जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से NEET परीक्षा में सुधार को लेकर अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी। कोर्ट ने खास तौर पर राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणि के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में हुई प्रगति का ब्यौरा मांगा है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से नया हलफनामा दाखिल करने को कहा। यह हलफनामा तीन सप्ताह के भीतर दाखिल करना होगा।
NEET सुधारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NEET परीक्षा में किए जाने वाले सुधार सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें स्थायी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
पीठ ने राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि समिति ने परीक्षा व्यवस्था की खामियों को सिस्टम से जुड़ी समस्या के तौर पर सही तरीके से पहचाना है। कोर्ट ने कहा कि इन सिफारिशों को स्थायी रूप से लागू करना सबसे महत्वपूर्ण है।
पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि कागजों पर कोई प्रक्रिया अच्छी नजर आ सकती है, लेकिन एक परीक्षा के बाद अगली परीक्षा तक परिस्थितियां पूरी तरह बदल सकती हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत और प्रभावी बनाए रखना जरूरी है।
प्रश्नपत्र की सुरक्षा पर सरकार ने दी जानकारी
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NEET प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर परीक्षा केंद्रों पर छात्रों तक पहुंचने की प्रक्रिया में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की जानकारी कोर्ट को दी।
उन्होंने बताया कि मौजूदा व्यवस्था काफी मजबूत है और इसमें सेंध लगाना आसान नहीं है। सरकार के मुताबिक, प्रश्नपत्र की सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर निगरानी और तकनीकी उपायों का इस्तेमाल किया जाता है।
कैसे तैयार होता है NEET का प्रश्नपत्र?
सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में कई मॉडरेटरों की मदद से प्रश्नों का एक बड़ा बैंक तैयार किया जाता है। मॉडरेटरों को यह जानकारी नहीं होती कि उनके तैयार किए गए प्रश्नों में से कौन से सवाल अंतिम प्रश्नपत्र में शामिल किए जाएंगे।
इसके अलावा प्रश्नपत्र ले जाने वाले वाहनों में GPS लगाया जाता है और उनकी गतिविधियों की लगातार निगरानी की जाती है। प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर छात्रों तक पहुंचने के बीच कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था लागू रहती है।
क्या थी राधाकृष्णन समिति?
NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय ने सात सदस्यीय राधाकृष्णन समिति का गठन किया था। समिति को देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई थी।
समिति ने परीक्षा प्रक्रिया को बेहतर बनाने, डेटा सुरक्षा मजबूत करने और NTA की संरचना व कार्यप्रणाली में सुधार समेत कई मुद्दों पर सिफारिशें दी थीं। अब सुप्रीम कोर्ट यह जानना चाहता है कि इन सिफारिशों को लागू करने के लिए सरकार और NTA ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स का क्या था उद्देश्य?
NEET परीक्षा की व्यवस्था में तकनीकी और ढांचागत सुधारों के लिए सरकार ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स भी गठित की थी। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए जरूरी संरचनात्मक बदलाव सुझाना था। सुप्रीम कोर्ट अब दोनों समितियों की सिफारिशों पर हुई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी चाहता है।
किन याचिकाओं पर हो रही है सुनवाई?
NEET से जुड़े कई मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। इनमें फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) की ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे द्वारा दायर याचिका भी शामिल है।
अब NTA की ओर से नया हलफनामा दाखिल किया जाएगा। इसमें NEET परीक्षा में सुधार, सुरक्षा व्यवस्था और राधाकृष्णन समिति तथा नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स की सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत विवरण देने की उम्मीद है।

