
कल सूरज तो पूरब से ही निकला था, लेकिन 75 दिन बाद। चुप्पी के अमृतकाल के पूरे हो जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर शब्द का इस्तेमाल किया। 3 मई से वहां जारी हिंसा, मौतें, दुष्कर्म, आगजनी, लोगों की बेदखली, उनके विस्थापन का सिलसिला चल रहा था, लेकिन नरेंद्र मोदी ने एक बार भी इस पर एक शब्द भी नहीं कहा था। अब जब मणिपुर में आदिवासी महिलाओं को गैरआदिवासी भीड़ द्वारा सडकों पर बिना कपड़ों के घुमाने, उनके साथ गैंगरेप करने जैसे वीडियो सामने आए हैं, तब दुनिया भर से हिंदुस्तान के लिए धिक्कार आ रही है, देश के लोग भी हिल गए हैं, आदिवासी तबके अधिक विचलित हैं, लेकिन थोड़े-बहुत विचलित तो सभी लोग हैं, तब जाकर संसद सत्र के ठीक पहले प्रधानमंत्री ने कहा-मणिपुर की घटना से मेरा हृदय पीड़ा और क्रोध से भरा है, किसी भी सभ्य समाज के लिए ये शर्मसार करने वाली है।