
राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। विपक्ष की पटना और बेंगलुरु में हुई बैठक ने भाजपा में हलचल बढ़ा दी है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा के लिए चुनाव जीतना अब तक तो बहुत मुश्किल नजर नहीं आ रहा, लेकिन उसके लिए चैलेंज है कि कैसे वो अपनी सीटों को कम होने से रोके। जानकारों का कहना है कि अगर भाजपा की 40-50 सीटें कम हो जाती हैं तो इससे देश की तमाम संस्थाओं में ये संदेश चला जाएगा कि भाजपा को लेकर अब वो माहौल नहीं रहा जो 2014 से 2019 के चुनावों में था। भाजपा ऐसा होने के रिस्क को कम करने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है। उधर विपक्ष के लिए ये लोकसभा चुनाव करो या मरो वाले स्थिति है क्योंकि अगर तीसरी बार भाजपा सत्ता में आई तो ये पार्टियां खत्म होने की कगार पर आ जाएंगी।