Friday, June 19, 2026
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बेरोजगारी, महंगाई पर केंद्रित हो बजट

  • आने वाले बजट से सभी वर्गों के लोगों को बेसब्री से है इंतजार, इस बार हो सकती है बड़ी घोषणाएं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सभी लोगों को बजट का बेसब्री से इंतजार है। उम्मीद की जा रही है कि मौजूदा सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होने के चलते इस बार कई बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं। वहीं महंगाई से लेकर बेरोजगारी तक इकोनॉमी के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे इन मुद्दों से निपटने के लिए भी कई ठोस कदम उठाए जा सकते हैं, ताकि इससे अर्थव्यवस्था में नई जान फूंककर उसे रफ्तार दी जा सके।

बता दें कि देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी यानि आज नरेंद्र मोदी सरकार का नया बजट पेश करेंगी। 2024 में लोकसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में जनता केंद्र सरकार से राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं। कयास इस बात के भी लगाए जा रहे हैं कि चुनाव को देखते हुए इस बार केंद्रीय बजट में सरकार हर वर्ग को राहत देने के कुछ नए प्लान शामिल कर सकती है।

केंद्रीय बजट को लेकर अर्थशास्त्र के जानकार किस तरह की उम्मीद कर रहे हैं साथ ही बजट में क्या कुछ होना चाहिए इसको लेकर जनवाणी ने जब कुछ अर्थशास्त्रियों से बात की तो उन्होंने कुछ इस प्रकार बजट पर अपनी राय पेश की।

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश ने कहा कि अर्थशास्त्री होने के नाते मैं मानता हूं कि कृषि के मुद्दों पर राजनीति ज्यादा है। ऐसा नहीं है कि तीनों कृषि कानून बुरे थे। अगर हम सिर्फ एमएसपी की बात करें तो केवल उससे किसानों का भला नहीं हो सकता। क्योंकि उसके साथ साथ मार्केट को भी जनरेट करना पड़ेगा।

अगर हम गन्ना 39 रुपये किलो के भाव से खरीदते हैं और शुगर 40 रुपये किलो बेचते हैं, इतनी सब्सिडी देकर आप उसके लिए पैसा कहां से लाएंगे। सरकार ने वर्ल्ड ट्रेड आॅगेर्नाइजेशन के दस्तावेजों पर साइन किया है कि आप सब्सिडी को बंद करेंगे। हमें उन अनुबंधों को भी स्वीकार करना पड़ेगा।

कृषि के क्षेत्र में सरकार इतना कर सकती है कि जो पैटर्न अभी चल रहा है उसको मेंटेन रखा जाए। उसको कम ना किया जाए। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए इंसेंटिव दिए जाएं और उन फसलों का एमएसपी पहले से ही सरकार घोषित कर दे ताकि हम नई फसलों की ओर भी बढ़ सके।

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ईस्माइल पीजी कॉलेज अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. ममता का कहना है कि इस समय बेरोजगारी एक बहुत बड़ा चैलेंज है। बेरोजगारी के पीछे भी लॉजिक है। कुछ शैक्षणिक संस्थानों के बच्चे बड़े बड़े पैकेज पर विदेशों में जाते हैं। हम उसको लेकर तालियां बजाते हैं।

ऐसी शिक्षा का क्या फायदा कि बच्चे अपने देश में काम नहीं कर सकते। इसके लिए हमारी नीतियां भी जिम्मेदार हैं कि हम उनको रिटेन नहीं कर पाते। ऐसे जो लोग हैं उनके लिए फंडिंग बढ़ाई जानी चाहिए ताकि वे स्वरोजगार की ओर अग्रसर हो। सरकार ने स्टार्टअप के लिए अगर हम सरकार के पिछले सालों के बजट को देखें तो सरकार का टारगेट गरीबी के उन्मुलन को लेकर था।

इसमें कोई शक नहीं है कि सरकार ने करोना काल में गरीब लोगों के लिए अच्छा काम किया। गरीब जनता को भोजन मुफ्त में मुहैया करवाया। निश्चित तौर पर इससे गरीब तबके के लोगों को लाभ मिला, लेकिन इसका जो बोझ सबसे ज्यादा पड़ा, वो मध्यमवर्ग पर पड़ा है। पिछले 3 बजट में टैक्स के मामले को लेकर सरकार ने कुछ नहीं किया।

