Wednesday, April 22, 2026
- Advertisement -

ओपीएस, एनपीएस और यूपीएस

Samvad 51

12 pro aatveer e1599190391670
प्रो. अतवीर सिंह

वाजपेयी सरकार वर्ष 2003 में ओपीएस के बदले एनपीएस लेकर आई थी। तब भी राज्य की कांग्रेस शासित सरकारों के कर्मचारियों ने इसका विरोध किया था। वर्ष 2024 में हरियाणा, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले विधानसभा के चुनाव एवं एनपीएस के प्रति सरकारी कर्मचारियों के बीच बढ़ते आक्रोश के मद्देनजर मोदी सरकार एनपीएस के विकल्प के तौर पर यूपीएस लेकर आई है। यह योजना 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगी और इससे 23 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ मिलेगा, ऐसा सरकार का दावा है। राज्य सरकार के पास अपने कर्मचारियों के लिए भी यूपीएस चुनने का विकल्प है। राज्य कर्मचारियों के आक्रोश को खत्म करने के लिए भाजपा एवं उसके सहयोग से संचालित राज्य सरकारें अपने-अपने राज्यों में यूपीएस को तत्काल लागू कर सकती हैं। महाराष्ट्र से इसकी शुरूआत हो चुकी है।

ओपीएस और एनपीएस का मिश्रित स्वरूप है यूपीएस। यूपीएस पेंशन गणना, न्यूनतम पेंशन राशि, एकमुश्त भुगतान, कर्मचारी अंशदान में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) से भिन्न है। यूपीएस सरकारी कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि और हाल ही में प्राप्त मूल वेतन के आधार पर एक स्थिर पेंशन प्रदान करती है। पेंशन 25 वर्ष की न्यूनतम अर्ह सेवा के लिए, सेवानिवृत्ति से पहले पिछले 12 महीनों के लिए प्राप्त औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत पर फिक्स की जाएगी। पारिवारिक पेंशन कर्मचारी की मृत्यु से ठीक पहले की पेंशन का 60 प्रतिशत पर सुनिश्चित की जाएगी। सुनिश्चित न्यूनतम पेंशन कम से कम दस वर्ष की सेवा के बाद, सेवानिवृत्ति पर 10,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे।

सरकार द्वारा घोषित यूपीएस में ओपीएस से कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं। यूपीएस और ओपीएस दोनों सरकारी कर्मचारियों को सुनिश्चित पेंशन प्रदान करते हैं। लेकिन पेंशन की गणना कैसे की जाती है, इस बारे में दोनों योजनाओं में अंतर है। ओपीएस के तहत, सुनिश्चित पेंशन अंतिम प्राप्त मूल वेतन + महंगाई भत्ता (डीए) के 50 प्रतिशत पर तय की गई थी। वहीं, यूपीएस में गणना का आधार बदल गया है। यूपीएस के तहत, सुनिश्चित पेंशन का आधार सेवानिवृत्ति से पहले पिछले 12 महीनों में प्राप्त औसत मूल वेतन + डीए होगा। इसका मतलब यह होगा कि सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय पिछले 12 महीनों के वेतन + डीए के औसत का 50 प्रतिशत मिलेगा। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी कर्मचारी को सरकार के साथ अपने कार्यकाल के अंतिम कुछ महीनों के लिए उच्च वेतनमान में पदोन्नत किया जाता है, तो उसे अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत नहीं मिलेगा, बल्कि थोड़ी कम राशि मिलेगी क्योंकि यह पिछले 12 महीनों के औसत का 50 प्रतिशत होगा। इसका अर्थ यह भी है कि किन्हीं कारणों से सेवाकाल के अंतिम 12 महीनों में यदि कर्मचारी के वेतन में कटौती की गई है तो भी उसे अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत नहीं, बल्कि थोडी कम पेंशन मिलेगी। इससे अपने सेवाकाल के अंतिम वर्ष में कर्मचारी एक दबाव में कार्य करेगा।

यूपीएस कर्मचारी और सरकार के संयुक्त योगदान पर आधारित है। यूपीएस में कर्मचारी का योगदान राष्ट्रीय एनपीएस में एक कर्मचारी के योगदान के समान है। कर्मचारी को अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत यूपीएस में योगदान करना होगा। सरकार भी यूपीएस में योगदान देगी, जो 14 प्रतिशत (वर्तमान में एनपीएस में योगदान) से बढ़कर 18.5 प्रतिशत हो जाएगी। एनपीएस के तहत, सरकार वर्तमान में 14 प्रतिशत योगदान देती है, जबकि कर्मचारी एनपीएस में 10 प्रतिशत योगदान करते हैं। ओपीएस के तहत, कर्मचारी योगदान नहीं करते। एक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी वर्तमान में एनपीएस योजना में सरकार के योगदान के लिए कर लाभ के लिए पात्र है। चूंकि ओपीएस में कोई कर्मचारी योगदान नहीं था, इसलिए कोई कर लाभ उपलब्ध नहीं था।

