Friday, March 6, 2026
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घर से अस्पताल तक जल्लाद बना रहा सौतेला पिता

  • 15 दिन पूर्व लिखी पटकथा मिलिट्री बैग में पेशगी के साथ रख दिए तमंचा कारतूस

जनवाणी संवाददाता |

किठौर: तेजपुरी के पिंकी हत्याकांड को फुल प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया। पटकथा पिंकी के सौतेले पिता और पड़ोसी सेवादार ने वारदात से 15 दिन पूर्व खेत में चारा काटते वक्त लिखी थी। हत्या से पांच दिन पूर्व आरोपी पिता को एक तमंचा व 11 कारतूस मुहैया कराए गए। साथ में कुछ रकम भी बतौर पेशगी दी गई। मेडिकल में भी हत्या का प्रपंच रचा मगर फार्म पर लगे कैमरे और पुलिस की सख्ती ने राजफाश कर दिया। विरोधी को फंसाने के चक्कर में षड्यंत्रकारी खुद सलाखों में पहुंच गए।

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पिंकी का हत्यारोपी सौतेला पिता देवेंद्र शिवसदन के तेजपुरी फार्म पर अपने गांव मंडोली संभल से नौकरी कर गुजारे के लिए आया था। यहां घुड़साल में उसे घोड़ों की देखरेख का काम मिला। पहले घुड़साल का काम नामजद आरोपी कालू करता था। बताया कि दो वर्श पूर्व सेवादारों में दो फाड़ होने पर एक गुट ने कालू को तेजपुरी फार्म के गन्ने की कटाई का जिम्मा सौंप दिया। इसमें राजेंद्र भी साथ रहा।

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कोल्हुओं पर डाले गए लगभग 40 लाख के गन्ने में कालू ने नौ लाख रुपये गबन कर लिए और राजेंद्र को हिस्सा नही दिया। हालांकि गबन पकड़ में आया और कालू को फार्म से निकाल दिया गया, लेकिन राजेंद्र और कालू के बीच खुन्नस पैदा हो गई। बताया कि डेरे के पदाधिकारी, कालू को पुन: पूरे फार्म की गन्ना कटाई का जिम्मा देने के प्रयास में थे। जिसका राजेंद्र को पता चला तो वह कालू को फंसाने की जुगत में लग गया।

ऐसे लिखी पटकथा

बताया कि फार्म में देवेंद्र घोड़ों व राजेंद्र गाय के लिए साथ चारा लेने जाते थे। एक दिन बातचीत में देवेंद्र ने राजेंद्र से कहा कि पुष्पा से शादी कर वह फंस गया है। क्योंकि पुष्पा की बेटी पिंकी बड़ी हो चली और अर्द्धविक्षिप्त भी है। वह उसे साथ कैसे रखे। उसकी शादी भी नहीं हो सकती। इस पर राजेंद्र ने देवेंद्र से पिंकी की हत्या कर कालू को फंसवाने का प्रस्ताव रखा। एवज में राजेंद्र ने उसे 10 लाख रुपये तमंचा कारतूस देने तय किए। 15 सितंबर को डील फाइनल हो गई।

उकसाता रहा राजेंद्र

सौदा होने पर राजेंद्र ने देवेंद्र को हत्या के लिए रोज उकसाना शुरू कर दिया। 25 सितंबर को देवेंद्र ने राजेंद्र से पेशगी के रुपये मांगे तो उसने मिलिट्री बैग में एक तमंचा व 11 कारतूस भी साथ रख दिए। फिर एक अक्तूबर को दोनों ने दिन में प्लानिंग की और रात में देवेंद्र पूरी तैयारी के साथ पिंकी को घटनास्थल पर ले गया।

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राजेंद्र भी जा पहुंचा और पिंकी को गोलियां मार दीं। पिंकी को मृत समझ दोनों लौटे और बदमाशों द्वारा हमले का षोर कर दिया। कालू और दो अज्ञात नकाबपोशों के विरुद्ध रिपोर्ट करा दी, लेकिन पुलिस को कालू की लोकेशन घटनास्थल से 10 किमी दूर मिली।

मार दो वरना राज खुल जाएगा

देवेंद्र ने पुलिस को बताया कि शोर सुन पिंकी बोली तो आरोपियों के होष उड़ गए। बहरहाल पुलिस को बुलाकर पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया कि राजेंद्र ने देवेंद्र को मेडिकल में भी बेटी की हत्या के लिए उकसाया। कहा कि इसकी नलकियां खींच दे। वरना बच गई तो राज खोल देगी और हम जेल जाएंगे।

विवादों में रक्तरंजित रहा शिवसदन कृषि फार्म

शिवसदन कृषि फार्म भूमि विवादों में वर्षों से रक्तरंजित होता आ रहा है। यहां फर्जीवाड़ों और अवैध कब्जों के साथ फसलें बोने, काटने को लेकर खूनी खेल शुरू हो जाता है। जिसमें आधा दर्जन से अधिक हत्याएं हो चुकी हैं। खास यह है कि कुछ दिनों पहले तक फार्म के वजूद की लड़ाई लड़ने वाले सेवादार निजी लाभ के लिए अब आपस में टकरा रहे हैं। जिससे जघन्य अपराधों की तादाद में इजाफा हो रहा है।

किठौर के खादर में साढ़े चार दशक पहले स्थापित हुआ शिवसदन कृशि फार्म भले ही सुहावने सपनों के साथ वजूद में आया हो मगर फिलहाल वह भूमाफिया और षड्यंत्रकारियों का रणक्षेत्र बना है। यहां भूमि और फसल विवादों में आधा दर्जन से अधिक हत्याएं कई जानलेवा हमले होने के साथ बहुत बार गोलीबारी हो चुकी है। किठौर और परीक्षितगढ़ थाने में इस फार्म से जुड़े दर्जनों भूमि विवाद दर्ज हैं।

फार्म के सेवादारों का कहना है कि सर्वप्रथम यहां फार्म के संस्थापक बिरसा सिंह के निजी सेवक हरभजन सिंह की हत्या की गई थी। उसके बाद तीन वर्ष बाद गुरवचन सिंह को मार दिया गया। फार्म के करनाल निवासी जोगेंद्र सिंह की हत्या भी यहां के भूमि विवादों में हुई। बात स्थानीय लोगों की करें तो ढकैनी निवासी राजेश, ललियाना निवासी लालू की हत्याएं भी भूमि विवाद में ही हुईं।

पिंकी हत्याकांड भी फार्म की भूमि व फसल से जुड़ा पाया गया है। पूर्व प्रधान ललियाना शाहनवाज, चीकू बढला समेत कई लोग जानलेवा हमले के आरोपों में जेल जा चुके हैं। 25 अगस्त को फार्म के सेवादार बिक्कर सिंह और उसके चालक जोगेंद्र पर हमला हुआ। जिसमें जोगेंद्र को बाजू में गोली लगी और बोलेरों क्षतिग्रस्त हुई।

इसमें डेरे के ही सेवादारों कुलवंत, हरजीत, निर्मल और इकबाल को नामजद किया गया, लेकिन पुलिस ने उसका खुलासा नहीं किया है। खादर के लोगों का कहना है कि पुलिस ने पिंकी हत्या का खुलासा तो कर दिया, लेकिन महीनों पूर्व बिक्कर पर हुए हमले के मामले को क्यों दबाए बैठी है?

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