- मरीजों को स्ट्रेचर, व्हीलचेयर पर ले जाते हैं तीमारदार
- घंटों लाइनों में लगना पड़ता है मरीजों को
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: प्यारेलाल शर्मा चिकित्सालय यानी जिला अस्पताल कहने को जीवनदायिनी है, लेकिन इसकी सेवाएं बद से बदतर हैं। यहां मरीज को पर्ची बनवाने से लेकर डाक्टर को दिखाने और दवाई लेने तक घंटों लाइनों में लगना पड़ता है। गंभीर रोगियों को स्ट्रेचर और व्हील चेयर पर उनके तीमारदारों को ले जाना पड़ता है। खास बात है कि मरीज फरियाद किससे करें, अधिकारी अपने दफ्तर में पूरा समय नहीं देते।
जिला अस्पताल में रोजाना करीब दो हजार मरीज ओपीडी में आते हैं। इसके अलावा कुछ मरीज इमरजेंसी भी आते हैं। मरीज बड़ी उम्मीद के साथ अस्पताल आते हैं कि उन्हें पहुंचते ही तमाम सेवाएं मिलेंगी, लेकिन बड़ी संख्या में मरीजों को जब इधर से उधर चक्कर कटवाए जाते हैं और लंबी-लंबी लाइनों में घंटों लगना पड़ता है तो उनकी उम्मीदों पर पानी फिर जाता है। इस अस्पताल में करीब 25 चिकित्सक हैं।

यहां फिजीशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, छाती रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, दंत रोग विशेषज्ञ, आर्थोपैडिक सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, एनेथीसिया आदि चिकित्सक हैं। इतनी भारी भरकम टीम होने के बावजूद यहां की सेवाएं लचर हैं। कुछ चिकित्सक तो ओपीडी के दौरान अपनी सीट छोड़कर चले जाते हैं। कुछ मरीजों को गंभीरता से देखने के बजाए उन्हें टरकाने पर जोर देते हैं।
कुछ कर्मचारी मरीजों को अस्पताल में इधर-उधर चक्कर कटवाते हैं। कर्मचारी गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर या व्हील चेयर पर लगाने को तैयार नहीं होते। परेशान होकर तीमारदार खुद ही मरीज को स्टेÑचर व व्हील चेयर पर डाक्टर के पास ले जाते हैं। मरीज व तीमारदार अधिकारियों से शिकायत करना चाहते हैं तो उन्हें कार्यालय में अधिकारी नहीं मिलते। बड़ी संख्या में मरीज परेशान होकर प्राइवेट चिकित्सको के पास चले जाते हैं।
अच्छा चल रहा अस्पताल
जिला अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. सुदेश कुमार का कहना है कि वह हाल ही में तबादला होकर जिला अस्पताल में आई हैं। यहां सब कुछ अच्छा चल रहा है। यदि कहीं कोई सेवा में दिक्कत होगी तो उसे दूर किया जाएगा।

