जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर में संचालित सिटी बसों की तय संचालन अवधि पूरी होने के बाद उन्हें बंद कर दिया गया। इसके बाद रोजाना यात्रियों से भरा पूरा दिखने वाला सोहराब गेट बस डिपो वीरान नजर आया। इस दौरान यात्री बसों को पकड़ने पहुंचे मगर बसों के ना चलने से परेशान होकर दूसरी सवारी ढूंढते नजर आए। अचानक हुई इस कार्रवाई से रोजाना इन बसों से सफर करने वाले सैकड़ों यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दिन भर यात्री अपने गंतव्य पर पहुंचने के लिए सिटी बसों की राह देखते रहे। बता दें कि मेरठ जिले में 96 सीएनजी बसे सरधना, किठौर, मोदीनगर, सिवालखास, हर्रा और खिवाई समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित की जा रही है।
गुरुवार को इन सिटी बसों की नियाद पूरी कर इनके पाहियों को थाम दिया गया। ऑपरेशनइंचार्ज सचिन कुमार ने बताया कि इस संदर्भ में बोर्ड मीटिंग कमीशन से बात चल रही है। जिसका निष्कर्ष इस माह की अंत तक निकलने की सम्भावना है। फिलहाल बसों की कोई भी वाकल्पिक व्यवस्था नहीं है। आज से रोज की तरह यात्रियों के लिए अलग-अलग रूटों पर केवल 35 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। क्योंकि इस समय 35 इलेक्ट्रॉनिक बसें बैट्री के कारण ठप खड़ी है। अचानक बसों का संचालन बंद होने से सस्ती और सुलभ मानी जाने वाली सिटी बसों के बंद होने से छात्रों, कामकाजी लोगों और बुजुर्गों की यात्रा मुश्किल हो गई है। बता दे कि रोजाना ग्रामीण क्षेत्रों से कई छात्र और कामकाजी लोग शहर में काम करने आते हैं। ऐसे में बसों का संचालन एकदम से बंद हो जाना यात्रियों को परेशान करने वाला है।
बेरोजगार हुए चालक और परिचालक
शहर में सिटी बसों के संचालन की समयावधि पूरी होने के बाद बसों को अचानक बंद कर दिया गया है। जिससे जहां एक ओर यात्री परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर इन बसों से जुड़े 150 संविदा परिचालक और 200 ड्राइवर बेरोजगार हो गए हैं। सैकड़ों कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। इनमे कई कंडक्टर और चालक ऐसे हैं जिनकी आजीविका का एकमात्र साधन यही नौकरी थी। अब ये कर्मचारी भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। चाय सचिन कुमार ने बताया कि फिलहाल शहर में 8 वोल्वो बस से भी संचालित की जा रही है। जिनमें से इन्हीं ड्राइवर और संविदा कर्मियों में से किसी न किसी की ड्यूटी लगाई जा रही है।

