Tuesday, March 31, 2026
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आउट सोर्सिंग कंपनी पर हमेशा रही अफसरों की मेहरबानी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कान्हा उपवन गोशाला में गोपलकों की आपूर्तिकर्ता मैसर्स जैन कंप्यूटर पर हमेशा से अफसरों निगाहें नरम रही हैं। इस कंपनी का पश्चिमी उप्र के मेरठ व बागपत समेत कई जिलों के सरकारी आफिसों में होल्ड है। परतापुर थाने पर दर्ज कराए मुकदमे की मामूली धाराएं भी कई सवाल उठा रही हैं।

सर्विस प्रोवाइडर कंपनी मैसर्स जैन कंप्यूटर का ताल्लुक मेरठ से है। उसके मालिक तथा परिवार के सदस्यों तथा उनके द्वारा बनाए गए ट्रस्ट के नाम उप्र सरकार के जेम पोर्टल पर एक दर्जन से अधिक कंपनियां सूचीबद्ध हैं। इन कंपनियों के द्वारा सरकारी आॅफिसों में आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारी की तैनाती तथा अन्य सामान की आपूर्ति की जाती है। मैसर्स जैन कंप्यूटर वर्तमान में नगर निगम की परतापुर स्थित कान्हा उपवन गोशाला की सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के रूप में चर्चाओं में आई है। चर्चा में आने का मुख्य कारण मैसर्स जैन कंप्यूटर सदर बाजार तथा शिवम इंटरप्राइजेज कुशीनगर पर सहायक नगर आयुक्त शरद कुमार पाल द्वारा मामूली धाराओं में दर्ज कराया मुकदमा है। इन धाराओं में आरोपी को जेल नहीं जाना पड़ेगा बल्कि अदालत जमानत दे देगी। सर्विस प्रोवाइडर मैसर्स जैन कंप्यूटर कंपनी पिछले साल उस समय चर्चाओं में आई थी, जब उसके द्वारा बागपत के समाज कल्याण विभाग को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह के लिए आपूर्ति किए गए सामान पर तत्कालीन जिलाधिकारी जेपी सिंह ने पीड़ित परिजनों की शिकायत पर जांच बैठा दी थी। बागपत में 26 नवंबर, 2024 को प्रथम चरण में 252 जोड़ों के सामूहिक विवाह हुए थे। एडीएम न्यायिक सुभाष सिंह की जांच में दुल्हन को दी जाने वाली चांदी की पायजेब में लैब में जांच के बाद महज 40 फीसदी चांदी पाई गई थी जबकि 60 फीसदी गिलट निकली थी। इसी तरह दुल्हन की साड़ी, दुल्हे का पैंट शर्ट, सूटकेस तथा अन्य सामान की गुणवत्ता भी खराब मिली थी। जांच अधिकारी एडीएम न्यायिक सुभाष सिंह ने अपनी जांच रिपोर्ट में मैसर्स जैन कंप्यूटर के बिल भुगतान में कटौती के साथ-साथ भविष्य के लिए कंपनी को ब्लैक लिस्ट किए जाने की मंशा जाहिर की थी। साथ ही, डीएम जेपी सिंह ने जांच रिपोर्ट आने के बाद सीडीओ नीरज कुमार श्रीवास्व से स्पष्टीकरण भी मांगा था। इसके अलावा बागपत के वन स्टॉप सेंटर में फर्जी डिग्री पर ही तीन नर्स की नियुक्ति करा दी गई थी। इतना ही नहीं, बागपत के सीडीओ नीरज कुमार श्रीवास्तव द्वारा जिस कार यूपी 15 डीएन, 5474 का उपयोग किया जा रहा है, वह भी कंपनी के मालिक के नाम पर परिवहन विभाग में रजिस्टर्ड है जबकि कार कॉमर्शियल में रजिस्टर्ड भी नहीं है।

अफसरों और नेताओं में गहरे ताल्लुक

सर्विस प्रोवाइडर कंपनी मैसर्स जैन कंप्यूटर के मालिक के राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ नौकरशाही के बीच तक गहरी पकड़ है। इसलिए जब-जब मैसर्स जैन कंप्यूटर पर संकट के बादल मंडराए तो राजनेता और अफसर उसके खेवनहार बनकर आ गए। इतना ही नहीं, अगर किसी एक विभाग के अफसर ने उनकी कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया भी तो उसी आॅफिस में बड़े पेट वाले बाबुओं की मेहरबानी से उनकी दूसरी कंपनी कॉन्टेÑक्ट किया गया। इस तरह सरकारी महकमे में उनका कार्य बदस्तूर जारी रहा।

