- शहर में अब तक एम्पायर ग्रीव्ज्Þा की टूट चुकी है 80 स्कूटी
- केंद्र सरकार के अधीन आने वाली एजेंसियां जारी कर रही एनओसी
- आम जनता की जान के साथ हो रहा खिलवाड़
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: क्या यह किसी ऐसे अपराध की श्रेणी में नहीं आना चाहिए, जिसे जान से मारने का प्रयास कहा जाता है। हम बात कर रहे हैं एम्पायर ग्रीव्ज्Þा नाम की उस कंपनी में बनी इलेक्ट्रिक स्कूटी की जो आए दिन सड़क पर धराशाई हो रही है। बस गनीमत ये है कि अभीतक इस तरह की घटनाओं में किसी की जान नहीं गई, लेकिन स्कूटी बनाने वाली कंपनी ने जान लेने का पूरा इंतजाम कर रखा है।
सोमवार को गौरव जैन पुत्र प्रदीप जैन निवासी नेहरु नगर की स्कूटी उसके यहां काम करने वाला सर्वोदय कॉलोनी का रहने वाला सूरज नाम का युवक चला रहा था। इस दौरान जैसे ही वह जेलचुंगी के पास पहुंचा तभी अचानक स्कूटी दो हिस्सो में बट गई। बताया जा रहा है स्कूटी टूटने के बाद सूरज सड़क पर गिर पड़ा। जिससे उसके हाथ में चोट आई है, लेकिन यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी करीब 79 ऐसी ही घटनाएं पूरे जिले में सामने आ चुकी है। एम्पायर ग्रीव्ज्Þा को कैसे मिला स्कूटी बनाने का अधिकार इसके पीछे का सच भी काफी दिलचस्प है।
पूणे की सीआईआरटी व आईकट मानेसर पंजाब की एजेंसी है, जो केंद्र सरकार के लिए काम करती है। इन दोनों एजेंसियों की एनओसी के बिना कोई भी कंपनी बैट्री से चलने वाला दुपहिया व्हीकल नहीं बना सकती है। यह एजेंसियां ही अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करती है जिसके लिए व्हीकल बनाने वाली कंपनियों को कुछ मानक पूरे करने होते हैं, लेकिन वह कौन से मानक है जिन्हें पूरा करने के बाद मौत की चौखट तक ले जाने वाले दुपहिया वाहन बन रहे हैं, यह बड़ा सवाल है।
जिस एम्पायर ग्रीव्ज्Þा कंपनी के व्हीकल टूट रहे हैं। उनकी कीमत एक लाख रुपये है, जबकि कंपनी दो साल की वरंटी भी देती है। मगर इस समय मेरठ में इस कंपनी का एक भी शोरूम मौजूद नहीं है। जिन लोगों ने इस कंपनी के व्हीकल खरीदे हैं। वह अब राम भरोसे ही उन्हें चला रहे हैं। कंपनी की ओर से इनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।
मेरठ के परिवार पर उत्तराखंड पुलिस का कहर
कंकरखेड़ा में रहने वाला परिवार रविवार को गंगा दशहरे के अवसर पर हरिद्वार स्नान करने गया था। ज्वालापुर में परिवार की कार सड़क किनारे रुकी तो उत्तराखंड पुलिस ने टोक दिया। इसके बाद बात बढ़ने पर पुलिस ने कार चला रहे युवक को पकड़ लिया और पिटाई शुरू कर दी। यहां तक कि महिलाओं के साथ भी अभद्रता की गई। उत्तराखंड पुलिस ने दबंगई दिखाते हुए खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
कंकरखेड़ा के रहने वाले सतेंद्र राठी पत्नी मंजू राठी, बेटी कनक और बेटे गृहवित राठी के साथ रविवार को गंगा दशहरे के अवसर पर हरिद्वार स्नान करने गए थे। दोपहर करीब एक बजे जब वह हरिद्वार की ज्वालापुर तहसील पहुंचे तो कार चला रहे गृहवित ने पानी की बोतल खरीदने के लिए कार सड़क किनारे रोक दी। तभी ज्वालापुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और कार हटाने को कहा। सतेंद्र ने कहा कि बेटा पानी लेकर आ रहा है, आते ही वह आगे बढ़ जाएंगे। इतना सुनने के बाद पुलिस ने कार का 500 रुपये का चालान काट दिया।
जबकि सतेंद्र ने चालान नहीं काटने की गुजारिश की थी, लेकिन पुलिस ने उनकी बात नहीं सुनी। तभी बेटा गृहवित पानी लेकर आया और पुलिस द्वारा चालान काटने पर विरोध जताया। इसके बाद पुलिसकर्मी बेटे को खींचकर अपने साथ ले जाने लगे और उसे कई चांटे जड़ दिए। हाथापाई होने पर बीच-बचाव करने आई गृवहित की बहन कनक के साथ भी पुलिस ने बदसलूकी की। इस दौरान मौके पर काफी भीड़ जमा हो गई।
भीड़ ने पुलिस को रोका, लेकिन वह युवक के साथ मारपीट करने उतारु हो गई। बात यहीं पर खत्म नहीं हुई। पुलिस ने दबंगई दिखाते हुए पूरे परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर हिरासत में ले लिया। उत्तराखंड पुलिस ने परिवार पर गंभीर आरोप भी लगाया कि वह पुलिस को पिस्टल दिखा रहे थे, सरकारी कार्य में बाधा डालने व गाली-गलौज की गई। बताया जा रहा है कि सोमवार को पुलिस ने पूरे परिवार पर जानलेवा हमला करने का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

