- शताब्दीनगर में चल रही शिवमहापुराण के छठे दिन पंडाल में लाखों श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब, कथा का प्रारंभ ओम नम: शिवाय के जाप के साथ किया
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शिवरात्रि शिव और पार्वती के मिलन की होती है। मगर शिव महापुराण में जो शिवरात्रि होती है वह शिव और उसके भक्त के मिलन की होती है। शताब्दी नगर में चल रही शिवमहापुराण के छठे दिन पंडाल में दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा का प्रारंभ ओम नम: शिवाय के जाप के साथ किया गया। कथा प्रारंभ करते हुए कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा जो कथा सुनने आए हैं वह कथा में अपना दिमाग नहीं बल्कि दिल लगाए।
शंकर को अपना हृदय देंगे तो शंकर उसको स्वयं को दे देते हैं। शिव तत्व का सुख जीवन का एक आनंद है। शिव महापुराण का उल्लेख करते हुए कहा कि जब मां पार्वती शिव के पास बैठकर कथा का रसपान करती है तो पार्वती के नयनों में जल भर आता है। क्योंकि उनको अपने पूर्व जन्म का भाव होता है। वो सती बनी थी और कुंबज ऋषि के यहां कथा सुनने के लिए गई थी। तब उस जगह पर उनका मन कथा में नहीं लगा था।
उनके भीतर अहंकार आ गया था और कथा उनसे छूट गई थी। फिर पार्वती उमा बनी भगवान महेश के साथ कथा सुनने के लिए गई थी। उनका मन वहां भी नहीं लगा। कथा में फिर मां कात्यायनी शंकर के साथ कथा सुनने के लिए गई। उन्होंने कहा कि एक दिन की शिव पुराण सुनने को मिल जाए तो समझ लेना कहीं शंकर ने तुम्हारे हाथ पढ़कर खींचने की तैयारी कर ली है।
किन्नर समाज का किया वर्णन
कथा में प्रसंग के द्वारा किन्नर समाज का वर्णन करते हुए कहा कि जब भगवान शंकर अपने अर्द्धनारीश्वर के स्वरूप में आए तो ब्रह्मा जी समझ नहीं पाए और किन्नर की उत्पत्ति हुई। जब किन्नर की उत्पत्ति हुई तो पूरी पृथ्वी पर वो ही नजर आने लगे। जिसका रूप देखकर नारायण ने उनका उपहास लिया जिससे आहात होकर शंकर ने नारायण को श्राप दिया कि एक बार पृथ्वी पर जाकर उन्हें भी किन्नर बनना पड़ेगा।
नशे को त्यागो, शिव पर विश्वास बढ़ाओ
युवाओं में बढ़ती हुई नशे की आदत पर उन्होंने कहा अपने भीतर शिव के विश्वास को बढ़ाओ, अपने भीतर से नशे को त्यागने की आदत बना लो तो निश्चित ही नशा छूटेगा। आॅक्सीजन सिलेंडर के साथ व्हील चेयर पर पहुंची कथा सुनने कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा सुनने गंभीर बीमारी से ग्रस्त शीतल देवी हरियाणा के करनाल से बेटे के साथ मिनी आॅक्सीजन सिलेंडर लगाकर व्हील चेयर पर पहुंची। शीतल ने बताया मिश्रा की कथा सुनने जरूर जाती हूं।
नम्रता नहीं तो डिग्री बेकार
पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि शिव महापुराण कथा कहती है कि विद्वान पर नम्रता नहीं है तो डिग्री से ज्यादा श्रेष्ठ वह होता है जो विद्यमान होता है। यदि तुम्हारे अंदर नम्रता नहीं है तो डिग्री बेकार है। विद्यमान का सबसे बड़ा लक्षण उसकी कोमलता, श्रेष्ठता उसके सम्मुख से जो आए उसे नमन करके सम्मान देना है।
नीरज मित्तल ने कथावाचक प्रदीप मिश्रा को पहनाया चांदी का मुकुट
दिल्ली रोड स्थित शताब्दीनगर में चल रही शिव महापुराण भागवत कथा के छठे दिन यजमान के तौर पर रहे वरिष्ठ भाजपा नेता और मेरठ संयुक्त व्यापार संघ के उपाध्यक्ष नीरज मित्तल ओर उनकी धर्मपत्नी रीता मित्तल रहे। नीरज मित्तल ने कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा को चांदी का मुकुट पहनाया। इसके बाद प्रदीप मिश्रा ने नीरज मित्तल और उनकी धर्मपत्नी रीता मित्तल को आशीर्वाद भी दिया।
कथा में ये रहे मौजूद
ऊर्जा राज्यमंत्री डा. सोमेंद्र तोमर, राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, राज्यमंत्री दिनेश खटीक, मेयर हरिकांत अहलूवालिया, वरुण अग्रवाल, आशीष प्रताप सिंह, जितेंद्र अट्टू, अक्षय गोयल, अमन अग्रवाल, जेपी अग्रवाल, संदीप गोयल, आशीष बंसल, कृष्ण कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।