ड्यूटी से लेकर चारे तक में घोटाले की ‘बू’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वकांक्षी योजना कान्हा उपवन गोशाला में कर्मचारियों की ड्यूटी से लेकर चारे तक में घोटाले की बू आ रही है। नगर निगम के अधिकारियों ने इस गोशाला की देखरेख करने वाली आउटसोर्सिंग कंपनियों पर पूरी तरह छोड़ दिया था। नगर निगम के आला अधिकारियों ने गोशाला का निरीक्षण नियमित रूप से जल्दी-जल्दी क्यों नहीं किया? अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा गायों की मौत और गोवंश की दुृर्दशा के रूप में सामने आया। इससे प्रदेशभर ही नहीं पूरे देश यहां तक की विदेश तक में मेरठ की किरकिरी हो गई।

नगर निगम द्वारा संचालित बराल परतापुर स्थित कान्हा उपवन गोशाला में करीब ढाई हजार गोवंश है। यहां गोवंश की देखभाल, उन्हें चारा देने, उन्हें नहलाने और सफाई आदि कार्य करने के लिए दो आउटसोर्सिंग कंपनियां मैसर्स जैन कंप्यूटर सदर मेरठ और मैसर्स शिवम इंटरप्राइजेज ठेका दिया हुआ है। उक्त कंपनी ने ड्यूटी पर 54 कर्मचारी दर्शाये, जबकि जांच में वहां 44 कर्मचारी ड्यूटी पर पाए गए। यानी उक्त कंपनी 44 कर्मचारियों से काम लेकर नगर निगम से 54 कर्मचारियों का मानदेय ले रही थी। जांच में यह भी पाया गया कि गोवंश को उचित मात्रा में चारा भी नहीं दिया जा रहा था। यानि रिकार्ड में मानक के अनुरूप गोवंश को चारा देने दर्शाकर और गोवंश को कम चारा देकर भी घोटाला किया जा रहा था। अधिकारियों द्वारा नगर निगम के चालू वित्तीय वर्ष के बजट में कान्हा उपवन में आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों के अधिष्ठान पर दो करोड़ रुपये और चारे की मद में चार करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान दर्शाकर पास करा लिया गया, जबकि उक्त गोशाला के प्रभारी रहे तत्कालीन प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह ने मीडिया को थाने में दिए गए बयान में स्वीकारा कि हर माह 28 से 30 लाख रुपये का चारा आता है। उनके अनुसार करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये चारे पर खर्च इस वर्ष होगा।

मामले की जांच में परते खुलकर सामने आने लगीं। पता चला कि अधिकारी कान्हा उपवन के निरीक्षण से परहेज रखते थे। इस गोशाला का पूरी तरह संचालन उक्त कंपनियों पर छोड़ रहा था। इसका नतीजा गायों की मौत और दुर्दशा के रूप में सामने आया। यदि आला अधिकारी इस गोशाला का कम कम समय के अंतराल में करते तो गोवंश की यह हालत नहीं हो पाती।

मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद हरकत में आए निगम के अफसर

नगर निगम द्वारा संचालित कान्हा उपवन में गो माताओं की मौत और दुर्दशा का मामला गो माताओं से अटूट प्रेम करने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी के बाद निगम के अधिकारी हरकत में आए। इस मामले में लीपापोती करने में जुटे अधिकारियों ने आनन-फानन में देर रात प्रमुख सचिव नगर विकास का मार्गदर्शन लिया मंडलायुक्त व डीएम के साथ मंथन किया। आखिरकार कान्हा उपवन की अव्यवस्थाओं के लिए दो जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पद से हटाए गए पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह के खिलाफ पशु कु्ररता अधिनियम व दो अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराकर उनकी गिरफ्तारी भी कराई गई।