यूपीएस में ग्रेच्युटी के अतिरिक्त सेवानिवृत्ति के समय एकमुश्त भुगतान प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। एकमुश्त भुगतान की गणना प्रत्येक छह महीने की सेवा के लिए सेवानिवृत्ति की तिथि पर मासिक परिलब्धियों (वेतन+डीए) के 1/10 वें हिस्से के रूप में की जाएगी। सरकार की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह भुगतान सुनिश्चित पेंशन की मात्रा को कम नहीं करेगा। ओपीएस के तहत, एकमुश्त राशि केवल पेंशन के कम्यूटेशन के माध्यम से सेवानिवृत्ति के समय ली जा सकती है, जिससे पेंशन राशि कम हो जाती है। पुरानी पेंशन योजना के तहत, एक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी पेंशन के एक हिस्से को, 40 प्रतिशत से अधिक नहीं, एकमुश्त भुगतान में बदल सकता है। यदि विकल्प का प्रयोग सेवानिवृत्ति के एक वर्ष के भीतर किया जाता है, तो किसी मेडिकल जांच की आवश्यकता नहीं होती है। मासिक पेंशन में से कम्यूटेड हिस्सा कम हो जाता है और कम्यूटेड हिस्सा पेंशन के कम्यूटेड मूल्य की प्राप्ति की तारीख से 15 साल की समाप्ति पर बहाल हो जता है। हालांकि, महंगाई राहत की गणना मूल पेंशन के आधार पर (यानी कम्यूटेड हिस्से में कटौती के बिना) की जाती है।

ओपीएस और यूपीएस के बीच एक आम समानता बढ़ती हुई जीवन-यापन लागत की भरपाई के लिए मुद्रास्फीति-सूचकांकित पेंशन की उपलब्धता है। ओपीएस के तहत, सेवानिवृत्त लोगों के लिए पेंशन साल में दो बार संशोधित की जाती है-1 जनवरी और 1 जुलाई को-जब भी सरकार महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में बढ़ोतरी की घोषणा करती है। यूपीएस के तहत, मुद्रास्फीति सूचकांक को सुनिश्चित पेंशन, सुनिश्चित पारिवारिक पेंशन और सुनिश्चित न्यूनतम पेंशन पर लागू किया जाएगा। सरकारी घोषणा के अनुसार, यूपीएस में सेवा कर्मचारियों के मामले में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (एआईसीपीआई-आईडब्ल्यू) के आधार पर महंगाई राहत दी जाएगी।

आर्थिक विज्ञानियों के अनुसार केंद्र और राज्य कर्मचारियों की बकाया पेंशन देनदारियां साल दर साल बढ़ती जा रही हैं, जो चिंता का सबब होना चाहिए। क्योंकि इससे विकास के लिए संसाधन सीमित हो जाते हैं। पेंशन की बढ़ती देनदारियों का मुख्य कारण व्यक्तियों की औसत आयु बढ़ना है। जब ओपीएस लागू की गई थी, तब कर्मचारी 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो जाता था और उस समय व्यक्ति की औसत आयु मात्र 35 वर्ष थी। व्यक्ति रिटायरमेंट के बाद बमुश्किल 8 से 10 वर्ष जीवित रहता था। अब कर्मचारी 60 वर्ष में रिटायर होने के बाद औसतन 75 से 80 वर्ष तक जीवित रहते हुए पेंशन प्राप्त करता है। इससे केंद्र और राज्य सरकारों पर पेंशन की देनदारियां बढ़ने लगी हैं और भविष्य में ये और तेजी से बढ़ सकती हैं। भविष्य में पेंशन देनदारियों के तेजी से बढ़ते बोझ से चिन्तित सरकार का यह कहना सही है कि राज्य कर्मचारियों को व्यवहारिक रुख अपनाना चाहिए। लेकिन क्या व्याहारिक रुख अपनाना केवल सरकारी कर्मचारियों की ही जिम्मेदारी है? हमारे देश में विशेषाधिकार प्राप्त माननीयों से कोई अपेक्षा नहीं है? क्या उनके इस देश-समाज के प्रति कोई सरोकार नहीं हैं? क्या जिन बड़े-बड़े कॉरपोरेट्स के हजारों करोड़ रुपए ऐसे ही बट्टे खाते में डाल दिए जाते हैं उनसे कोई अपेक्षा नहीं होनी चाहिए?

janwani address

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

खरगे के बयान पर सियासी संग्राम, भाजपा ने चुनाव आयोग का खटखटाया दरवाजा

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का...

Saharanpur News: पुलिस ने मुठभेड़ में चोरी का आरोपी पकड़ा, पैर में लगी गोली

जनवाणी संवाददाता | सहारनपुर: थाना तीतरों पुलिस ने मुठभेड़ के...
spot_imgspot_img