- इस समय कावंड मेले के अवसर पर चारों तरफ बम भोले की गूंज के साथ भगवाधारियों की धूम मची हुई है
- कांवड़ पटरी-हाईवे और शहर में आस्था और श्रद्धा की अवरिल धारा बह रही है
जनवाणी संवाददाता |
हरिद्वार: देवभूमि में प्रमुख रूप से गंगा यमुना और पंचप्रयाग की नदियों से जल लेकर विभिन्न स्थानों पर जाकर भगवान शंकर का जलाभिषेक करने के लिये लाखों की संख्या में कांवडिये जमा हो चुके हैं । कांवडिये जहां समूहों में जय भोले बम भोले हर हर महादेव का उदघोष करते हुये विभिन्न स्थानों पर रूके हुये हैं वहीं पहाडों की उंचाइयों से बहने वाली नदियों से जल इकटठा करने के लिये बसों और अन्य वाहनों से कांवडिये पहुंच रहे हैं ।
कांवड़ यात्रा में कांवड़ियों की भीड़ लगातार उमड़ती जा रही है। हाईवे और शहर में आस्था और श्रद्धा की अवरिल धारा बह रही । चहुंओर बम-बम भोले, हर-हर महादेव के जयघोष गुंजायमान हो रहे हैं। जिससे पूरा शहर और हाईवे शिवमय हो गया है। विश्व की सबसे बड़ी पैदल धार्मिक यात्रा कांवड़ यात्रा का पहला चरण गति पकड़ गया है।
रंगीन रोशनी और डीजे से युक्त विशाल कांवड़ चल रही है। जिन्हें देखने के लिए कांवड़ यात्रा मार्ग पर भीड़ उमड़ रही है। शाम को कांवड़ देखने के लिए भारी भीड़ जुट रही है। हरिद्वार से लौटते शिव भक्तों की सेवा में श्रद्धालु जुट रहे हैं। कांवड़ सेवा शिविरों का खुलना जारी है। शिविरों में शिवभक्तों के लिए चाय, नाश्ता, खाना, दवाई के साथ विश्राम की व्यवस्था है। शिविरों में कांवड़ियों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
नाचते-गाते मस्ती में जा रहे कांवड़िए
रुड़की: कांवड़ पटरी और नेशनल हाईवे भोले की भक्ति में डूब गया। हर ओर नजर आ रहे हैं भगवा कपड़े पहने कांवड़िए। कानों में पड़ रही थी हर-हर बम-बम की आवाज। नाचते-गाते मस्ती में जा रहे कांवड़िओं की सेवा को भक्त मनुहार करते रहे। भोले का मन हुआ तो रुके , नहीं तो अपनी मस्ती में आगे बढ़ता चला गया। सुबह से रात तक हाईवे पर कांवड़ियों का मेला लगा रहा।
भगवान शिव की शक्ति है अपरंपार: कैलाशानंद गिरी
हरिद्वार: आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने कहा है कि देवों के देव महादेव भगवान शिव की आराधना से मन की शुद्धि के साथ-साथ व्यक्ति के अंतःकरण की भी शुद्धि होती है और प्रेम भाव का जो अंकुर प्रस्फुटित होता है, वह भक्तों की आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार करवाता है। जिससे वह अपने मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
नीलधारा तट स्थित श्री दक्षिण काली मंदिर में श्रावण पर्यंत जारी भगवान शिव की विशेष आराधना के दौरान भक्तों को शिव महिमा का सार समझाते हुए आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की शक्ति अपरंपार है, जो दीन दुखी दिनानाथ के दरबार में आ जाता है, उसका कल्याण अवश्य ही निश्चित है। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। क्योंकि श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित रहता है। हमें शिव आराधना के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण-संवर्धन का संकल्प लेना चाहिए और अधिक से अधिक पौधरोपण करना चाहिए।
इस दौरान आचार्य पवनदत्त मिश्र, पंडित प्रमोद पांडे, विवेकानंद ब्रह्मचारी, कृष्णानंद ब्रह्मचारी, महंत लालबाबा, बाल मुकुंदानंद ब्रह्मचारी, स्वामी अनुरागी समेत अनेकों भक्त उपस्थित रहे।

