- संवाद कार्यक्रम की शुरुआत मां वीणावादिनी को रहा समर्पित
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: इस बार दैनिक जनवाणी के ‘संवाद’ कार्यक्रम की शुरुआत मां वीणावादिनी को समर्पित रहा। यह खूबसूरत और संगीतमयी शाम हमारे दर्शकों के नाम रही। बीते शुक्रवार की शाम में जनवाणी स्टूडियो पहुंचकर शब्दों को सुरों में पिरोने वाले एक हुनरबाज ने ऐसा शमा बांधा कि बस उनके बारे में कहा जा सकता है कि…मिला न कोई मीत जीवन का, फिर भी खुश हैं पाकर साथ जीवन का। कुछ अधूरा कुछ अनकहा सा, फिर भी मधुर है संगीत जीवन का।
जी हां! वेस्ट यूपी में क्रांतिधरा की तहसील मवाना अंतर्गत मवाना कला की माटी में स्व. पंडित हरिचरन रावल के घर जब किलकारियां गूंजी थीं, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि यही महेंद्र रावल संगीत की दुनिया में एक जाना पहचाना चेहरा बनकर उभरेंगे। पंडित महेंद्र रावल ने दैनिक जनवाणी के साथ एक खास मुलाकात के दौरान बताया कि उनके पिताश्री तबला वादक थे और वह जब चार साल के रहे तभी से संगीत में रूचि पैदा हुई।

महेंद्र रावल कहते हैं कि उस्तान निसार हुसैन खां साहब से भी उन्होंने तबला वादन सीखा। उन्होंने बताया कि संगीत अभ्यास, लगन और मेहनत से संगीत के सुरों को सजाना बहुत बारीकी के साथ समझा है। महेंद्र रावल ने आगे बताया कि वह राग बागेश्वरी से लेकर राग भोपाली, राग भैरवी सहित सभी की धुनों में गायन और वादन करते रहते हैं। वर्तमान में युवाओं पर हावी हो पाश्चात्य संगीत पर महेंद्र रावल कहते हैं कि संगीत कोई भी हो उसकी जननी शास्त्रीय संगीत ही है।
शास्त्रीय संगीत एक बार खासकर संगीत प्रेमियों को जरूर सुनना समझना चाहिए। साथ ही इस फील्ड में बतौर कॅरियर आने वाले युवाओं के लिए कहा कि उन्हें बस और बस सही दिशा में गुरु के मार्गदर्शन में रियाज पर बल देना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में बेहतर कार्य करने को लेकर कई अवार्ड और सम्मान पत्र भी मिल चुके हैं।

