- शक्ति साधना का महापर्व आज से आरंभ
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: शारदीय नवरात्रि देवी दुर्गा की राक्षस महिषासुर पर विजय का प्रतीक है। आज से नौ दिन तक शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का पर्व मनाया जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार साल में चार नवरात्रि होती है। जिनमें दो गुप्त नवरात्रि तथा चैत्र एवं शारदीय नवरात्रे होते है। आज से शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्रि 12 अक्टूबर को नवमी तिथि के साथ पूर्ण होंगे।
शरद ऋतु में आने के कारण इनको शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान राम ने शारदीय नवरात्रि का प्रारम्भ तब किया था। जब उन्होंने माता सीता को रावण से छुड़ाने के लिए युद्ध किया था। तब श्री राम ने रामेश्वरम में समुद्र के किनारे नौ दिनों तक मां शक्ति की आराधना की थी। नवरात्रि के दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से आराधना करते हैं और उपवास रखते हैं।
आचार्य विवेकानंद शास्त्री बताते हैं कि इस बार माता पालकी पर सवार होकर आएंगी, जिससे समाज को, राजनीति को व विश्व को गति मिलेगी। नव निर्माण के कार्यों से लाभ मिलेगा। आचार्य विवेकानंद ढौंडियाल कहते हैं कि लोकदृष्टि से तो घट स्थापना का समय प्रात: 6:19 मिनट से 7:22 मिनट तक रहेगा तथा अभिजीत महूरत 11:53 से 12:39 तक रहेगा तथा दोपहर में 3 बजे से 3:54 मिनट तक रहेगा,
लेकिन मां की इतनी विशाल शक्ति है कि उनके पर्व पर किसी समय सीमा की आवश्यकता नहीं होती। अर्थात पूरे दिन घट स्थापना की जा सकती है। लोग सोचते हैं कि कोई भी पर्व पूजा सुबह ही होती है, लेकिन मां की नवरात्रि पर्व रात्रि का ही होता है जो भी लोग नवरात्रि में रात्रि पूजन करते हैं उनके सकल मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं।
नवरात्रि पर सजे बाजार
पितृ पूर्णिमा करने के पश्चात बुधवार को बाजारों की रौनक लौट आयी है। नवरात्रि के लिये खरीदारी करने के लिए शहर के मुख्य बाजारों सदर, लालकुर्ती, आबूलेन, बेगमपुल, शास्त्री नगर में लोगों की भीड़ नजर आई। देर रात तक लोग दुकानों पर माता की चुनरी, सांझी, तिलक, शृंगार, पूजा सामग्री, मां की पोशाक, घट, जौ, तिल, दीपक, हार इत्यादि की खरीदारी करते रहे।

