
खनन के लिए यदि पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में जमीनें ली जाएंगी, तो सबसे पहले ग्रामसभा की मंजूरी जरूरी है, अन्यथा यह गैर-कानूनी हो जाएगा। संविधान की पांचवीं अनुसूची और छठवीं अनुसूची ने आदिवासियों को उन इलाकों की सारी भूमि का मालिक बनाया है। संथाल परगना टेनेंसी एक्ट के अनुसार, इस इलाके की जमीन को न तो बेचा जा सकता है और न ही इसका हस्तांतरण किया जा सकता है, चाहे वह आदिवासियों की जमीन हो या गैर-आदिवासियों की, लेकिन विकास का मॉडल दूसरे की जमीन छीनकर ही बनता है।झारखंड में ढेर सारी कोयला खदानें हैं, लेकिन वे आदिवासियों के लिए अभिशाप हैं। गोड्डा जिला में कोयला निकालने के लिए राजमहल परियोजना के अंतर्गत ईसीएल (ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) लगातार कई गांवों को विस्थापित कर रही है।