Monday, March 16, 2026
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बीएसए, बीईओ के खिलाफ हाईकोर्ट की अवमानना की याचिका निस्तारित

  • वर्तमान समय में याची को रजिस्टर में साइन भी करने नहीं दिया जा रहा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारी मेरठ के विरुद्ध अवमानना याचिका निस्तारित कर दिया गया। याची शिक्षामित्र निमिषा तिवारी की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने न्यायमूर्ति सलिल राय को बताया कि हाइकोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारी मेरठ ने स्कूल के हेडमास्टर मधुसूदन कौशिक को आदेश पारित कर दिए थे, लेकिन विद्यालय के हेड मास्टर, प्रभारी प्रधानाध्यापक मधुसूदन कौशिक कुछ दिन तक विद्यालय रजिस्टर पर साइन कराया और मानदेय भी मिल गया, लेकिन याची को पूर्व की स्थिति में कोई कक्षा पढ़ाने के लिए आवंटन नहीं किया और वर्तमान समय में याची को रजिस्टर में साइन भी करने नहीं दिया जा रहा है।

याचिका को निस्तारित करते हुए शिक्षामित्र निमिषा तिवारी को हेड मास्टर उच्च प्राथमिक विद्यालय कृष्णपुरी नगर के विरुद्ध याची को कक्षा आवंटन न कराए जाने पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व अन्य उच्च अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज करने के निर्देश दिया है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में याची के विरुद्ध रिकवरी व सेवा समाप्ति के आदेश पर हाइकोर्ट रोक लगा चुकी है। वह मामला अगले से विचाराधीन है। इसके साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीएसए और बीईओ मेरठ के विरुद्ध अवमानना याचिका की निस्तारित कर दी है।

कोर्ट ने याची को कक्षा आवंटन न करने पर बीएसए व अन्य उच्च अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज करने की दी छूट दे दी है। साथ ही हाइकोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए बीएसए व बीईओ, मेरठ ने स्कूल के हेडमास्टर मधुसूदन कौशिक को निर्देश दिया था। जिस पर प्रभारी प्रधानाध्यापक मधुसूदन कौशिक ने कुछ दिन तक विद्यालय रजिस्टर पर याची का साइन कराया। जिसके बाद याची को मानदेय भी मिल गया,

लेकिन याची को पूर्व की स्थिति में कोई कक्षा कक्ष पढ़ाने के लिए आवंटित नहीं किया गया। वर्तमान समय में याची को रजिस्टर में साइन भी करने नहीं दिया जा रहा है, कोर्ट ने शिक्षामित्र निमिषा तिवारी की ओर से दाखिल अवमानना याचिका की निस्तारित, हाईकोर्ट ने याची के विरुद्ध रिकवरी व सेवा समाप्ति के आदेश पर भी रोक लगा रखी है। इस मामले में अधिवक्ता सुनील चौधरी ने याची की ओर से रखा पक्ष। जस्टिस सलिल कुमार राय की सिंगल बेंच में सुनवाई की गयी।

डीजी शिक्षा और जेडी ने लौटाया खाली हाथ

मेरठ: 69000 शिक्षक भर्ती का मामला वाया हाईकोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद अब प्रदेश के शिक्षा विभाग के अधिकारी भी सावधानी बरत रहे हैं। 69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा और संयुक्त निदेशक गणेश कुमार से मिलने पहुंचे थे। बताया जाता है कि उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से हाईकोर्ट के फैसले को लागू करने की मांग की। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित केस के बारे में भी चर्चा की। सूत्रों ने यह भी बताया कि दोनों अधिकारियों का रेस्पांस बेहद ठंडा था।

उनसे मिल कर निराश हाथ लगी। वहीं, दूसरी ओर यह मामला फिलहाल तो ठंडा होता नजर नहीं आ रहा है। वहीं, दूसरी ओर मेरठ समेत प्रदेश भर में इस मामले में अभ्यर्थियों ने मांग की कि प्रदेश सरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश का पालन करे, जिसके तहत सरकार को भर्ती की नई चयन सूची जारी करनी है। मगर अधिकारियों के ढीले रवैये के कारण अभी तक चयन सूची जारी नहीं की गई। इससे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों में बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के प्रति काफी आक्रोश है। दो सितंबर को ओबीसी, एससी अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री आवास घेरने व महा धरने का ऐलान किया है।

दो टूक , पुरानी पेंशन से कम कुछ स्वीकार नहीं

मेरठ: एलएलआरएम मेडिकल के कर्मचारियों ने जिला प्रशासन की मार्फत सरकार को दो टूक बता दिया है कि पुरानी पेंशन से कम उन्हें कुछ भी स्वीकार्य नहीं। इसी क्रम में मेडिकल कर्मियों ने बुधवार को विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर काम किया। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा मेरठ में सरकार द्वारा कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने की जगह (यूपीएस) यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू किए जाने का विरोध कर रहा है।

राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा मेरठ के जिला महामंत्री ठाकुर यदवीर सिंह के नेतृत्व में मेडिकल के कर्मचारियों ने अपने-अपने स्थल पर काली पट्टी लगाकर सरकार के (यूपीएस) यूनिफाइड पेंशन स्कीम का विरोध प्रकट किया। इस विरोध प्रदर्शन में डा. रविंद्र दयाल, अखिलेश वर्मा, आकाश शर्मा, गौरव शर्मा इत्यादि भी शामिल रहे। कर्मचारियों ने सरकार के फैसले के विरोध में काली पट्टी लगाकर सरकार के खिलाफ अपने अपने स्थानों पर (यूपीएस) यूनिफाइड पेंशन स्कीम का विरोध प्रकट किया

तथा उन्होंने पूर्व की भांति पुरानी पेंशन लागू किए जाने की भी मांग की। यद्धवीर ने कहा कि उनका संगठन सरकार से कुछ नया नहीं मांग रहा है। जो छीना गया है सिर्फ की वापस करने यानि बहाली की मांग है। उन्होंने कहा कि बजाए इधर-उधर की बात करने के सरकार को चाहिए कि पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा बगैर किसी देरी के करे अन्यथा सरकार के हाथ से काफी चीजें निकल जाएंगे। जहां तक कर्मचारियों का सवाल है तो वह पहले ही कह चुके हैं कि पुरानी पेंशन बहाली से कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं।

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