- लेटर बॉक्स खाली मोबाइल के इनबॉक्स फुल
- 1874 में ब्रिटिश शासन ने लेटर बाक्स को हरे रंग से बदलकर किया लाल रंग आज तक देश में प्रचलन
जनवाणी संवाददाता |
खरखौदा: विश्व डाक दिवस 9 अक्टूबर व देश में 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय डाक दिवस के रूप में मनाया जाता है परंतु आज आधुनिक दौर के चलते आधुनिक संचार, संसाधनों के आने के बाद डाक विभाग का महत्व पहले जैसा नहीं रहा है। अब चिट्ठी, पत्रों का स्थान वाट्सएप, जीमेल, फेसबुक आदि मोबाइल सेवाओं ने ले लिया है। लोग पल भर में देश प्रदेश में कहीं भी वीडियो कॉल कर रिश्ते, नातेदारों की खैर खबर ले सकते हैं। हालांकि रजिस्ट्री डाक व अन्य सरकारी योजनाओं के लिए लोग डाक विभाग की सेवा लेने को मजबूर हैं।
एक दौर था जब डाकिये के गली मोहल्ले में दिखते ही लोगों के चेहरे खिल उठते थे और डाकिये से उत्साह भरे अंदाज में पूछते थे कि क्या हमारी कोई चिट्ठी आई है और चिट्ठी मिलने पर उस समय शिक्षा के कम अभाव के कारण आसपड़ोस में किसी पढ़े लिखे व्यक्ति की तलाश कर उससे चिट्ठी पढवाते थे। मोबाइल फोन व इंटरनेट के दौर में उस समय के चिट्ठियों के महत्व को आज की पीढ़ी नहीं समझ सकती। उस दौर में लोग कागज के पन्ने पर अपनी राजी खुशी के अलावा अन्य महत्वपूर्ण बातें लिखकर एक-दूसरे के पास भेजने का एक मात्र साधन डाकखाना हुआ करता था, परंतु आज आधुनिक संचार संसाधनों के दौर में एक बटन दबाते ही देश विदेश के कोने में संदेश का आदान प्रदान कर एक-दूसरे की खैर खबर मिल जाती है।
अब नहीं दिखती डाक पत्र पेटिका
आज मोबाइल के युग में संदेश (सूचना) नेट के जरिये आदान प्रदान के चलन के कारण चिट्ठी पत्र भेजने के लिए शहर अथवा गांवों में लगे डाक पत्र पेटिका चिट्ठी पत्र भेजने को लगाई जाने वाली डाक पत्र पेटिका अब दिखाई नहीं देती।
ब्रिटिश शासन की परंपरा लेटर बॉक्स
एक रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटिश शासन में पहले हरे रंग का लेटर बाक्स हुआ करता था। हरे रंग के लेटर बाक्स ढूंढने व शिकायतों के बाद 1874 में ब्रिटिश सरकार द्वारा लाल रंग का लेटर बाक्स प्रचलन में लाया गया क्योंकि लाल रंग दूर से दिखाई देना बताया गया है। जहां-जहां ब्रिटिश सरकार रही वहां आज भी भारत की तरह लाल रंग के लेटर बाक्स का प्रचलन बताया गया है।

