- मेरठ जनपद के लिए निर्धारित लक्ष्य 46 हजार मेट्रिक टन के सापेक्ष महज 7.8 प्रतिशत हो सकी खरीद
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: खुले बाजार में एमएसपी से अधिक मूल्य मिलने के कारण किसान सरकारी खरीद केन्द्रों तक गेहूं बेचने के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में एक माह से अधिक अवधि बीत जाने के बावजूद निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक केवल 7.8 प्रतिशत ही खरीद हो सकी है। जनपद वित्तीय वर्ष 2024-25 में गेहूं की खरीद के लिए 29 क्रय केन्द्र खोले गए हैं। जिनमें 12 पीसीएफ, छह खाद्य विभाग, छह भारतीय खाद्य निगम और पांच यूपीएसएस के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं।
एक मार्च से ही खोल दिए गए इन केन्द्रों पर जनपद में 46 हजार मेट्रिक टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसके सापेक्ष अभी तक जनपद में 3595.350 मेट्रिक टन यानि केवल 7.8 प्रतिशत खरीद हो पाई है। यह गेहूं मेरठ जनपद के 960 किसानों से खरीदा गया है। इसमें खाद विभाग के केन्द्रों पर 342.450 मेट्रिक टन गेहूं 100 किसानों से, पीसीएफ के केन्द्रों पर 1067.050 मेट्रिक टन गेहूं 389 किसानों से, यूपीएसएस के केन्द्रों पर 1134.100 मेट्रिक टन गेहूं 212 किसानों से और एफसीआई के केन्द्रों पर 1051.750 मेट्रिक टन गेहूं 259 किसानों से खरीदा जा चुका है।
मेरठ संभाग के अंतर्गत आने वाले छह जनपदों में कोरोना काल के दौरान वित्तीय वर्ष 2020-21 में 151966 मेट्रिक टन और 2021-22 में 294522 मैट्रिक टन गेहूं की रिकार्ड खरीद हुई है। इसके बाद वर्ष 2022-23 में गेहूं की खरीद एकदम से धड़ाम हुई और केवल 4605.992 मेट्रिक टन गेहूं 1900 किसानों से खरीदा जा सका। इसके अगले वर्ष 2023-24 में 1751 किसानों से 5567.889 मेट्रिक टन गेहूं की सरकारी खरीद हो सकी। बताते चलें कि संभाग के अंतर्गत मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुध नगर, बागपत और बुलंदशहर जिले आते हैं।
खेतों से खरीद कर रहे व्यापारी
गेहूं की खरीद के लिए पिछले कुछ सालों में व्यापारियों ने अलग ही फार्मूला अपनाया हुआ है। वे न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित होने का इंतजार करते हैं। इसके उपरांत एक सोची समझी रणनीति के तहत किसानों से संपर्क शुरू कर देते हैं और न्यूनतम समर्थन मूल्य से 50 या इससे अधिक रुपये प्रति कुंतल की दर से गेहूं की खरीद करते हैं। व्यापारी एक फॉर्मूला यह भी अपनाते हैं कि वे गेहूं की खरीद खेतों से ही करने लगे हैं।
इससे किसान की मेहनत और मजदूरी भी बच रही है और वे अपने गेहूं को उठाकर भंडारण करने से बच रहे हैं। वहीं उन्हें एमएसपी से अधिक मूल्य व्यापारियों की ओर से मिल रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए चल रही गेहूं की खरीद के दौरान भी व्यापारियों ने कमोबेश यही रणनीति अपनाई हुई है। जिसके कारण सरकारी खरीद केन्द्रों पर इक्का-दुक्का किसान ही पहुंच रहे हैं।

