Monday, April 13, 2026
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अदालत के आदेश को चुनौती दे रहे थे विधायक रफीक, 101 बार जारी हो चुका था गैर जमानती वारंट, कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे थे रफीक अंसारी

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक अभिनंदन और स्वागत है। मेरठ शहर से समाजवादी पार्टी के विधायक रफीक अंसारी के लिए सोमवार का दिन बुरा साबित हुआ। एक काफी पुराने केस में मेरठ पुलिस ने अदालत के आदेश पर विधायक की तलाश कर रही थी।

बताया जा रहा है कि लखनऊ से मेरठ आ रहे विधायक रफीक अंसारी को बाराबंकी पहुंचते ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। शाम तक मेरठ पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला…

सपा विधायक रफीक अंसारी को मेरठ पुलिस को ढूंढ़े रही है, लेकिन विधायक अचानक से गायब हो गए। मेरठ प्रशासन को हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी और NBW नोटिस जारी होने के बाद भी विधायक अदालत में पेश नहीं हुए।

वहीं मेरठ पुलिस ने कोर्ट के सख्त आदेश के बाद विधायक को गिरफ्तार करने के लिए टीम गठित कर दी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1995 के मामले में मेरठ के शहर सपा विधायक रफीक अंसारी को राहत देने से इनकार कर दिया। विधायक की NBW के आदेश के खिलाफ की गई याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने याचिका को इसलिए खारिज किया था। सपा नेता के खिलाफ 1997 से 2015 के बीच 100 ज्यादा गैर-जमानती वारंट जारी हुए थे। इसके बावजूद अदालत में पेश नहीं हुए।

जारी हो चुके थे 101 वारंट जारी

इस मामले में उपरोक्त धाराओं के तहत अपराध के लिए 35-40 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ सितंबर 1995 में एफआईआर दर्ज की गई। जांच पूरी होने के बाद 22 आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ पहला आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया।

आवेदक अंसारी के खिलाफ एक और पूरक आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया, जिस पर संबंधित अदालत ने अगस्त 1997 में संज्ञान लिया। सपा विधायक रफीक अंसारी को 12 दिसंबर 1997 को गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। धारा 82 सीआरपीसी के तहत 101 गैर-जमानती वारंट हुए और प्रक्रियाओं के बावजूद, आवेदक अदालत के सामने पेश नहीं हुआ।

BIG BREAKING: मेरठ से सपा विधायक रफीक अंसारी गिरफ्तार, जानिए इस केस में हुआ बड़ा एक्शन

आज सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से गैर जमानती वारंट के केस में मेरठ शहर से समाजवादी पार्टी के विधायक रफीक अंसारी को लखनऊ और बाराबंकी के बीच से गिरफ्तार कर लिया गया है।

आपको बता दें कि अदालत के आदेश पर एसएसपी रोहित सिंह सजवान ने सीओ सिविल लाइन के नेतृत्व में विधायक की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की थी।

दरअसल, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, एमपी- एमएलए मेरठ की अदालत से आईपीसी की धारा 147, 436 और 427 के तहत विचाराधीन आपराधिक मुकदमे में विधायक रफीक अंसारी के खिलाफ जारी वारंट को चुनौती दी गई थी। मुकदमे में सितंबर 1995 में 35-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

22 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। उसके बाद याची के खिलाफ एक पूरक आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया, जिस पर संबंधित अदालत ने अगस्त 1997 में संज्ञान लिया था। रफीक अंसारी अदालत में पेश नहीं हुए थे।

12 दिसंबर 1997 को गैर-जमानती वारंट जारी हो गया था। इसके बाद बार-बार 101 गैर-जमानती वारंट जारी हो गए। धारा 82 सीआरपीसी के तहत कुर्की प्रक्रिया के बावजूद रफीक अंसारी अदालत में पेश नहीं हुए और हाईकोर्ट चले गए।

उनके वकील ने तर्क दिया था कि 22 आरोपियों को 15 मई 1997 के फैसले में बरी कर दिया गया। ऐसे में विधायक के खिलाफ कार्रवाई रद होनी चाहिए। वहीं,

कोर्ट ने इस मामले में डीजीपी को निर्देश दिए थे कि रफीक अंसारी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी किए गए गैर- जमानती वारंट की तामील सुनिश्चित करें।

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