- हाईकोर्ट ने कहा अनुज सिंह की बर्खास्तगी गलत, मिलेगा पीछे तक का वेतन और भत्ते
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हाईकोर्ट के आदेश पर कैंट बोर्ड के बर्खास्त सीईई अनुज सिंह को बहाली मिल गई। गुरुवार को हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि अनुज सिंह की बर्खास्तगी गलत है तथा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के जो आरोप लगे हैं, उनमें एक का भी सबूत अदालत में पेश नहीं किया जा सका। जब से अनुज सिंह की बर्खास्तगी हुई है, तब से अब तक पूरा वेतन और तमाम भत्ते देने का भी हाईकोर्ट ने आदेश दिया हैं।
अनुज सिंह पर कैंट बोर्ड में रहते हुए आरोप लगा था कि चैप्पल स्ट्रीट में सिनेमा घर और कई अवैध निर्माणों को बढ़ावा दिया गया, लेकिन अनुज सिंह के अधिवक्ता रजत गंगवार ने कैंट बोर्ड के अनुज सिंह को बर्खास्त करने के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि चैप्पल स्ट्रीट में अवैध निर्माण पर अनुज सिंह की तरफ से कार्रवाई की गई थी। संबंधित व्यक्ति को नोटिस भी दिया गया था।
तब उसे अनाधिकृत निर्माण कहा गया, लेकिन बाद में उसे अधिकृत कैसे बना दिया? इस मामले में एई पीयूष गौतम के खिलाफ भी कार्रवाई हुई थी, लेकिन कैंट बोर्ड की बैठक में 14 अगस्त 2019 को अनुज सिंह को बर्खास्त कर दिया गया। बाकी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, इस आदेश को ही हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

हाईकोर्ट के न्यायाधीश पंकज भाटिया ने पूरे प्रकरण पर सुनवाई करते हुए आदेश दिये है कि अनुज सिंह की बर्खास्तगी एक तरफा की गई कार्रवाई हैं। जांच कमेटी के आरोप गलत हैं। एक तरह से जांच कमेटी ने मनमानी तरीके से अनुज सिंह के खिलाफ कार्रवाई की हैं। बोर्ड ने भ्रष्टाचार के जो आरोप अनुज सिंह पर लगाये है, वो निराधार हैं। भ्रष्टाचार का एक भी सबूत कोर्ट मे ंपेश नहीं किया गया।
दरअसल, अनुज सिंह 17 अगस्त 2002 को सहयाक अभियंता के पद पर कैंट बोर्ड में भर्ती हुए थे। इसके बाद 27 अगस्त 2007 को प्रोमोशन हुआ, जिसके बाद सीईई बना दिया गया था। 22-बी बंगला में अनाधिकृत निर्माण कराने के आरोप अनुज सिंह पर लगे थे, लेकिन इसमें 2013 में एफआईआर भी दर्ज करायी गई। इसका उल्लेख भी हाईकोर्ट ने अपने आदेश में किया हैं, तब से अब तक 22-बी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इसमें सरकारी दस्तावेजों में वर्तमान में भी सील लगी हुई हैं।