दरअसल, कान्हा उपवन में गत दिनों गायों की मौत और बीमार व घायल गोवंश के गंदगी में पड़े होने तथा जलभराव के बीच गोवंश के रहने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद उक्त खबर समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी। मामले को डीएम डॉ. वीके सिंह ने संज्ञान लेकर एडीएम सिटी की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई थी। उधर, नगरायुक्त ने अपर नगरायुक्त लवी त्रिपाठी की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाई थी। वार्ड-44 से भाजपा पार्षद उत्तम सैनी ने इस मामले की लिखित शिकायत प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह से की थी और उनसे गोशाला का निरीक्षण करने का आग्रह किया था। प्रभारी मंत्री ने निरीक्षण के दौरान गोशाला की बदहाली देखकर नाराजगी जताई थी। मंत्री के आदेश के बाद नगरायुक्त ने पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह को गोशाला के प्रभारी पद से हटा दिया था।

इसके बाद डीएम द्वारा गठित कमेटी की जांच में डॉ. हरपाल सिंह दोषी पाए गए। उधर नगरायुक्त गठित कमेटी की जांच में डॉ. हरपाल के साथ-साथ सहायक नगरायुक्त शरद पाल को भी दोषी मानते हुए गोशाला के वरिष्ठ प्रभारी के पद से हटा दिया था। मंडलायुक्त हृषिकेश भास्कर याशोद ने डॉ. हरपाल के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव नगर विकास को पत्र भेजा। इसके बाद नगरायुक्त ने इस गोशाला में पशुओं की देखरेख उनके चारे आदि देने का कार्य करने वाली मैसर्स जैन कम्प्यूटर सदर मेरठ और शिवम एंटरप्राइजेज कुशीनगर के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन मामला क्योंकि मुख्यमंत्री तक पहुंच गया था और उनकी नाराजगी को देखते हुए निगम के अधिकारियों ने सोमवार की देर तक तक प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मंथन कर प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात से मार्गदर्शन लेकर डॉ. हरपाल सिंह के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम व दो अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराकर उनकी गिरफ्तारी कराई। अगर मुख्यमंत्री नाराज नहीं होते तो निगम के अधिकारी इस मामले को दबाने में कामयाब हो जाते।

डॉ. हरपाल ने हस्ताक्षर कर निकाला लीगेसी वेस्ट प्लांट का टेंडर

मेरठ (जनवाणी): कान्हा उपवन में गोवंश की मौतों व दुर्दशा के लिए जांच में दोषी पाए जाने के बाद जेल में बंद हुए तत्कालीन प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह एक और मामले में फंस गए हैं। डॉ. हरपाल ने लोहियानगर और गांवड़ी में लीगेसी वेस्ट प्लांट की स्थापना के लिए केवल अपने हस्ताक्षर करके टेंडर पोर्टल पर अपलोड कर दिया।

दरअसल, कूड़ा निस्तारण के लिए नगर निगम द्वारा लोहियानगर के डंपिंग यार्ड में और गांवड़ी में एक एक लीगेसी वेस्ट प्लांट की स्थापना की जानी है। इसके लिए डॉ. हरपाल सिंह ने हाल ही में प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर रहते हुए केवल अपने हस्ताक्षर करके निविदा पोर्टल पर आमंत्रित कर डाली। जबकि टेंडर आमंत्रित करने के लिए जिस लिपिक ने टेंडर आमंत्रण पत्र बनाया, उसके हस्ताक्षर होने जरूरी है। इसके साथ-साथ किसी पीसीएस स्तर के अधिकारी के हस्ताक्षर होने जरूरी है। गत दिनों डॉ. हरपाल ने केवल अपने हस्ताक्षर करके टेंडर अपलोड कर दिया। यह मामला भी वार्ड-44 से भाजपा पार्षद उत्तम सैनी ने उठाया है। उत्तम सैनी का कहना है कि डॉ. हरपाल ने किसी अपने चहेते ठेकेदार को टेंडर देने के लिए केवल अपने हस्ताक्षर करके दो लीगेसी वेस्ट प्लांट की स्थापना के लिए टेंडर पोर्टल पर अपलोड कर दिए। यह नियम विरुद्ध है। उन्होंने उक्त टेंडर को निरस्त करके री टेंडर की प्रक्रिया को अपनाने की बात कही।

