Friday, March 6, 2026
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नो पार्किंग बताकर ट्रैफिक पुलिस उठाती है सड़कों से कारें

  • शहर की सड़कों पर कार खड़ी की तो खैर नहीं
  • ट्रैफिक पुलिस की गाड़ियों पर रहती है गिद्ध की नजर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: अगर आपके पास फोर व्हीलर अर्थात कार है और आप बाजार में शॉपिंग करने निकल रहे हैं या किसी जरूरी काम से शहर में जा रहे हैं तो आप सोच संभलकर निकले। कहीं ऐसा न हो कि ट्रैफिक पुलिस की गिद्ध भरी नजर आपकी कार पर पड़ जाये। आप कार सड़क पर खड़ी करके अपने काम में लग जायें,

और वापस आकर देखे तो कार गायब मिले। जी हां शहर में हर तरफ ट्रैफिक पुलिस कारों पर गिद्ध की नजर गढ़ाये हैं। न किसी को सूचना न लाउडस्पीकर से चेतावनी। ट्रैफिक पुलिस के्रनयुक्त गाड़ी लेकर आती है और सड़Þकों पर खड़ी कारों को चंद मिनटों में गायब कर पुलिस लाइन भिजवाने में देर नहीं करती। काफी देर तक वाहन स्वामी यह सोचता रहता है कि उसकी गाड़ी कहीं चोरी तो नहीं हो गई है।

ट्रैफिक पुलिस नो पार्किंग में वाहनों का खड़ा करना बताकर आपकी गाड़ी का को उठा लेते हैं। अगर सेटिंग हो जाये तो आप बिना चालान के भी अपनी गाड़ी को वापस ले जा सकते हैं। ट्रैफिक पुलिस रोज सड़कों पर नो पार्किं ग या सड़क पर अतिक्रमण बताकर 25 से 50 कारों को खींचकर ले जाती है। ट्रैफिक पुलिस प्रतिदिन औसतन 15 से 20 कारों का ही चालान की कार्रवाई करती है। शेष कारों को बिना चालान के ही छोड़ दिया जाता है। ट्ैफिक पुलिस ने जिले भर में वर्ष 2023 के जनवरी से लेकर अगस्त माह तक नो पार्किंग वाहनों के कुल 4293 चालान किये।

जिनमें महीने के औसतन 500 चालान की कार्रवाई की गई। ट्रैफिक पुलिस के नो पार्किं ग के चालान के आठ महीने के आंकड़ों पर गौर किया जाये तो ट्रैफिक पुलिस प्रतिदिन औसतन 15 से 18 गाड़ियों का चालान करती है, लेकिन पूरे जिले में 50 से अधिक नो पार्किंग वाहनों के चालान ट्रैफिक पुलिस करते देखी जा सकती है। ट्रैफिक पुलिस वाहन चालकों को गाड़ी उठाने से पहले न तो कोई चेतावनी देती है। न ही कोई लाउडस्पीकर से उन्हें अवगत कराया जाता है। ट्रैफिक पुलिस की यह जबरन चालानी कार्रवाई आम नागरिकों की जेब को ढीली करना है।

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शहर में बढ़ता ट्रैफिक और पार्किंग की सुविधा का न होना आम लोगों के लिए आम लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। शनिवार को भी ट्रैफिक पुलिस ने मेडिकल क्षेत्र न्यूटिमा अस्पताल के सामने से कई कारों को उठाकर पुलिस लाइन भिजवा दिया। पुलिस का तर्क था कि अवैध पार्किंग में कारें खड़ी थी। शहर में पार्किंग की व्यवस्था न के बराबर है। इसलिए वाहन स्वामी अपनी गाड़ियों को कहां खड़ी करे। रोड रेगुलेशन 1989 के सेक्शन 20 के तहत ट्रैफिक पुलिस सड़क किनारे ऐसे वाहनों पर कार्रवाई कर सकती है।

या उसे खींचा जा सकता है। या उसे टो किया जा सकता है। नो पार्किंग एरिया में खड़ी कारों पर मौजूदा नियम के तहत ट्रैफिक पुलिस चालान काट सकती है। जिसके लिए अलग-अलग चालान राशि का प्रावधान है। यह चालान बड़े वाहनों से लेकर छोटे वाहनों तक दो हजार रुपये से लेकर जगह और वाहन के हिसाब से 200 रुपये तक दोपहिया वाहनों के लिए लिया जाता है।

अगर आप जल्दी में नो पार्किंग में कार पार्क करते हैं। तो तब भी पुलिस तुरंत आकर आपकी कार को लेकर नहीं जा सकती। पुलिस लाउडस्पीकर पर चेतावनी देकर कुछ समय वाहन मालिक का इंतजार करने के बाद मालिक के न आने पर ही कार को टो करके ले जा सकती है। अगर आपकी कार टैÑफिक का कारण बन रही है तो पुलिस आपसे कार हटाने के लिए कहेगी और कार न हटाने पर तब चालान करेगी।

चालकों को होना पड़ेगा जागरूक

वाहन चालकों की जागरुकता से ही नो पार्किंग में वाहन खड़े होने से बचे जा सकते हैं, इससे सभी वाहन चालकों को सुविधा रहेगी, लेकिन शहर में नो पार्किंग जोन में वाहन खड़ा करना आम आदमी की आदत मे शुमार हो गया है। यातायात विभाग भी लाचार नजर आ रहा है। विभाग हर महीने सैकड़ों वाहनों का नो पार्किंग के चालान काट रहा है। चालान काटे जाने के बाद भी मार्गों पर वाहन आसानी से दिखाई दे जाते हैं।

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