Tuesday, March 31, 2026
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दरियादिल या सनक

Ravivani 32


शेर सिंह |

रविवार का दिन था। वह दोपहर बाद नियत घरों में अपने रोजमर्रा के कार्यों को निपटा कर आ गई थी। छुट्टी का दिन होने के कारण उसके दोनों बच्चे भी घर में ही थे। पति राजमिस्त्री है। उसकी कभी छुट्टी नहीं होती थी। वह लोगों के घरो में और पति दिहाड़ी पर काम करता था। दोनों बच्चे स्कूल जाते थे।

वह अभी बैठकर सोच ही रही थी कि खाने में क्या बनाया जाए, इतने में कमजोर से दरवाजे की कुंड़ी जोर से बजने और किसी के कुछ बोलने की आवाज आई।

कौन है?’ दरवाजे की ओर बढ़ते हुए उसने अंदर से ही पूछा।

जय हो!’ जैसे ही उसने दरवाजे का पल्लास खोला, बाहर बाबा किस्म का एक व्यक्ति कमंडल लिए खड़ा था।

माई! कुछ दान…पुन कर दो…भला होगा।’ उसे देखते ही वो बोल पड़ा। वह कुछ क्षण सोचती सी रह गई।

भगवान तुम्हारा भला करेगा…मेरा आशीर्वाद है। तुम्हारे बच्चे फलेंगे… फूलेंगे…।’

बाबा! अन्न…अनाज तो कुछ नहीं है।’

बच्चा! कोई बात नहीं…पैसे ही दे दो।’ बाबा का थका सा उदास-उदास चेहरा उसके दिल में उतर गया था। वह स्वयं लोगों के घरों में चौका-बर्तन करती है। लेकिन दरवाजे पर आए याचक को कैसे निराश करे? उसने स्वयं से ही सवाल किया।
वह पल भर स्थिर रही। फिर भीतर को लौट गई। जब वापस बाहर आई, तो उसके हाथ में पांच सौ रुपए का एक नोट था। आज उसे एक घर से महीने की पगार मिली थी। उसी में से उसने पांच सौ का एक नोट उसके कमंडल में डाल दिया।

तुम्हारा भला हो…भगवान तुम्हें बहुत देगा!’ बाबा का मुंह हैरानी से खुला रह गया था। फिर उसकी दरियादिली पर खुश होकर उसे आशीर्वाद देते हुए प्रसन्न मन से आगे बढ़ गया। वह स्वयं असमंजस जैसी मन:स्थिति में घर के भीतर आ गई।



आंखें

जोया अख्तर |

20 साल का एक युवक ट्रेन की खिड़की से बाहर के नजारों को देख कर हैरान है। अचानक वह खुशी से चिल्लाता है, पापा, देखो ये पेड़ कितनी तेजी से पीछे भाग रहे हैं। 60 साल के उसके पिता के चेहरे पर खुशी है। वह मुस्कुरा देते हैं।
वयस्क युवक का बच्चों सा किलकना सामने बैठे एक युवा दंपत्ति को अजीब लगता है। वे असहज होते हैं लेकिन कुछ कहे बिना रह जाते हैं।

युवक खिड़की की कांच में चेहरा सटाए बाहर के दृश्यों में मशगूल रहता है। उसकी नजर सफेद बादलों पर पड़ती है और वह फिर खुशी से चीख पड़ता है, देखो, पापा देखो, ये बादल हमारे साथ चल रह हैं। पिता फिर मुस्कुराते हैं और खुश होते हैं। युवा दंपत्ति इस बार खुद को रोक नहीं पाते। आप अपने बेटे को किसी डॉक्टर से क्यों नहीं दिखाते, वे बुजुर्ग से कहते हैं। वह फिर मुस्कुराए और बोले, हां, हम डॉक्टर के पास से ही आ रहे हैं। मेरा बेटा जन्म से अंधा था। पहली बार आज वह अपनी आंखों से दुनिया देख रहा है।

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