अगर इसको पूर्णकालिक बजट के तौर पर देखा जाए तो यह सरकार का अंतिम बजट है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि टैक्स के स्लैब में बदलाव हो सकता है। टैक्स रेट को लेकर जो स्लैब तय किए गए हैं उसमें रिलीफ मिलने की उम्मीद की जानी चाहिए। फंडिंग की है, लेकिन हमें एमएसएमई सेक्टर में भी युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए काम करना पड़ेगा।

अर्थशास्त्री डॉ. कविता गर्ग का कहना है कि अगर हम सरकार के पिछले सालों के बजट को देखें तो सरकार का टारगेट गरीबी के उन्मुलन को लेकर था। इसमें कोई शक नहीं है कि सरकार ने करोना काल में गरीब लोगों के लिए अच्छा काम किया। गरीब जनता को भोजन मुफ्त में मुहैया करवाया। निश्चित तौर पर इससे गरीब तबके के लोगों को लाभ मिला, लेकिन इसका जो बोझ सबसे ज्यादा पड़ा, वो मध्यमवर्ग पर पड़ा है।

पिछले 3 बजट में टैक्स के मामले को लेकर सरकार ने कुछ नहीं किया। अगर इसको पूर्णकालिक बजट के तौर पर देखा जाए तो यह सरकार का अंतिम बजट है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि टैक्स के स्लैब में बदलाव हो सकता है। टैक्स रेट को लेकर जो स्लैब तय किए गए हैं उसमें रिलीफ मिलने की उम्मीद की जानी चाहिए।

बजट में कृषि पर विशेष फोकस की आस

भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष नवाब सिंह अहलावत ने आगामी बजट में कृषि पर विशेष फोकस किए जाने की उम्मीद केन्द्र सरकार से लगाई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में भारत सरकार के साथ पत्राचार एवं देश के कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से मुलाकात के माध्यम से किसानों की आवश्यक एवं तत्कालिक मांगों के संबंध में अवगत कराया जा चुका है।

केंद्रीय बजट में कृषि पर विशेष फोकस किया जाना अनिवार्य है। सरकार को कुछ नये प्रावधान भी करने चाहिए, जिनसे किसानों की आमदनी बढ़ सके। इनमें सप्लाई चेन में एफपीओ और एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी कंपनियों को इंटीग्रेट करने के लिए कार्यशील पूंजी की क्रेडिट गारंटी दी जा सकती है। इससे किसानों को समय पर भुगतान मिल सकेगा और बाजार के साथ एफपीओ का प्रभावी जुड़ाव भी हो सकेगा।

देश में यूनिवर्सल फसल बीमा योजना भी लागू की जानी चाहिए, जिसमें 2 हेक्टेयर से कम जमीन वाले सीमांत किसानों को प्रीमियम में 100 प्रतिशत सब्सिडी मिले। कृषि क्षेत्र में ड्रोन के लिए अभी जो ग्रांट और सब्सिडी की स्कीमें हैं, उनका विस्तार एग्रीटेक, एग्रीफिनटेक और निजी रिसर्च संस्थानों तक किया जाना चाहिए। विशेषकर उनके लिए जो कृषि के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं।

देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य का दायरा बढ़ाते हुए फल सब्जियों सहित प्रत्येक फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करते हुए देश के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाना सुनिश्चित करने के लिए भावांतर कोष का गठन करते हुए फसल खरीद के लिए दोगुनी राशि का प्रावधान किया जाए। आगामी बजट में किसान सम्मान निधि को बढ़ाया जाए। कृषि में उपयोग होने वाले यंत्रों, खरपतवार नाशक, कीटनाशक, खाद, बीज,मुर्गी दाना,पशु आहार सहित सभी वस्तुओं को जीएसटी के दायरे से मुक्त किया जाए।

कृषि क्षेत्र के लिए एक विशेष पैकेज का ऐलान किया जाए। किसान क्रेडिट कार्ड की अवधि समाप्त होने पर ही पूरा पैसा जमा कराया जाए। प्रत्येक वर्ष किसानों से केवल ब्याज लिए जाने का प्रावधान किया जाए। देश में देश में कृषि निर्यात को प्रोत्साहन देने हेतु देश के प्रत्येक जनपद में एक जनपद एक उत्पाद के तर्ज पर कृषि निर्यात प्रोत्साहन केंद्र खोले जाएं। जलवायु परिवर्तन से प्रभावित कृषि क्षेत्र के लिए जलवायु आपदा फंड का प्रावधान किया जाए। ईंधन की खेती, सोलर पावर पंप, प्राकृतिक खेती आदि पर बजट में राशि बढ़ाए जाने का प्रावधान किया जाए।

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