- रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी ने संविधान की किताब दिखाकर रवाना किया पैदल यात्रा को
- सपा विधायक अतुल प्रधान ने किया पैदल यात्रा में भीड़ जुटने का दावा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: संविधान बचाओ के नारे के साथ समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान की अगुवाई में शहर में पदयात्रा निकाली गई। इस पद यात्रा का उद्घाटन रालोद सुप्रीमो एवं राज्यसभा सदस्य जयंत चौधरी ने संविधान की किताब दिखाकर किया। शनिवार की सुबह से ही सपा कार्यकर्ता गढ़ रोड स्थित डा. भीमराव अंबेडकर डिग्री कॉलेज के मैदान में एकत्र होना शुरू हो गए थे।
हाथ में तिरंगा लिए ये कार्यकर्ता डा. भीमराव अंबेडकर अमर रहे, चौधरी चरण सिंह अमर रहे, अखिलेश यादव जिंदाबाद और जयंत चौधरी जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। दोपहर बाद जयंत चौधरी दलबल के साथ डा. भीमराव अंबेडकर डिग्री कॉलेज पर पहुंचे, जहां उन्होंने बतौर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन देते हुए कहा कि देश को आजादी दिलाने के लिए हमारे पूर्वजों ने अपनी जान की कुर्बानी तक दी है।
संविधान को बचाने के लिए हर कार्यकर्ता सड़क पर उतर कर जागरूकता पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि संविधान बचाओ का नारा देकर कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतरना पड़ रहा है। संविधान बेहद महत्वपूर्ण है, इससे छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। जयंत चौधरी ने संबोधन के बाद पदयात्रा को हरी झंडी दिखाई और पैदल यात्रा को रवाना कर दिया।
सपा की संविधान बचाओ पदयात्रा गढ़ रोड से आरंभ होकर गांधी आश्रम चौराहा, रोडवेज डिपो, हापुड़ स्टैंड चौराहा, सूरजकुंड, इंदिरा गांधी चौक, ईव्ज चौराहा होते हुए यह पदयात्रा कचहरी और फिर कमिश्नरी चौराहे पर पहुंची। पदयात्रा से यातायात व्यवस्था भी चौपट हो गई। उधर, सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान ने कहा कि उनके पूर्वजों ने देश को आजादी दिलाने में अहम् भूमिका निभाई।

इतनी आसानी से संविधान को खत्म नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए मरते दम तक लड़ाई लड़ी जाएगी। संविधान के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा की जाएगी। इसीलिए सपा का एक-एक कार्यकर्ता संविधान बचाओ पैदल यात्रा में शरीक हुआ। उन्होंने दावा किया कि इतनी बड़ी तादाद में पैदल यात्रा पहले कभी नहीं हुई।
यह यात्रा मील का पत्थर साबित होगी
सपा की संविधान बचाओ पदयात्रा में इतनी भीड़ थी कि गढ़ रोड से लेकर हापुड़ और शहर का बड़ा हिस्सा इससे जाम हो गया। लोगों को कई घंटे जाम में खड़े रहना पड़ा। यात्रा काफी लंबी थी, जिसके चलते जाम की स्थिति बनी। महत्वपूर्ण बात यह है कि जब सपा की पैदल यात्रा थी तो शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए ट्रैफिक विभाग के आला अफसरों ने वाहनों का डायवर्सन क्यों नहीं किया?
यदि ट्रैफिक रूट वाहनों का बदल दिया जाता तो फिर यह जाम की समस्या से जनता नहीं जूझती। जाम लगने से ट्रैफिक और थानों की पुलिस बेबस नजर आई। कोई सिस्टम ऐसा नहीं दिखा, जहां पुलिस जाम खुलवा सके। क्योंकि पैदल यात्रा काफी लंबी थी, जिसके चलते जाम की समस्या पैदा हुई।

