
अंबिका |
बच्चों में मोटापा एक भयंकर समस्या का कारण बन गया है। आजकल का रहन-सहन, खानपान और नये प्रकार के भोजन में रूचि बच्चों की सेहत पर तबाही मचा रही है। इस समस्या के कई कारण हैं और इससे बच्चों में कई प्रकार की बीमारियां पाई जा रही हैं। सबसे भयानक बात तो यह है कि इस मोटापे के कारण बच्चे भी अब दिल की बीमारी, अधिक ब्लड प्रेशर, सांस फूलना व चिंता की बीमारी का शिकार बन चुके हैं। अब बच्चों को भी पतले होने के लिए अस्पतालों में तथा हेल्थ क्लबों में भर्ती किया जा रहा है। शिशु अवस्था में ही गलत खानपान की आदतें पड़ जाती हैं। ज्यादा दूध, मक्खन व अण्डे कितना नुकसान पहुंचाते हैं, यह तो बाद में पता चलता है। अमरीका में की गयी एक खोज के अनुसार ज्यादा से ज्यादा लोग जो मोटापे का शिकार होते हैं और जिन्हें दिल की बीमारी होती है, वे बचपन से ही मोटापे का शिकार होते हैं लेकिन इन सब का नुकसान तभी पता चलता है जब बच्चे किशोर अवस्था में पहुंचते हैं।
अब तो हमारे देश में भी देखा गया है कि खाने पीने की गलत आदतें ही इस समस्या को बढ़ा रही हैं। आजकल बहुत से घरों में माताएं नौकरी पर जाती हैं। घर आकर वे सोचती हैं कि होटलों के महंगे और अनोखे खाने खिलाने से उनकी मेहनत भी बचेगी और बच्चे भी स्वादिष्ट खाना खाकर खुश रहेंगे। ऐसे बरगर, पिजा और कई प्रकार के फास्ट फूड खाने की आदत बच्चों की सेहत को बहुत नुकसान पहुंचाती है। अगर आप सुविधाजनक खाना ढूंढ रहे हैं तो यह जरूरी नहीं कि आप बाहर से ही खाना मंगायें। दूध, दही, सलाद और कटे हुए फलों का सलाद, यह सब खाने से आपको फायदा होगा।
आजकल के रहन सहन का तरीका भी मोटापे को बढ़ाता है। आजकल के बच्चे कहीं खेलने नहीं जाते। इसके कई कारण हैं। शहरों में खेलने की जगहों की कमी, छोटे-छोटे मकान और फिर पढ़ाई के मारे बच्चों को तो खाली समय तो मिलता ही नहीं। स्कूल से आकर बच्चे गृहकार्य में व्यस्त हो जाते हैं। तकरीबन 2-3 घण्टे काम करने के बाद जब उन्हें खाली समय मिलता है तो वे खेलना चाहते हैं-लेकिन वे खेलने कहां जाएं?
खुले बगीचे तो दिखाई ही नहीं देते और घरों के नीचे मैदान तो हैं ही नहीं इसलिए खाली समय में बच्चे टेलीविज? देखते रहते हैं। इससे उनके शरीर पर बुरा असर होता है। कहीं खेलना नहीं, शरीर के किसी भी अंग का व्यायाम नहीं हो पाता। ऐसे में उनका शरीर फूलता ही रहेगा। फिर टेलीविजन देखते समय जरूर बच्चे भी और बड़े भी कुछ न कुछ खाते पीते हैं जैसे वेफर, पैप्सी इतयादि। यह सब एक आदत बन जाती है और यह बच्चों के लिए बहुत हानिकारक है। टेलीविजन के अलावा अब अधिक से अधिक बच्चे कंप्यूटर में रूचि लेने लगे हैं। कई घंटे लगातार बैठे रहने से उनका क्या व्यायाम होगा?
बच्चों का मोटापा रोकने के कुछ उपाय
-सुबह बच्चों को भरपेट नाश्ता जरूर दें। इस नाश्ते में प्रोटीन जरूर होना चाहिये जैसे एक गिलास दूध या फलों का जूस, एक अण्डा, चीज या पनीर और हो सके तो थोड़ा दलिया या कार्नफ्लेक्स।.
-मीठी चीजें जैसे टाफी, चाकलेट, केक, पेस्ट्री और शीतल पेय पदार्थ न लें या इनकी मात्रा कम करें।
-शाम को चाय के समय पोहा, भुने हुए चने, मुरमुरे, पापकार्न इत्यादि दें आईसक्र ीम, केक, पेस्ट्री इत्यादि कम करें।
-बच्चों को सलाद, कच्ची सब्जी व फल खाने की आदत डालें।
-टेलीविजन के सामने बैठ कर खाना छोड़ दें। खाना खाते समय टेलीविजन बंद कर दें। टेलीविजन के सामने बैठकर आमतौर पर ज्यादा खाना खाया जाता है। हल्की फुल्की बातचीत जरूरी है खाना खाते समय।
-यदि मीठा खाना पसंद है तो फलों को काट कर और उनमें थोड़ा कस्टर्ड इत्यादि डाल कर खाएं। आईसक्र ीम, मिठाई, चाकलेट न लें। रेवड़ी, गजक इत्यादि गोलियों व चाकलेट से ज्यादा फायदेमंद हैं।
-रोजाना बच्चों को खेलने भेजें। यदि आपके घर के पास पार्क या खुली जगह नहीं है तो ऊपर छत पर या नीचे मैदान में बच्चों को खेलने या व्यायाम के लिए जरूर भेजें और यह सब नहीं हो सकता तो जरूर अपने बच्चों के साथ सैर करने जाएं। बच्चे आपकी आदतों से बहुत कुछ सीखते हैं। अपना रहन सहन व खानपान भी बदलें जिससे बच्चों पर भी अच्छा असर हो।


