Saturday, March 14, 2026
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अवैध हैं शहर के सभी 500 कोचिंग सेंटर

  • किसी के पास भी फायर की एनओसी नहीं, धड़ल्ले से चल रहा काम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर में 500 कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। इनमें से किसी के पास भी फायर एनओसी नहीं है, नियमानुसार कोचिंग सेंटर सरीखे किसी भी संस्थान को चलाने के लिए संचालक के पास फायर एनओसी का होना जरूरी है। फायर एनओसी का ना होना एक अलग बात है, चौंकाने वाली बात तो यह है कि कोचिंग सेंटर संचालक फायर एनओसी लेना जरूरी तक नहीं समझ रहे हैं।

दिल्ली की घटना के बाद शासन से लेकर प्रशासन तक साबित करने में लगे है कि वो कितने गंभीर हैं। इससे पहले ना कोई जिक्र ना माजरा, तीन मौत क्या हुई सभी को अपनी जिम्मेदारियां याद आ गर्इं। शासन ने रिपोर्ट तलब की तो मेरठ विकास प्राधिकरण के अफसरों भी अचानक बिल्डिंगों के बेसमेंट में चल रही व्यवसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का ध्यान आ गया। तीन जिम और एक लाइब्रेरी व तीन कोचिंग सेंटर सील कर दिये। हालांकि अवैध रूप से सील किये गए कोचिंग सेंटर ही नहीं चल रहे, शहर के तमाम कोचिंग सेंटर ही अवैध हैं। इनके पास फायर की एनओसी तक नहीं। ये बात खुद सीएफओ भी मान रहे हैं।

कैंट विधायक बोले-हादसे के बाद ही कार्रवाई क्यों?

दिल्ली कोचिंग सेंटर हादसे और हादसे के बाद कार्रवाई का किया जाना, कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या अधिकारियों को पहले से नहीं पता था कि कहां पर अवैध रूप से व्यवसायिक गतिविधियां जारी हैं। हादसे के बाद एकाएक कैसे अधिकारियों को पता चल गया कि अमुक जिम या लाइब्रेरी अवैध रूप से संचालित की जा रही है।

उन्होंने कहा कि क्या यह जरूरी हो गया है कि मेरठ विकास प्राधिकरण हो या कोई अन्य विभाग के अधिकारी कार्रवाई तभी करेंगे, जब कोई बड़ी घटना हो जाएगी। उसका शिकार कोई शख्स हो जाएगा। ऐसा सभी विभागों के साथ होता है। इस प्रकार का कोई भी काम रातों रात तो हो नहीं जाता। ना रात के अंधेरे में होता है। फिर अधिकारी क्यों नहीं ऐसे मामलों में शुरू में ही कार्रवाई करते हैं।

पेड़ों के अवैध कटान का एनजीटी ने लिया संज्ञान

मेरठ: मेरठ, गाजियाबाद व मुजफ्फरनगर अपर गंगा केनाल के दांयी पटरी पर सड़क निर्माण के नाम पर पेड़ों के अंधाधुंध कटान का मामला सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान ने विधानसभा में उठाया। सपा विधायक ने सदन के माध्यम से सरकार को अवगत कराया कि मानकों के विपरीत विभागीय अधिकारियों के संरक्षण के चलते 40 मीटर तक पेड़ों का कटान कर दिया गया। जन विरोध के बाद भी कटान नहीं रोका गया। विधायक ने सरकार से पूछा कि बताया जाए कितने पेड़ों के कटान की अनुमति दी गयी है। अब तक कितने पेड़ों का कटान किया जा चुका है। उन्होंने अवगत कराया जितने बड़े स्तर पर पेड़ों का कटान किया गया है।

उससे इस क्षेत्र में पर्यावरण असंतुलन की स्थिति पैदा हो जाएगी। इस मामले में सरकार की ओर से विधायक को अवगत कराया गया कि चौधरी चरणसिंह कांवड़ मार्ग पर 20 मीटर के भीतर जनपद मुजफ्फरनगर में 5245, मेरठ के अंतर्गत 9423 व जनपद गाजियाबाद के अंतर्गत 1906 वृक्षों का पातन यानि कटान किया जा चुका है। कुल 16574 वृक्षों का पातन किया जा चुका है। पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन अनुभाग-2 की ओर से राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभारी डा. अरुण कुमार ने उक्त जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले का एनजीटी ने स्वत: संज्ञान लिया हुआ है। एनजीटी में मामला विचाराधीन है।

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