- सरकार! ऐसे स्कूलों में कैसे पढेÞगी बेटियां
- स्कूल चलो अभियान के अफसरों के दावे सिर्फ किताबी
- आदर्श प्राइमरी स्कूल मोहनपुरी में टॉयलेट तो है पानी और दरवाजा नहीं
- कक्षाओं में कूड़े के ढेर, शिक्षा के बजाय बीमारियां ग्रहण कर रहे नौनिहाल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सरकार के स्कूल चलो अभियान को चलाने वाले ही उसमें पलीता लगाने पर तुले हुए हैं। बेटियों की शिक्षा को लेकर सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाले स्कूल चलो अभियान का इससे जुडेÞ अफसरों ने, खासतौर से उन अफसरों ने जिन्हें लगता है कि केवल आॅफिस के रूम में बैठने भर से उनकी डयूटी पूरी हो गयी है, मजाक बना रख दिया है।
जमीनी हकीकत से कोसों दूर
सरकार का स्कूल चलो अभियान अफसरों की कारगुजारियों के चलते जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। इसके प्रचार प्रसार के नाम पर अफसर केवल मीटिंग करने और रैली निकालने तथा दीवारें पुतवाने तक ही सीमित होकर रह गए हैं। जो बच्चे स्कूल आ रहे हैं वो किन हालात में पढ़ रहे हैं, यह देखने के लिए अपने आॅफिस के कक्ष से निकलने की फुर्सत अफसरों को नहीं। इसमें शिक्षा विभाग और प्रशासन समेत तमाम वो अफसर भी शामिल हैं जो स्कूल चलो अभियान में खुद को पुरोधा बताते नहीं अघाते।

टॉयलेट है, पर दरवाजा नहीं
शहर का सिविल लाइन क्षेत्र जहां सिस्टम चलाने वाले तमाम अफसर बैठते हैं, इसी सिविल लाइन के न्यू मोहनपुरी इलाके में स्थित आदर्श प्राइमरी स्कूल की बात कर लेते हैं। जनवाणी संवाददाता जब इस स्कूल में पहुंचा तो एक ही ही झटके में स्कूल चलो अभियान के अफसरों के दावों की कलई उतरती चली गयी। साथ ही यह भी समझ में आ गया कि सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को माता-पिता क्यों नहीं भेजते हैं?
क्यों सरकारी स्कूलों के नाम पर मासूम बच्चे डरते हैं। इस स्कूल में टॉयलेट तो था, लेकिन उस पर दरवाजा तक नहीं था। पानी का भी माकूल इंतजाम नहीं था। दिमाग में सवाल आ कि यदि टॉयलेट गए तो फिर धोएंगे कैसे पानी तो है नहीं। यहां पढ़ने आने वालों में बेटियां भी शामिल हैं। स्कूल में आने वाले बच्चे कई घंटे यहां रहकर पढ़ाई करते हैं।

सर्दी का मौसम हैं बार-बार टॉयलेट आता है। जब टॉयलेट पर दरवाजा ही नहीं है तो बेटियां भला कैसे यहां टॉयलेट को जा सकती हैं। या फिर अफसर ही बात दें कि इस टॉयलेट में तो जाना मुमकिन नहीं, यदि बेटियों को टॉयलेट आए तो वो कहां जाएं।
कक्षा में कचरे का ढेर
आदर्श प्राइमरी स्कूल मोहनपुरी में केवल टॉयलेट पर दरवाजा या धोने के लिए पानी भर की समस्या नहीं है। इस स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आने वाले छोटे-छोटे बच्चे शिक्षा कितनी ग्रहण कर रहे हैं यह तो परीक्षा के परिणाम आने के बाद ही पता चला सकेगा, लेकिन क्लास में दरवाजे के पास लगा कूडेÞ कचरे का ढेर बता रहा था कि बच्चे बीमारियां जरूर ग्रहण कर रहे हैं। सर्दी के मौसम में बच्चों की इम्युनिटी कुछ कमजोर हो जाती है।

ऐसे में बच्चे आसानी से बीमारियों की जकड़ में आ जाते हैं। फिर जब जिस क्लास में कूडे कचरे का ढेÞर लगा हो और पूरे दिन वहीं पर रहना हो तो फिर बीमारी लगे भी क्यों ना इसीलिए तो कहा है कि स्कूल चलो अभियान के अफसरों के दावे किताबी हैं। इसकी वजह ऐसे स्कूलों तक पहुंचे-पहुंचे स्कूल चलो अभियान चौखट पर ही दम तोड़ दे रहा है।
प्रधानाचार्य छुट्टी पर रिटायर्ड चपरासी के कंधों पर जिम्मेदारी
सिविल लाइन के मोहनपुरी स्थित त्रिलोक चंद्र शकुंतला शर्मा आदर्श एकेडमी जूनियर हाईस्कूल की प्रधानाचार्य के छुट्टी होने की जानकारी दी गयी। स्कूल का कार्यभार स्कूल के सेवानिवृत चपरासी द्वारा संभाले जाने की बात कही गयी। पूरे स्कूल में लगभग 40-50 बच्चे अलग-अलग कक्षाओं के पाए गए। जिन्हें एक ही जगह सर्दियों मे कच्ची ईंटों के फर्श पर नंगे पैर खड़े होकर पढ़ाई करने को मजबूर है। स्कूल की हालत देखकर बार-बार यही सवाल मन में कौंध रहा था कि क्या यूपी के सरकारी स्कूलों की हालात इतनी खराब हो चुकी है।
बीएसए का नो रिप्लाई
सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट की तौर पर प्रस्तुत किए जा रहे स्कूल चलो अभियान और बदहाल आदर्श प्राइमरी स्कूल मोहनपुरी को लेकर जब बीएसए आशा चौधरी से संपर्क का प्रयास के लिए कॉल किया तो उनकी ओर से काल रिसीव नहीं की गयी।

