जनवाणी संवाददाता |
बिजनौर: संसद में शून्य काल के दौरान बिजनौर से सांसद मलूक नागर ने कहा की उत्तर प्रदेश के शिक्षा मित्रों के बारे में कहना है। वर्ष 2015 में इनकी तनख्वाह 38500 रुपये थी और वर्ष 2017 में कानूनी हस्तक्षेप और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद इनको हटा दिया गया था। इसके बाद फिर शिक्षामित्र के नाते इनको लगाया गया। इनकी तनख्वाह मात्र 10 हजार रुपये रखी गई। तब से अब तक यदि सरकार की बढ़ी हुई महंगाई माने तो भी वह कम से कम मानदेय डबल बैठता है। दूसरे साथी जिस तरह से पढ़ाते हैं, ये भी उसी तरह से ये शिक्षामित्र पढ़ाते है और उतना ही टाइम लगाते हैं।

