- इलाज में भी लापरवाही बरतने का लगाया आरोप
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लाला लाजपत रॉय मेडिकल कॉलेज में पहुंचे वाले मरीजों को न तो सही इलाज मिल रहा है नहीं सुविधाएं। यहां तक की मरीजों के तीमारदार अपने मरीज एक जगह से दूसरी जगह लाने ले जाने के लिए खुद ही स्ट्रेचर खींचने को मजबूर है।
मेडिकल में इलाज के लिए पहुंचे मरीज सतपाल के परिजनों ने बताया कि मरीज की रीढ़ की हड्डी में फे्रक्चर है।
इमरजेंसी में भर्ती कराया था, जहां उनका इलाज ठीक से नहीं किया जा रहा है। मरीज को केवल ग्लूकोज की बोतल लगा दी जाती है, जबकि इलाज नहीं किया जा रहा। जब हम मरीज के इलाज को लेकर डाक्टर से बात करते है तो कहा जाता है कि इलाज चल रहा है। हमें मरीज को सिटी स्केन करने के लिए भेजा गया, लेकिन सिटी स्केन सैंटर में पता चला कि तारीख 21 मई की है।

साथ ही दो हजार रुपये की रसीद कटेगी तभी मरीज को लेकर आना। मरीज को सिटी स्केन कराने के लिए खुद ही स्ट्रेचर पर लेकर गए थे और अब वापस ला रहे है। इलाज नहीं मिलने से परेशान होकर अब मरीज की छुट्टी करानें जा रहे है। ऐसा ही हाल एक अन्य मरीज का भी है, इस मरीज के तीमारदार ने अपनी पहचान छिपाते हुए बताया कि पिछले दो दिनों से मरीज इलाज के लिए भर्ती है, लेकिन उसकी देखभाल नहीं हो रही है।

मरीज को पथरी है, केवल ग्लूकोज की बोतल लगा दी जाती है। दर्द होने पर कोेई नर्स या दूसरा स्वास्थ्यकर्मी देखने नहीं आता है। एक्सरे के लिए भी मरीज को खुद ही स्ट्रेचर पर लेकर जाना पड़ रहा है, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का कोई अता पता नहीं है। मरीज का कैसे इलाज होगा पता नहीं है, अब मरीज की पथरी जबतक बाहर नहीं निकलती है तो उसे यहीं रखना होगा। यदि यहां का प्रशासन मरीजो की इस स्थिति को लेकर कुछ कदम उठाए तो काफी राहत मिल सकती है।
उधर, मेडिकल में तीमारदारों द्वारा स्ट्रेचर खींचे जाने पर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल डा. आरसी गुप्ता का कहना है कि उनके यहां हर समय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मरीजों को स्ट्रेचर पर ले जाने को तैनात रहते हैं। जिन तीमारदारों को खुद मरीज ले जाना पड़ रहा है, उन्हें किस वजह से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हो सके यह जानकारी करनी होगी।

