- संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को मिल पाता है वेतन का कुछ एडवांस
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: दीपावली, यानी रोशनी से भरी खुशियों का त्योहार नजदीक आ रहा है। इस त्योहार की खुशियों को और ज्यादा बढ़ाने के लिए केन्द्र और राज्य कर्मचारियों को हर साल सरकारों की ओर से महंगाई भत्ते में वृद्धि करके बोनस के रूप में दिया जाने की परम्परा है।
इस बार भी केन्द्र और राज्य सरकारों की ओर से कर्मचारियों को यह तोहफा देने की तैयारियां की जा रही हैं, लेकिन संविदा और आउटसोर्सिंग पर काम करने वालों के अलावा कई विभाग ऐसे भी हैं, जिनके कर्मचारियों के हिस्से में बोनस की खुशियों का उजाला नहीं आ पाता।
योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य के कर्मचारियों को दिवाली से पहले बोनस और बढ़ी दर से महंगाई भत्ता देने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में चार फीसदी वृद्धि की केंद्र सरकार की घोषणा के साथ ही राज्य कर्मियों को भी महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का लाभ जल्द से जल्द देने की कोशिश है।
इस दौरान रेलवे विभाग की ओर से भी पिछले साल के समान ही अपने कर्मियों को 78 दिन के वेतन के बराबर बोनस दिए जाने का ऐलान किया जा चुका है। एक ओर केन्द्र और राज्य सरकारों की ओर से अपने-अपने कर्मचारियों को अमूमन दीपावली के मौके पर यह तोहफे दिए जा रहे हैं।
वहीं, लाखों की संख्या में ऐसे कर्मचारी भी हैं, जिनके हिस्से में बोनस जैसी खुशियां नहीं आ पाती हैं। इन्हीं में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के संचालन से जुड़े कर्मी भी शामिल हैं। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री संजय राणा बताते हैं कि विभाग में 1997 के बाद से आज तक यानि पिछले 25 साल में कभी बोनस नहीं दिया गया है।
30 जून 1972 से जो कर्मी राजकीय रोडवेज में थे, उनको पेंशन का विकल्प देने के लिए कहा गया था। उस समय स्थिति यह रही कि कार्यालय में प्रशासनिक कार्य देखने वाले स्टाफ ने इसका लाभ ले लिया। लेकिन राजकीय रोडवेज के परिवहन निगम बनाए जाते समय चालकों-परिचालकों और संचालन से जुड़े स्टाफ का कोई ध्यान नहीं रखा गया।
इसी का परिणाम यह हुआ कि परिवहन निगम में अब पेंशन पाने के हकदार सिर्फ प्रशासनिक कार्य देखने वाले कर्मी ही रह गए हैं। इसके अलावा जहां राज्यकर्मियों को अभी तक 34 प्रतिशत महंगाई भत्ता देय होता है, वहीं निगम के कर्मियों को केवल 17 प्रतिशत ही मिल पाता है। जबकि केन्द्रीय कर्मियों को 38 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलता है।
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद से जुड़े संजय राणा के अलावा उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष भारत भूषण और प्रांतीय सचिव राजीव त्यागी भी कर्मचारियों के साथ होने वाली असमानताओं को लेकर अपनी चिंता प्रकट करते हैं। उनका कहना है कि रोडवेज कर्मियों को बोनस तो दूर, उनके एरियर की राशि ही दीपावली जैसे अवसरों पर देकर इतिश्री कर ली जाती है।
जिन लोगों का काफी दिनों का एरियर बकाया है, उसके भुगतान के बारे में विभाग की ओर से कोई पहले नहीं की जा रही है। रोडवेज की वर्कशॉप में ठेकेदारों के माध्यम से आउटसोर्सिंग के जितने भी कर्मचारी हैं, उनका मानदेय करीब छह हजार रुपये हैं, जो उन्हें अकसर समय से नहीं मिल पाता। रोडवेज कर्मचारी संगठनों के हस्तक्षेप के बाद ही उनको कई-कई महीने का बकाया मानदेय मिल सका है।
संविदा पर चालक-परिचालक के रूप में कार्य करने वाले कर्मियों के हिस्से में तो कोई सेलरी तक नहीं आती। इसके बजाय उन्हें प्रति किलोमीटर का भुगतान किया जाता है। ऐस ेकर्मचारियों के हिस्से में तीज त्योहार की दुहाई देने पर बनने वाले वेतन का कुछ हिस्सा एडवांस के रूप में दे दिया जाता है।
नगर निगम में कार्यरत आउटसोर्सिंग स्वच्छता मित्रों के हिस्से में भी उनके वेतन के अलावा कुछ नहीं आ पाता है। प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. हरपाल सिंह का कहना है कि शीघ्र ही स्वच्छता मित्रों के लिए नए टेंडर छोड़े जाएंगे। जिसमें नगर आयुक्त अमित पाल शर्मा ने कर्मियों के हितों से जुड़ी शर्तों को शामिल कराया है। इनमें स्वच्छता मित्रों को सुरक्षा किट्स, पैरों में बूट्स, हाथों में ग्लॉउज, मास्क, समूह में इंश्यारेंस, मेडिक्लेम आदि को प्राथमिकता दी जाएगी।

