Thursday, March 26, 2026
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निमोनिया से बचने के लिए करें यह उपाय!

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: सर्दी के मौसम में सभी लोगों को सेहत का विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है, इस दौरान बरती गई जरा सी भी लापरवाही कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। तापमान में गिरावट के साथ कई प्रकार के रोगों का खतरा बढ़ जाता है, बच्चों-बुजुर्गों में निमोनिया होने की संभावना सर्दी के मौसम में ज्यादा रहती है। यह एक प्रकार का फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है जो ज़्यादातर वायरस, बैक्टीरियल एवं फंगस के कारण होता है। जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। इस स्थिति में सांस लेना कठिन हो जाता है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्दियों के मौसम में निमोनिया का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। तापमान में गिरावट के अलावा इनडोर पॉल्यूशन को इस समस्या को बढ़ाने वाला माना जाता है। सर्दियों के मौसम में हमारा ज्यादा समय घरों के भीतर और लोगों के निकट संपर्क में अधिक बीतता है, इसके कारण इस स्वास्थ्य समस्या का जोखिम अधिक हो सकता है। निमोनिया की समस्या कुछ स्थितियों में गंभीर जटिलताओं का कारण भी बन सकती है। बच्चों-बुजुर्गों में इसे मृत्यु का जोखिम बढ़ाने वाला भी माना जाता है, ऐसे में सभी लोगों को इस प्रकार के स्वास्थ्य जोखिमों से लगातार बचाव करते रहना चाहिए।

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वैसे तो निमोनिया किसी भी उम्र में हो सकता है, पर बच्चों-बुजुर्गों में इससे संबंधित जटिलताओं का खतरा अधिक होता है। बच्चों में कई बार इसके स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते हैं। कुछ बच्चों में निमोनिया के कारण सांस की तकलीफ, उल्टी या खाने-पीने में परेशानी हो सकती है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों में तेज सांस या घरघराहट जैसी दिक्कतें देखी जाती है। वृद्ध लोगों में सांस की जटिलताओं का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। निमोनिया के इन लक्षणों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

निमोनिया संक्रमण के लक्षण

  • सामान्य तौर पर फ्लू जैसे लक्षण दिखते हैं जो बाद में धीरे धीरे या फिर एक दम से बढ़ने लगते हैं।
  • रोगी में कमजोरी आ जाती है और थकान महसूस होती है।
  • रोगी को बलगम वाली खांसी आती है।
  • रोगी को बुखार के साथ पसीना आता है कंपकंपी महसूस होती है।
  • सांस लेने में कठिनाई होने से रोगी तेज या जोर जोर से सांस लेने लगता है।
  • रोगी को बेचैनी होती है।
  • रोगी को भूख लगनी कम या बंद हो जाती है।
  • बीपी का कम हो जाना
  • खॉंसी में खून आना
  • धड़कन का तेज हो जाना
  • मतली और उल्टी आना

निमोनिया से बचाव के लिए कराएं टीकाकरण

निमोनिया से बचाव के लिए कई टीके उपलब्ध हैं जो इस संक्रमण को रोकने और जटिलताओं से बचाने में आपकी मदद कर सकते हैं। फ्लू वैक्सीन से इस संक्रमण से बचाने में आपके लिए मददगार हो सकती है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, टीकाकरण के साथ-साथ सभी लोगों को निमोनिया से बचाव के उपाय करते रहना चाहिए। इनडोर पॉल्यूशन से बचाव करें और ठंड के मौसम में कुछ समय धूप और खुली हवा में जरूर बिताएं।

निमोनिया से बचाव के लिए क्या करें?

अच्छी स्वच्छता (हाथ धोना), धूम्रपान छोड़ना, नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ भोजन करके अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने और निमोनिया होने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

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बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए टीकारण सबसे कारगर तरीका है, इसके अलावा उनके आहार और पर्सनल हाइजीन का ध्याम रखकर इस बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

इन बातों का भी रखें ध्यान

  • निमोनिया से बचने के लिए टीकाकरण के अलावा इन बातों का ख्याल रखना भी जरूरी है।
  • यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे तुरंत बंद कर दें। धूम्रपान आपको श्वसन संक्रमण, विशेष रूप से निमोनिया के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है।
  • कम से कम 20 सेकंड के लिए नियमित रूप से अपने हाथों को साबुन और पानी से धोएं।
  • खांसते या छींकते समय मुंह नाक को अच्छी तरह से कवर करें। इसके बाद हाथों को धोएं।
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