महापौर और नगरायुक्त पर भी उठ रही अंगुली

कान्हा उपवन गोशाला में गायों की मौत और गोवंश की दुर्दशा मामले में प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल के खिलाफ तो कार्रवाई कर दी गई, लेकिन अब महापौर व नगरायुक्त पर भी अंगुली उठ रही है। भाजपा पार्षद उत्तम सैनी ने प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह से लिखित शिकायत कर कहा था कि नगर निगम भ्रष्ट अधिकारियों का अड्डा बन गया है। उन्होंने नगरायुक्त पर समस्याएं न सुनने का आरोप लगाया। उधर, एआईएमआईएम के पार्षद फजल करीम ने सवाल किया कि गोशाला प्रकरण में दोषी पाए गए प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी के साथ-साथ क्या महापौर और नगरायुक्त की कोई जिम्मेदारी नहीं है? उन्होंने शासन प्रशासन से मामले की जांच कराने की मांग की। अब देखना यह है कि शासन जांच बैठाकर उसमें दोषी पाए जाने वाले किसी बड़े अधिकारी या जनप्रतिनिधि के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है या नहीं।

नगर निगम द्वारा संचालित कान्हा उपवन में गायों की मौत होने और गोवंश की दुर्दशा का मामला हॉट बना हुआ है। नगर निगम में उक्त गोशाला के वरिष्ठ प्रभारी रहे सहायक नगरायुक्त शरद पाल ने गोशाला के प्रभारी रहे प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। लोगों को इतनी ही कार्रवाई पूरी नहीं लग रही। भाजपा पार्षद उत्तम सैनी ने प्रभारी मंत्री से शिकायत कर कहा था कि निगम भ्रष्ट अफसरों का अड्डा बन गया। उनका कहना है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। जांच में स्पष्ट हो जाएगा कि कौन अधिकारी दोषी है। वहीं, दूसरी ओर एआईएमआईएम के पार्षद फजल करीम का कहना है कि गोशाला में गायों की मौतों और गोवंश की दुर्दशा का मामला बेहद गंभीर है। इस मामले की जांच नगर निगम के अधिकारियों ने की, जिसके आधार पर प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई। उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या गोशाला प्रकरण में दोषी पाए गए प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी के साथ क्या महापौर, नगरायुक्त की कोई जिम्मेदारी नहीं है? उन्होंने शासन प्रशासन से जांच कराने और जो भी दोषी पाया जाए उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

गोशाला की निगरानी में 12 सीसीटीवी कैमरे लगाए, छह होमगार्ड तैनात

बराल परतापुर में नगर निगम द्वारा की कान्हा उपवन गोशाला में घोर अनियमितताएं मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त आदेश पर नगर विकास विभाग ने कड़ा एक्शन लेते हुए जहां गोशाला की देखभाल करने वाली दो आउटसोर्सिंग फर्मों को ब्लैक लिस्ट करके उनके संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। वहीं, गोशाला के प्रभारी रहे प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके उन्हें जेल भेज दिया गया। गोशाला के अभिलेख अपूर्ण मिलने पर लिपिक विकास शर्मा को निलंबित कर दिया गया और केयर टेकर निलंबत कर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। वह फरार है। उधर, गोशाला की निगरानी बढ़ा दी गई। आनन-फानन में 12 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए।

छह होमगार्डस तैनात कर दिए गए। आउटसोर्सिंग के 50 कर्मचारी तैनात किए गए। इनकी हाजिरी फेस रेकग्निशन सिस्टम से ली जाएगी। मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद कान्हा गोशाला की व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने में नगर निगम जुट गया है। गोशाला के वरिष्ठ प्रभारी सहायक नगरायुक्त शरदपाल से गोशाला का कार्यभार छीनकर अपर नगरायुक्त पंकज सिंह को दिया गया। प्रभारी रहे प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही उनकी गिरफ्तारी हो गई। आनन फानन में 50 कर्मचारियों की तैनाती आउटसोर्सिंग से की गई। दो शिफ्टों में 25-25 कर्मी तैनात रहेंगे। उनकी हाजरी फेस रेकग्निशन सिस्टम से ली जाएगी। गोशाला में 12 सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए हैं। छह होमगार्ड की तैनाती कर दी गई। अब हर शिफ्ट में गोवंश का कितना चारा दिया गया, रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है। इसकी वीडियाग्राफी की जा रही। पशु चिकित्साधिकारी अब नियमित पशुओं का परीक्षण कर रहे हैं। घायल गोवंश को ट्रॉमा सेंटर में रखा जा रहा है।

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