- अच्छा लिखेंगे, अच्छा पढ़ेंगे के संकल्प के साथ हुआ समाप्त
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: क्रांतिधरा साहित्य अकादमी द्वारा मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल का समापन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के वृहस्पति भवन में आयोजित किया गया। समापन सत्र में कार्यक्रम के मुख्य आयोजक डा. विजय पंडित और पूनम पंडित के एक संकल्प नई शुरुआत करेंगे। अच्छा लिखेंगे, अच्छा पढ़ेंगे के साथ समाप्त हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वरिष्ठ साहित्यकारों के सानिध्य में नवोदित कलाकारों को एक अच्छा मंच उनका मुख्य उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि समाज में कलमकारों की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है जब वह एक शिक्षक, पत्रकार और कवि होता है लोग उनसे समाज को नई राह दिखाने की उम्मीद रखते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य एक दीपक का कार्य करता है जो समाज को एक नई राह दिखाता है और मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल समाज को एक नई राह दिखाएगा। वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ चिंता मणि जोशी ने साहित्यिक की परिभाषा देते हुए कहा कि जो समाज के हित की सोचें वही है साहित्य।
जो जीव भाव में स्थित की कामना करें। इसके लिए प्रेरित होता है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ब्रिटेन के नाटिंघम से आई वरिष्ठ हिंदी जया वर्मा का साक्षात्कार रहा, जिसका संचालन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. विद्या सागर सिंह ने किया। जया वर्मा ने कहा कि साक्षात्कार एक दूसरे के विचार जानने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि साहित्य लोगों को आपस में जोड़ना सिखाता है।
एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रवासी साहित्य की सबसे पहले चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने शुरुआत कराई। उन्होंने कहा कि प्रवासी साहित्य खूब लिखा जा रहा है उन्होंने कहा कि प्रवासी साहित्य में सबसे बड़ी बाधा उसके प्रकाशित कराने की रही है। गाजियाबाद से पधारे एडवोकेट प्रवीण कुमार क पुस्तक-नियंता नहीं हो तुम का विमोचन कादंबनी के पूर्व संपादक डॉ. धनंजय सिंह ने किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार कौशल कुमार ने की और संचालन डॉ. राम गोपाल भारतीय ने किया। कार्यक्रम में हिन्दुस्तान स्काउट गाइड एसोशिएशन के नेतृत्व में शॉर्पन पब्लिक स्कूल इंचौली के बच्चों ने बीच बीच में सुंदर तालियां बजाने एक सुंदर प्रस्तुति दी। जिसमें प्रिंसिपल कंचन का प्रोत्साहन रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गाजियाबाद के ग्रीन मैन पर्यावरणविद् विजय पाल बघेल ने अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने पर बल देते हुए कहा कि आक्सीजन बनाने का काम केवल पेड़ ही करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में प्रति व्यक्ति पेड़ का औसत कम है जबकि पर्यावरण को जिंदा रखने के लिए एक आदमी पर 500 पेड़ होने चाहिए। इस अवसर पर मुरादाबाद के वीरेंद्र सिंह ब्रजवासी, दिल्ली के रघुवीर शर्मा, सहायक निदेशक राजभाषा विभाग, रमेश कुमार भदौरिया सत्यमन, जय भारत मंच हापुड़ के नरेंद्र शर्मा, पूर्व कमिश्नर आरके भटनागर, राम चरित मानस पर पीएचडी धारक डॉ. पीसी शर्मा, प्रदीप देवी शरण भट्ट अधीक्षक खादी ग्रामोद्योग आयोग हैदराबाद, ब्रज राज किशोर राहगीर उपस्थित रहे।
अंत में डा. महेश दिवाकर ने कहा मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने के लिए आवश्यक हैं। कार्यक्रम का समापन कविता मधुर के नेतृत्व में राष्ट्रगान जन गण मन के सामूहिक गान से हुआ।

