Wednesday, May 6, 2026
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कैंट बोर्ड में आठ घंटे रही सीबीआई

  • डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन टेंडर में अनियमितता बरतने व 22-बी को गलत तरीके से ट्रेड लाइसेंस जारी करने की फाइलों को सीबीआई ने लिया कब्जे में

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 10 मई को क्रांतिधरा पर पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री के आगमन से ठीक पहले कैंट बोर्ड कार्यालय में सीबीआई की मौजूदगी से हड़कंप मच गया। सीबीआई टीम ने 10 से ज्यादा फाइलों को कब्जे में लिया। सुबह 10 बजे सीबीआई टीम पहुंची थी

तथा शाम छह बजे तक कैंट बोर्ड आॅफिस में मौजूद रही। एक-एक कर कैंट बोर्ड कर्मचारियों से पूछताछ की। पूछताछ कई मुद्दों पर हुई, जिसमें पहला मुद्दा रहा डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन टेंडर में अनियमितता बरतने का। दूसरा रहा 22-बी को गलत तरीके से ड्रेट लाइसेंस जारी कैसे किया गया?

सुबह जैसे ही कैंट बोर्ड आॅफिस खुला, तभी एक प्राइवेट टेक्सी से सीबीआई की टीम यहां पहुंच गई। ये टीम गाजियाबाद शाखा से एसआई जगवीर गौतम व तीन अन्य आॅफिसरों के साथ कैंट बोर्ड पहुंची थी। उनके पहुंचते ही छावनी परिषद में हड़कंप मच गया। सीईओ ज्योति कुमार की गैर मौजूदगी में उनके आॅफिस में टीम ने कार्यालय अधीक्षक से बातचीत की,

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जिसके बाद एक-एक कर संबंधित कर्मचारियों से कुछ फाइलों की मांग की। करीब 10 फाइलों को सीबीआई की टीम ने अपने कब्जे में लिया। इन फाइलों में क्या राज छुपा हैं? यह किसी को नहीं पता। सीबीआई टीम ने ये फाइल ही कब्जे में क्यों ली? यह बड़ा सवाल हैं। जनवाणी फोटोजर्नलिस्ट ने सीबीआई टीम जिन फाइलों लेकर जा रही थी, उनकी तस्वीर भी कैमरे में कैद कर ली।

डोर-टू-डोर और 22-बी की फाइलें ले गई सीबीआई

21 अप्रैल को ही सीबीआई की गाजियाबाद शाखा से एक पत्र छावनी परिषद कार्यालय को प्राप्त हुआ था, जिसमें छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी को मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर कागजात व फाइल्स तैयार रखने को लिखित निर्देश दिए गए थे। किसी शिकायत पर सीबीआई द्वारा विषय का संज्ञान लिया गया था। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन ठेका व 22-बी ट्रेड लाइसेंस से संबंधित। ये दोनों ही बिन्दू जांच के केंद्र में बताये गए हैं।

डोर-टू-डोर कलेक्शन ठेका में व्यापक अनियमितता बरती गई थी। इसको लेकर ही बोर्ड की बैठक में भी मुद्दा उठा था, जिसमें भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इसके बाद ही डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करने का टेंडर निरस्त कर दिया गया था। इसमें बिना बोर्ड की अनुमति के टेंडर की दरों में वृद्धि कर दी गई, जिसको लेकर अब सीबीआई ने छानबीन की। इसमें तत्कालीन सीईओ नावेन्द्रनाथ पूरी तरह से फंसे हुए हैं।

डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का वर्ष 2019 से2022 तक विवादित ठेका चला, जिसका विरोध पूर्व उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी ने भी किया था। इस मुद्दे को लेकर विपिन सौढ़ी हाईकोर्ट में भी पहुंच गए थे। नियम विरुद्ध 22-बी में ट्रेड लाइसेंस जारी कर दिया गया था, उसमें एक कर्मचारी वर्तमान में भी निलंबित चल रहे हैं। इसमें कैंट बोर्ड की तरफ से बिल्डिंग को ध्वस्त करने के आदेश पारित कर रखे हैं।

कागजों में सील भी लगी हैं, लेकिन मौके पर 22-बी में हर रोज पार्टी चल रही हैं। आवासीय बिल्डिंग में व्यवसायिक गतिविधियां चलती हैं। इसमें एफआईआर भी 22-बी संचालक के खिलाफ दर्ज नहीं कराई गयी। ये मुद्दा भी सीबीआई में पहुंचा था, इससे संबंधित फाइल भी सीबीआई अपने साथ ले गई।

कई कर्मचारी जांच के घेरे में

कैंट बोर्ड आॅफिस के इंजीनियरिंग, सेनेट्री, टैक्स विभाग सीबीआई के निशाने पर रहे। एक तरह से ये तीनों ही विभाग जांच के घेरे में हैं, जिनसे पूछताछ भी की गई, जिसमें जल्द ही कई नाम सीबीआई के सामने उजागर हो सकते हैं, जिन पर सीबीआई शिकंजा कस सकती हैं। गुरुवार को भी सीबीआई टीम ने कई कर्मचारियों से सीईओ आॅफिस में पूछताछ की, जिसके बाद कर्मचारियों में हड़कंप मचा रहा।

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कर्मचारियों के फोन भी स्वीच आॅफ करा दिये गए थे, ताकि कर्मचारी किसी तरह की सूचना आॅफिस से बाहर लीक नहीं कर दे। तमाम कर्मचारियों को लंच में भी घर नहीं जाने दिया। सभी कर्मचारी शाम छह बजे तक आॅफिस में रहे। सीबीआई टीम के जाने के बाद कर्मचारी अपने-अपने घर पहुंचे।

खासयोल छावनी नगर निगम में शामिल

रक्षा मंत्रालय ने एक आदेश जारी करते हुए खासयोल छावनी को अब खत्म कर दिया गया है। इस छावनी को नगर निगम में शामिल कर दिया गया है। रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव राकेश मित्तल ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि 31 जनवरी 1942 में खासयोल को छावनी बनाया गया था। अब छावनी अधिनियम में परिवर्तन करते हुए इसे छावनी की सीमा से हटा दिया है।

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