Sunday, March 22, 2026
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जब मदरसे ‘हवा हवाई’ तो सरकारी खजाने से वेतन क्यों?

  • सबसे बड़ा सवाल: मिलीभगत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं?
  • भ्रष्टाचार की इंतेहा! कहीं मदरसे नहीं तो कहीं मदरसों में बच्चों का टोटा
  • एक-एक कमरे और टिन शेड में चल रहे अवैध मदरसे

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: फर्जी मदरसों के नाम पर सरकारी खजाने की खुली लूट का जिक्र हमनें अपने रविवार के अंक में किया था। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन फर्जी मदरसा संचालकों पर इतनी नजर ए इनायत क्यों? जब इन फर्जी मदरसों की सरकारी जांच भी हो गई और इनकी हकीकत भी जब सबको पता चल गई तो फिर भी सरकारी खजाने को बट्टा क्यों लगाया जा रहा है?

सरकार की मदरसा आधुनिकीकरण स्कीम के तहत कई लोग वारे के न्यारे हो गए क्योंकि मान्यता प्राप्त मदरसों की जब जांच की गई तो पता यह चला कि कहीं पर या तो मदरसा नहीं है या फिर सिर्फ मदरसे के नाम का बोर्ड टांग कर सरकारी पैसा हड़पा जा रहा है। इसके अलावा अगर कहीं मदरसा मिल भी गया तो उसमें स्टाफ की संख्या हकीकत से कोसो दूर।

मतलब यह कि यदि किसी मदरसे में एक या दो का स्टाफ है तो वहां फर्जीवाड़ा करते हुए कई कई अध्यापकों का फर्जी वेतन हड़पा जा रहा है। कुल मिलाकर मदरसा माफियाओं की संबधित विभाग पर पकड़ इतनी मजबूत हो चुकी है कि कोई चाहकर भी इन पर आसानी से हाथ नहीं डाल सकता।

ये थी मान्यता प्राप्त फर्जी मदरसों की सच्चाई

  • मदरसा तैयबा तालिमुल कुरान, मलियाना। हिन्दी, गणित, अंग्रेजी एवं विज्ञान की पढ़ाई का दावा करने वाला यह मदरसा सिर्फ एक कमरे में चलता पाया गया। इस मदरसे की जांच रिपोर्ट पर एडीओ के हस्ताक्षर हैं।
  • मदरसा इंतजार उल उलूम, ललियाना। निरीक्षण के दौरान इस नाम से कोई मदरसा संचालित होता हुआ ही नहीं मिला। यह अपने आप में आश्चर्य जनक बात है। इस जांच रिपोर्ट पर ख्ण्ड विकास अधिकारी परीक्षितगढ़ के हस्ताक्षर हैं।
  • मदरसा स्टार अल फलाह, किठौर। प्रधानाचार्य सहित कुल सात अध्यापकों वाला यह मदरसा दो कमरों और एक टिन शेड में था। यहां पढ़ाने वाले किसी भी अध्यापक की शैक्षिक योग्यता का प्रमाण पत्र मदरसा संचालक उपलब्ध नहीं करा सके और न ही निरीक्षण के दौरान यहां कोई छात्र मिला। इस जांच रिपोर्ट पर जिला विकास अधिकारी मेरठ एवं परियोजना निदेशक (जिला ग्राम्य विकास अभिकरण) के हस्ताक्षर हैं।
  • मदरसा फैजुल कुरान, मजीद नगर मेरठ। जब टीम यहां जांच के लिए पहुंची तो टीम को उनमें से कोई भी अध्यापक नहीं मिला जिन अध्यापकों के नामों की सूची विभाग को उपलब्ध कराई गई थी। और न ही अध्यापक उपस्थिति पंजिका ही उपलब्ध थी। इस जांच रिपोर्ट पर खण्ड शिक्षा अधिकारी विकास क्षेत्र मेरठ एवं जिला विकास अधिकारी के हस्ताक्षर हैं।
  • मदरसा नूरुल उलूम जाकिर कॉलोनी मेरठ। यहां भी विभाग को उपलब्ध कराई गई सूची में से कोई भी अध्यापक नहीं मिला और न ही उपस्थिति पंजिका मिली। इस जांच रिपोर्ट पर खंड शिक्षा अधिकारी मेरठ एवं जिला विकास अधिकारी के हस्ताक्षर हैं।
  • इसी प्रकार मदरसा खालिदिया श्यामनगर, मदरसा इस्लामिया तारापुरी, मदरसा इस्लामिया मुफीद ए आम पुर्वा फैयाज अली और मदरसा बैतुल उलूम किठौर की भी जांच की गई। अलखिदमत फाउण्डेशन का आरोप है कि यहां से प्राप्त हुई जानकारियां सच्चाई से कोसों दूर थीं।
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