थल यहां स्थापित हैं। जो आपसी सौहाद का प्रतीक हैं।

