नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉट कॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनन्दन है। जगन्नाथपुर मंदिर उड़ीसा की राजधानी रांची में स्थित है। जगन्नाथपुर मंदिर के बारें में कई ऐसे चमत्कारी रहस्य है, जो इस मंदिर को प्रसिद्ध बनाता है।

इन्ही चमत्कारों को देखने दुनिया भर से लोग यहां आते हैं। हर कोई यहा के ये रहस्य्मयी रूप देख अचंबित रह जाते है। बता दें कि जगन्नाथपुर मंदिर विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है। तो आइये जानते है जगन्नाथपुर मंदिर के पांच रहस्यों के बारें में…
हवा के विपरीत लहराता ध्वज

श्रीजगन्नाथ मंदिर के ऊपर स्थापित लाल ध्वज सदैव हवा के विपरीत दिशा में लहराता है। प्रतिदिन सायंकाल मंदिर के ऊपर स्थापित ध्वज को मानव द्वारा उल्टा चढ़कर बदला जाता है। ध्वज भी इतना भव्य है कि जब यह लहराता है तो इसे सब देखते ही रह जाते हैं। ध्वज पर शिव का चंद्र बना हुआ है।
गुंबद की छाया नहीं बनती
यह दुनिया का सबसे भव्य और ऊंचा मंदिर है। यह मंदिर 4 लाख वर्गफुट में क्षेत्र में फैला है और इसकी ऊंचाई लगभग 214 फुट है। मंदिर के पास खड़े रहकर इसका गुंबद देख पाना असंभव है। मुख्य गुंबद की छाया दिन के किसी भी समय अदृश्य ही रहती है। मंदिर का यह भव्य रूप 7वीं सदी में निर्मित किया गया।
चमत्कारिक सुदर्शन चक्र

पुरी में किसी भी स्थान से आप मंदिर के शीर्ष पर लगे सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो वह आपको सदैव अपने सामने ही लगा दिखेगा। इसे नीलचक्र भी कहते हैं। यह अष्टधातु से निर्मित है और अति पावन और पवित्र माना जाता है।
दुनिया का सबसे बड़ा रसोईघर
500 रसोइए 300 सहयोगियों के साथ बनाते हैं भगवान जगन्नाथजी का प्रसाद। लगभग 20 लाख भक्त कर सकते हैं यहां भोजन। कहा जाता है कि मंदिर में प्रसाद कुछ हजार लोगों के लिए ही क्यों न बनाया गया हो लेकिन इससे लाखों लोगों का पेट भर सकता है। मंदिर के अंदर पकाने के लिए भोजन की मात्रा पूरे वर्ष के लिए रहती है। प्रसाद की एक भी मात्रा कभी भी व्यर्थ नहीं जाती।



