- टीचरों को किया जाएगा दूसरे स्कूलों में मर्ज, अस्थायी की छीनेगी नौकरी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बच्चों के भारी टोटा के चलते सूबे की योगी सरकार 27 हजार स्कूलों को बंद करने का फरमान जारी कर सकती है। ऐसा होने पर जो टीचर इन स्कूलों में पढ़ाते हैं उन्हें दूसरे स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। जो टीचर अस्थायी हैं उनकी नौकरी छिनने की आशंका जतायी जा रही है। मेरठ समेत प्रदेश के जिन सरकारी प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम रह गयी है। सरकार की तमाम कोशिकों के बाद भी बच्चों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है ऐसे स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा।
सूबे की योगी सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी यदि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या नहीं बढ़ सकी तो इन स्कूलों के टीचरों के लिए भी मुसीबत बढ़ सकती हैं। जो स्थायी हैं उनको अन्य स्कूलों में मर्ज करने के नाम पर दूरदराज पढ़ाने के लिए भेजा जा सकता है, जो कच्चे हैं उनकी नौकरी पर तलवार लटक जाएगी। वहीं, दूसरी ओर सरकारी स्कूलों के बच्चों की कमी की वजह से बंद होने के चलते सरकार की चिंता भी बढ़ गई है। आशंका है कि विपक्षी दल इसको लेकर सरकार पर हमलावर हो सकते हैं। वहीं, दूसरी ओर आशंका है कि इसके चलते जल्द बंद हो सकते हैं, 27 हजार बेसिक स्कूल।
डीजी ने बैठक में दिए मर्जर की तैयारी के निर्देश। 50 से कम विद्यार्थियों वाले स्कूल किए गए चिन्हित। आसपास के स्कूलों में बच्चों का प्रवेश कराया जाएगा। डीजी स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने बीएसए को दिए निर्देश। प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की कम होती संख्या को लेकर ऐसे विद्यालयों का पास के विद्यालयों में मर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत 50 से कम नामांकन वाले विद्यालयों को चिह्नित कर उनके पास के विद्यालय में भेजने को लेकर सभी जिलों में रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
वहीं, जर्जर विद्यालयों को भी एक महीने में ध्वस्त कराने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। हाल ही में प्रदेश के सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक व शसिक शिक्षा अधिकारियों की बैठक। जिसमें महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने कहा है कि ऐसे सभी विद्यालयों के बारे में जिले की एक संयुक्त बुकलेट तैयार की जाए। ताकि 13 या 14 नवंबर को बीएसए की प्रस्तावित बैठक में इस पर चर्चा की जा सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि अभियान चलाकर जर्जर विद्यालयों के भवनों का ध्वस्तीकरण एक महीने में किया जाए। यदि विद्यालय का भवन जर्जर है, लेकिन पढ़ाई के लिए पर्याप्त संख्या में क्लास हैं तो फिर भवन पुर्ननिर्माण के लिए प्रस्ताव नहीं भेजा जाएगा।
अधिवक्ता आज नहीं करेंगे कार्य
मेरठ: रविवार शाम निंबस वाटिका पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं की आपातकालीन बैठक का आयोजन किया गया। गाजियाबाद में अधिवक्ताओं जनपद न्यायाधीश की अगुवाई में हुए लाठीचार्ज पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सोमवार को पूर्ण बंद रखा जाएगा और विरोध स्वरूप जनपद न्यायाधीश को ज्ञापन भी दिया जायेगा। जिसमें अधिवक्ताओं के न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा हो रहे दुर्व्यवहार और बेवजह केस को लंबित करने के संदर्भ में विरोध दर्ज कराया जायेगा। ज्ञापन द्वारा गाजियाबाद के जनपद न्यायाधीश के निलंबन की मांग हाईकोर्ट से करने के लिए निवेदन किया जायेगा।
आज कोई भी अधिवक्ता कार्य नहीं करेगा। साथ ही मेरठ जोन से लाठीचार्ज के दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई के लिए आग्रह किया जायेगा। वक्ताओं ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यही अधिवक्ताओं की मांगे नहीं मानी गई तो प्रखर और उग्र आंदोलन करने पर अधिवक्ता बाध्य होंगे। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता वीके शर्मा, रामकुमार शर्मा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष विनोद काजीपुर, संघटन मंत्री सहारनपुर रणदीप पुंडीर, संस्थापक सदस्य सल्लाउद्दीन, राजीव गोयल, रवि कुमार, आलोक कुमार, प्रवीण सुधार पूर्व महामंत्री जिला बार आदि अधिवक्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

