जनवाणी ब्यूरो |
यूपी: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में 10 परिसरों पर छापेमारी की है। ईडी की कार्रवाई कथित तौर पर सरकारी ठेकों की रकम को निजी ठेकेदारों के जरिए डायवर्ट करने और बाद में उस धन के इस्तेमाल से संबंधित जांच का हिस्सा है।
जानकरी के मुताबिक, डायवर्ट की गई रकम का इस्तेमाल ट्रस्ट और विश्वविद्यालय की परिसंपत्तियों के निर्माण समेत अन्य कार्यों में किए जाने का आरोप है। जांच के दौरान कुछ निजी ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच वित्तीय लेन-देन की जानकारी भी सामने आई है।
सरकारी ठेकों की रकम डायवर्ट करने का आरोप
ईडी को आशंका है कि कुछ ठेकेदारों ने सरकारी ठेकों से प्राप्त लाभ का एक हिस्सा कथित तौर पर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय की ओर डायवर्ट किया। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि इन रकमों का इस्तेमाल किस तरह किया गया और क्या इसके जरिए ट्रस्ट या विश्वविद्यालय के लिए संपत्तियों का निर्माण कराया गया।
छापेमारी के दौरान ईडी की टीम अपराध से अर्जित आय से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। एजेंसी का फोकस सरकारी धन के कथित डायवर्जन और उसके बाद किए गए इस्तेमाल से जुड़े सबूत जुटाने पर है।
जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण पर रोक
इससे पहले जौहर विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवनों को ध्वस्त करने के रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के आदेश पर रोक लगाई जा चुकी है। मुरादाबाद के मंडलायुक्त और आरडीए अध्यक्ष आंजनेय कुमार सिंह ने मामले में सुनवाई के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
आरडीए के उपाध्यक्ष और रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी की ओर से बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए 38 भवनों को गिराने का आदेश जारी किया गया था। इसके खिलाफ विश्वविद्यालय प्रबंधन और जौहर ट्रस्ट ने आरडीए अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त की अदालत में अपील दाखिल की थी। अब ईडी की ताजा कार्रवाई से जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़े वित्तीय लेन-देन और कथित सरकारी धन के डायवर्जन की जांच आगे बढ़ गई है।

