Wednesday, May 20, 2026
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अभी तक तो बारिश के लिहाज से अधूरी तैयारियां

  • क्या मानसूनी बारिश से पहले साफ हो पाएंगे शहर के नाले
  • गंदगी से अटे नालों से हर बार बारिश में हो जाता है भारी जलभराव
  • शहर के नालों पर किया गया अतिक्रमण भी है सबसे बड़ी समस्या, समाधान शून्य

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की बारिश आने में मात्र 20 दिन बाकी बचे हैं, लेकिन अभी तक नगर निगम द्वारा शहर में नालों और नालियों की सफाई का कार्य शुरू भी नहीं किया गया है। जबकि नगर निगम शहर के तमाम नालों और नालियों की सफाई समय से कराने का दावा कर रहा है। वहीं शहर के 80 फीसदी नालों पर भारी अतिक्रमण किया गया है। जोकि अपने आपमें एक बड़ी समस्या है।

आला अधिकारियों के दिशा-निर्देर्शों के बावजूद नगर निगम नालों से अतिक्रमण हटाने में विफल है। ऐसे में बडा सवाल यह बनता है कि क्या हर बार की तरह इस बार भी बरसात में शहर वासियों को भारी जलभराव और गंदगी से पनपी बीमारियों का सामना करना पड़ेगा या नहीं। नगर निगम की कार्य प्रणाली को देखते हुए तो ऐसा लगता है कि शहर में इस बार भी हर बार की तरह बारिश शुरू होते ही जलभराव की भारी समस्या लोगों के सामने ज्यों की त्यों रहेगी।

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नगर निगम के खोखले दावों के अनुसार इस बार बारिश आने से पहले शहर के सभी छोटे-बड़े नाले और नालियां साफ हो जाएंगी। इसके लिए नगर निगम ने कार्य योजना तो तैयार कर ली है और संबन्धित अधिकारियों को इसका विवरण भी सौंप दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इस बाबत कोई भी कार्य नहीं हो पा रहा है। जबकि मई के आखिर तक शहर के सभी नाले और नालियां साफ करने के शासन द्वारा सख्त निर्देश दिए गए थे।

घंटाघर नाला, पटेल नगर नाला, ओडियन नाला, मोहनपुरी व भुमिया के पुल वाले नालों समेत शहर के तमाम नालों व नालियों में गंदगी की भरमार है। सभी नाले गंदगी से अटे पड़े हैं। गंदगी के कारण लोगों को भारी बदबू के कारण मुंह पर रुमाल या कोई कपड़ा रख कर यहां से गुजरना पड़ रहा है। इन दिनों शहर के विभिन्न क्षेत्रों से नालों की सफाई न होने की शिकायतें लोगों द्वारा की जा रही हैं।

गंदगी से बिमारियां फैलने की आशंका बनी हुई है। बावजूद इसके शहर के सफाई कर्मचारी भी अधिकांश कूड़ा-करकट नालों और नालियों में डाल रहे हैं। शासन के सख्त निर्देर्शों के बावजूद नगर निगम द्वारा शहर के नालों की सफाई नहीं की जा रही है। इसका खामियाजा शहर की जनता को जलभराव, गंदगी और बीमारियों का सामना करके चुकाना पडेÞगा।

कुल 315 नालों की होनी थी सफाई

नगर निगम क्षेत्र में छोटे-बडेÞ कुल मिलाकर के 315 नाले हैं। इनमें 11 नाले काफी बड़े हैं जो काफी बड़े क्षेत्र से होकर के गुजरते हैं। नगर निगम के खोखले दावों के अनुसार इन नालों को साफ करने के लिए आठ जेसीबी और अन्य कई मशीनें कार्य कर रही हैं, लेकिन धरातल पर सफाई कार्य टस से मस नहीं हो पा रहा है। जिसके कारण शहर वासियों को बरसात में हर बार की भांति इस बार भी कोई राहत नहीं मिलने वाली।

नालों पर अतिक्रमण, किया अवैध कब्जा

शहर के तमाम नालों पर अधिकांश दबंगों द्वारा अतिक्रमण करके कब्जा किया गया है। जोकि नालों की सफाई में बाधा डालता है जब भी अतिक्रमण की जगह पर सफाई करने की कोशिश की जाती है तो कब्जा करने वाले इस बात का विरोध करते हैं और हंगामा कर देते हैं। जिसके चलते नालों की सफाई में रुकावट आती है। शासन द्वारा कई बार इस बाबत दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं, लेकिन हर बार व्यवस्था फेल होती नजर आती है।

अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा नालों पर अतिक्रमण

शहर में नालों पर अतिक्रमण यूं ही नहीं हो रहा। बताया जा रहा है कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों क ी मिलीभगत के कारण यह अतिक्रमण किया जा रहा है। जिनमें नालों के उपर विभिन्न स्थानों पर कब्जा किया हुआ है। भूमिया के पुल वाले नाले पर कब्जा करके दुकानें बना रखी हैं, लेकिन इस बाबत नगर निगम सब कुछ जानते हुए भी अंजान बना हुआ है। अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण हटवाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

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