
कार्तिक पूर्णिमा 5 नवम्बर दिन बुधवार को मनाई जाएगी। कार्तिक पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 04 नवंबर मंगलवार को रात 10:36 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 05 नवंबर बुधवार को शाम 6:48 मिनट पर समाप्त होगी। ग्गंगा स्नान मुहूर्त सुबह 04:52 से सुबह 5:44 तक पूजा का मुहूर्त सुबह 07:58 से सुबह 09:20 तक। प्रदोषकाल देव दीपावली मुहूर्त शाम 05:15 बजे से रात 07:5 मिनट तक है। वहीं, चंद्रोदय शाम 5:11 मिनट पर होगा।
कार्तिक पूर्णिमा पर सूर्योदय से पहले गंगा स्नान करें, कार्तिक पूर्णिमा दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर ऐसा करना संभव नहीं है। तो घर पर ही सामान्य जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित कर ॐ घृणि: सूर्याय नम: मंत्र का जप करें। पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव करें और चौकी पर साफ लाल कपड़ा बिछाएं। फिर गंगाजल से घर में छिड़काव करें। फिर फलाहार व्रत का संकल्प लीजिए. इस व्रत में सभी प्रकार के अनाज, मसाले, तंबाकू, चाय-कॉफी तामसिक भोजन वर्जित हैं। सर्व प्रथम गणेश पूजन करिए। इस दिन देवी पार्वती सहित भगवान शिव की षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी को पूजन सामग्री चढा़एं। इस दिन सत्यनारायण कथा का पाठ करिए। कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्वर्ग के सभी देवी-देवता गंगा स्नान करने के लिए धरती पर आते हैं। जिसके कारण इसे देव दीपावली भी कहा जाता है।
इसी दिन श्री गुरू नानकदेव जी की पावन जयंती भी मनाई जाती है। पूर्णिमा तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन पर स्नान-दान करना काफी शुभ माना गया है। इससे साधक को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति हो सकती है। पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी जी की आराधना करने से जातक को धन संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। ऐसे में आप इस दिन पर मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए ये उपाय कर सकते हैं। इस दिन ब्राह्मण को अन्न, वस्त्र, घी, तिल, चावल आदि का दान करना शुभ फलदायी होता है। साथ ही इस दिन किसी तालाब में दीपदान जरुर करिए। इस दिन का महत्व विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से बताया गया है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के रूप में मत्स्य अवतार का जन्म हुआ था, जो सृष्टि के विनाश और पुनर्सृजन की कथा से जुड़ा है।
इस दिन किए गए पुण्य कर्मों का फल अन्य दिनों की तुलना में अधिक होता है। विशेषकर गंगा नदी में स्नान और दीपदान को अत्यधिक पुण्यकारी माना गया है। भगवान शिव के भक्तों के लिए भी यह दिन खास होता है, क्योंकि इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था, जो संसार के लिए एक बड़ा संकट बना हुआ था। इसलिए, इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी मनाया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी के पूजन के दौरान उन्हें लाल रंग के फूल अर्पित करें। इसके साथ आप इस दिन पर (कनकधारा स्त्रोत) का पाठ भी जरूर करना चाहिए। इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और साधक को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसके अलावा पूर्णिमा के दिन 11 कौड़ियों पर पिसी हुई हल्दी लगाकर इन्हें माता लक्ष्मी की पूजा में अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। इसके बाद इन कौड़ियों को धन वाले स्थान या तिजोरी में रख दें। ऐसा करने से आपकी धन संबंधी समस्याएं दूर हो सकती हैं।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के रूप में मत्स्य अवतार का जन्म हुआ था, जो सृष्टि के विनाश और पुनर्सृजन की कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्मों का फल अन्य दिनों की तुलना में अधिक होता है। विशेषकर गंगा नदी में स्नान और दीपदान को अत्यधिक पुण्यकारी माना गया है। कार्तिक पूर्णिमा पर दान का बड़ा महत्व माना जाता है। कहा जाता है कि इस पुण्यकारी अवसर पर अन्न और भोजन का दान सर्वोत्तम है।
गंगा जी में स्नान करने से सात्त्विकता और पुण्यलाभ प्राप्त होता है। भारत की अनेक धार्मिक अवधारणाओं में गंगा नदी को देवी के रूप में दशार्या गया है। अनेक पवित्र तीर्थस्थल गंगा नदी के किनारे पर बसे हुये हैं। गंगा नदी को भारत की पवित्र नदियों में सबसे पवित्र नदी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता अनुसार गंगा में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है। लोग गंगा के किनारे ही प्राण विसर्जन या अंतिम संस्कार की इच्छा रखते हैं तथा मृत्यु पश्चात गंगा में अपनी राख विसर्जित करना मोक्ष प्राप्ति के लिये आवश्यक समझते हैं। लोग गंगा घाटों पर पूजा अर्चना करते हैं और ध्यान लगाते हैं।
गंगाजल को पवित्र समझा जाता है तथा समस्त संस्कारों में उसका होना आवश्यक माना गया है। गंगाजल को अमृत समान माना गया है। अनेक पर्वों और उत्सवों का गंगा से सीधा संबंध है मकर संक्राति, कुंभ और गंगा दशहरा के समय गंगा में स्नान, दान एवं दर्शन करना महत्त्वपूर्ण समझा माना गया है। गंगा पर अनेक प्रसिद्ध मेलों का आयोजन किया जाता है।

