Friday, March 27, 2026
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UP में ‘नेम प्लेट विवाद’ फिर गर्माया, कांवड़ यात्रा से पहले सरकार की सख्ती पर विपक्ष ने साधा निशाना

जनवाणी ब्यूरो |

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को लेकर जारी प्रशासनिक सख्ती और खासकर दुकानों पर ‘नेम प्लेट अनिवार्यता’ के आदेश ने एक बार फिर सियासी हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में राज्य सरकार जहां श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वच्छता और भोजन की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश जारी कर रही है, वहीं विपक्ष इसे धार्मिक भेदभाव और निजता का उल्लंघन बता रहा है।

क्या है ‘नेम प्लेट विवाद’?

विवाद की जड़ जुलाई 2024 में है, जब मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से निर्देश जारी हुआ कि कांवड़ मार्ग पर सभी दुकानदारों को अपना नाम, पता और मोबाइल नंबर दुकान पर साफ-साफ लिखना होगा। सरकार का कहना था कि इससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी, साथ ही हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर फैल रहे भ्रम पर भी रोक लगेगी।

हालांकि, 22 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा कि इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करना निजता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

इसके बावजूद 24 सितंबर 2024 को मुख्यमंत्री ने नया आदेश जारी किया जिसमें सिर्फ कांवड़ मार्गों पर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में भोजनालयों और रेस्तरां में मालिक, मैनेजर और कर्मचारियों के नाम-पते प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया। साथ ही सीसीटीवी, मास्क-ग्लव्स और पुलिस वेरिफिकेशन जैसे प्रावधान भी लागू किए गए।

2025 में दोबारा सख्ती: कांवड़ यात्रा से पहले नए निर्देश

25 जून 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा से पहले एक बार फिर स्पष्ट निर्देश दिए:

कांवड़ मार्गों पर खुले में मांसाहारी भोजन की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित

दुकानों पर नाम, पता और मोबाइल नंबर का प्रदर्शन अनिवार्य

खाने की तय कीमतें, साफ-सफाई, और प्रतिबंधित पशुओं की आवाजाही पर सख्त निगरानी

खाद्य गुणवत्ता की निगरानी के लिए टीमें तैनात

विपक्ष ने साधा निशाना

सरकार के इन निर्देशों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है:

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा, “आप दुकानदार को लाइसेंस देते हैं, नाम क्यों पूछते हैं? अगर नियम तोड़ा जाए तो जुर्माना लगाइए, लेकिन नाम पूछना आपत्तिजनक है।”

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, “यह देश मोहब्बत का है, नफरत का नहीं। मुसलमान भी कांवड़ियों की सेवा करते हैं, ऐसे में यह फैसला साझा विरासत को ठेस पहुंचाता है।”

प्रमोद तिवारी (कांग्रेस नेता) ने कहा, “कांवड़ यात्रा श्रद्धा का विषय है, इसमें सुविधाओं की जिम्मेदारी सरकार की है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन होना चाहिए।”

सरकार की सफाई

सरकार ने कहा है कि इन निर्देशों का उद्देश्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। नाम-पते प्रदर्शित करने की व्यवस्था से खाद्य मानकों का उल्लंघन करने वालों की पहचान आसान होगी। साथ ही, प्रशासन का दावा है कि यह कदम धार्मिक भेदभाव नहीं बल्कि जनहित में लिया गया है।

बता दें कि, उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासनिक तैयारियों के बीच ‘नेम प्लेट’ जैसे आदेशों ने धार्मिक और राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक के बावजूद प्रदेश सरकार ने सख्ती बरकरार रखी है, जिससे यह मसला आस्था, निजता और शासन के बीच संतुलन की नई चुनौती बन गया है।

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