जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: नोएडा में श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जांच में पता चला है कि प्रदर्शन की चिंगारी तेलंगाना और कर्नाटक से व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से फैलाई गई थी। कई संगठनों के लोग इन दूरस्थ राज्यों से कई व्हाट्सएप ग्रुप्स और टेलीग्राम चैनल्स को हैंडल कर रहे थे और वहां से दिशा-निर्देश भेजे जा रहे थे।
यूपी एसटीएफ ने हिंसा के दौरान बनाए गए 500 से अधिक वीडियो खंगालना शुरू कर दिया है। इसमें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो भी शामिल हैं। जांच में यह भी पता चला कि कुछ ग्रुप्स का उद्देश्य श्रमिकों के प्रदर्शन को उकसाना था। इन डिजिटल ट्रेल्स के माध्यम से नोएडा में काम करने वाले श्रमिकों को भी ग्रुप में जोड़ा गया था। एसटीएफ तकनीकी पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
हिंसक प्रदर्शन में शामिल गैर-श्रमिक
एसटीएफ की पड़ताल में यह भी सामने आया कि हिंसा के दौरान कई ऐसे लोग वीडियो में दिखाई दे रहे थे जो स्थानीय फैक्ट्रियों या कंपनियों में काम नहीं करते थे। वीडियो में कुछ लोग पुलिस को टारगेट करते हुए भी नजर आए।
औद्योगिक सेक्टरों में पुलिस की सतर्कता
सोमवार को हुए प्रदर्शन के बाद मंगलवार को अंबेडकर जयंती की छुट्टी थी। बुधवार को फैक्ट्रियों में कामगार लौटने से पहले ही पुलिस पूरी तरह सतर्क थी। सभी बॉर्डर क्षेत्रों और औद्योगिक सेक्टरों में पुलिस बल तैनात किया गया। सुबह से फ्लैग मार्च किया गया और जहां भी श्रमिक इकट्ठा होने लगे, वहां हल्के बल का प्रयोग कर उन्हें हटाया गया।
600 से अधिक गिरफ्तारियां
हिंसक प्रदर्शन के मद्देनजर बुधवार रात तक करीब 600 लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारियां कोतवाली फेज़ वन, फेज़ टू, सेक्टर-58, सेक्टर-63 और फेज़ थ्री क्षेत्रों से हुई हैं, जिसमें ग्रेटर नोएडा से भी कुछ लोग शामिल हैं। अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था, राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि पुलिस की टीम जांच में जुटी हुई है और मामले की गहन पड़ताल जारी है।

