- सौभाग्य की वर्षा करेंगे भगवान आशुतोष
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: श्रावण माह में सभी देवता शयन करते हैं, लेकिन शिव जागृत रहते है। इसी कारण श्रावण को भोलेनाथ की भक्ति का कालखंड माना गया है। श्रावण माह की शुरुआत 14 जुलाई को हो रही है। जिसमें व्रत रखकर भोलेनाथ का रुद्राभिषेक किया जाता है और शिव प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।
बता दें कि इस वर्ष सावन के पहले सोमवार पर शोभन नामक योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि उक्त योग में व्रत व अनुष्ठान करने वालों पर भगवान शिव सौभाग्य की वर्षा करते हैं। ज्योतिषाचार्य मनीष का कहना है कि श्रावण माह शिव साधना का सबसे पवित्रव प्रभावशाली मास है।
माता पार्वती ने श्रावण मास में व्रत रखकर शिव को प्राप्त किया था। वैवाहिक जीवन की कुशलता, सुख-समृद्धि के लिए महिलाओं को शिव की स्तुति करनी चाहिए। वहीं सावन में अविवाहित युवतियां व्रत रखकर शिव स्तुति करती है तो उन्हें योग्य वर की प्राप्ति होती है।
पुरुषों को दैहिक, दैविक व भौतिक कष्टों से मुक्ति के लिए शिव की स्तुति करनी चाहिए। श्रावण सोमवार व प्रदोष का व्रत रखकर शिव की स्तुति करने वाले साधक को 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के समान फल प्राप्त होता है। सावन का महिला 14 जुलाई से 12 अगस्त तक रहेगा। इसबार सावन के हर सोमवार पर अलग योग बन रहा है। प्रदोष व्रत 26 जुलाई को पड़ेगा।
इस प्रकार गुजरेगा सावन का महीना
- पहला सोमवार 18 जुलाई को जिसपर शोभन योग बन रहा है।
- दूसरा सोमवार 25 जुलाई को जिसमें भगवान शिव का सबसे प्रिय मृगशिरा नक्षत्र व ध्रुव योग बन रहा है।
- तीसरा सोमवार एक अगस्त को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा।
- चौथा सोमवार 8 अगस्त को वैधृति योग में मनाया जाएगा।

